UP: धर्मांतरण से जुड़े आरोपियों के कनेक्शन तलाश रही पुलिस, आरोपी पिता-पुत्री की नहीं हो सकी है गिरफ्तारी
Hamirpur News: मामले में पुलिस अज्ञात लोगों की तलाश के लिए टेक्निकल साक्ष्य जुटा रही है। इसमें नायब तहसीलदार व अन्य आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने के साथ उनकी लोकेशन ट्रैस की जा रही है। इससे मामले में जुड़े अन्य लोगों के भी नाम सामने आ सकते है।
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हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे में तैनात नायब तहसीलदार का धर्मांतरण करा निकाह कराने के आरोपी पिता-पुत्री भूमिगत है। इसके चलते अभी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हालांकि पुलिस टेक्निकल साक्ष्य जुटा अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है। मामले में तहसील में तैनात कर्मचारियों से भी पूछताछ हो सकती है।
मौदहा में तैनात रहे नायब तहसीलदार आशीष गुप्ता के धर्मांतरण कर यूसुफ बनने व मुस्लिम युवती से निकाह करने के मामले में आरोपी 10 लोगों में तीन की गिरफ्तारी हो सकी है। जबरन धर्मांतरण कराने में आरोपी पिता-पुत्री समेत चार अज्ञात की गिरफ्तारी अभी शेष है। पिता-पुत्री के भूमिगत होने से पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। वहीं मामले में अज्ञात लोगों की तलाश के लिए टेक्निकल साक्ष्य जुटा रही है।
इसमें नायब तहसीलदार व अन्य आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने के साथ उनकी लोकेशन ट्रैस की जा रही है। इससे मामले में जुड़े अन्य लोगों के भी नाम सामने आ सकते है। इसके अलावा नायब तहसीलदार कार्यालय के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। सीओ सदर राजेश कमल ने बताया कि सीडीआर खंगाली जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
सीसीटीवी कैमरे लगवाने को लेकर मोहल्लेवासियों से हुआ था विवाद
धर्मांतरण में आरोपी पिता पुत्री के मोहल्ले में पड़ोसी व्यक्ति द्वारा सीसीटीवी कैमरा लगवाया गया। जिसे लेकर नायब तहसीलदार से निकाह करने वाली युवती व परिजनों ने इसका विरोध किया। जिसे लेकर पड़ोसियों से विवाद भी हुआ। बाद में सीओ की सख्ती के बाद लगने दिया गया था। मोहल्लेवासियों के अनुसार नायब तहसीलदार की आड़ में युवती के परिजन आए दिन विवाद करते रहे।
नायब की संपत्ति की हो सकती है जांच
नायब तहसीलदार आशीष गुप्ता के पिता राजा बेटा मामूली व्यवसाय करते रहे। बेटे के नौकरी में आने के बाद कुछ ही वर्षों करोड़ों की संपत्ति परिवार के पास हो गई। ऐसे में संपत्ति की जांच हो सकती है। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि फिलहाल ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। शासन के निर्देश पर संपत्ति की जांच कराई जा सकती है।