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दिल को छू लेने वाली कविताओं के लेखक और गीतकार गोपाल दास नीरज का लंबी बीमारी के बाद निधन
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 20 Jul 2018 11:11 AM IST
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गोपाल दास नीरज का दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में निधन
लिखे जो खत तुझे..., ये भाई जरा देख के चलो..., मेघा छाए आधी रात.. जैसे सदाबहार नगमों के रचयिता यूपी के लाल गोपाल दास नीरज का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वो 93 वर्ष के थे और काफी समय से बीमार थे।
साहित्यकार, शिक्षक व दिल को छू लेने वाली कविताओं के लेखक, यूपी के इटावा निवासी गोपालदास नीरज ने हिंदी साहित्य को एक नई जान दी। नीरज जी जब मंच से अपनी कविताएं सुनाते थे तो उनकी नशीली कविताएं और लरजती आवाज श्रोताओं को अपना दीवाना बना देती थी। अब के सावन में शरारत ये मेेरे साथ हुई, मेरा घर छोड़ कर सारे शहर में बरसात हुई... सुनकर तो श्रोता सावन की तरह झूम उठते थे।
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साहित्यकार, शिक्षक व दिल को छू लेने वाली कविताओं के लेखक, यूपी के इटावा निवासी गोपालदास नीरज ने हिंदी साहित्य को एक नई जान दी। नीरज जी जब मंच से अपनी कविताएं सुनाते थे तो उनकी नशीली कविताएं और लरजती आवाज श्रोताओं को अपना दीवाना बना देती थी। अब के सावन में शरारत ये मेेरे साथ हुई, मेरा घर छोड़ कर सारे शहर में बरसात हुई... सुनकर तो श्रोता सावन की तरह झूम उठते थे।
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नीरज जी को 1970 के दशक में लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया
गोपाल दास नीरज ने दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में ली अंतिम सांस
फिल्म जगत में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए नीरज जी को 1970 के दशक में लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।
- 1970 में काल का पहिया घूमे रे भइया, फिल्म- चंदा और बिजली
- 1971 में बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं, फिल्म- पहचान
- 1972 में ये भाई जरा देख के चलो, फिल्म- मेरा नाम जोकर
- 1991 में भारत सरकार से पद्म श्री
- 1994 में यश भारती
- 2007 में भारत सरकार से पद्म भूषण सम्मान
- 1970 में काल का पहिया घूमे रे भइया, फिल्म- चंदा और बिजली
- 1971 में बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं, फिल्म- पहचान
- 1972 में ये भाई जरा देख के चलो, फिल्म- मेरा नाम जोकर
- 1991 में भारत सरकार से पद्म श्री
- 1994 में यश भारती
- 2007 में भारत सरकार से पद्म भूषण सम्मान