{"_id":"6ab6cd53e0e16f98ad0ef7a0","slug":"pitru-paksha-begins-today-tarpan-for-ancestors-will-be-performed-through-pind-daan-kanpur-news-c-220-1-ka21001-149521-2026-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: पितृपक्ष आज से, पिंडदान कर किया जाएगा पितरों का तर्पण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: पितृपक्ष आज से, पिंडदान कर किया जाएगा पितरों का तर्पण
Sat, 26 Sep 2026 01:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 26 Sep 2026 01:06 AM IST
विज्ञापन
कानपुर देहात। पितरों के श्राद्ध और पिंडदान का पर्व पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। पितृपक्ष में श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृदोष का निवारण होता है। चार अक्तूबर को मातृनवमी और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष समाप्त होगा।
आचार्य प्रियंक दीक्षित ने बताया कि वैदिक दर्शन में आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक की तिथियों को पितृ शांति और श्राद्ध दानादि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। पितृपक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितृदोष का निवारण होता है। श्राद्ध के माध्यम से जो भी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं वह मूल रूप में नारायण को ही प्राप्त होता है। कहा कि श्राद्ध के लिए श्रद्धा का होना अति आवश्यक है, अर्थात बिना श्रद्धा के किया गया श्राद्ध निष्फल होता है। शास्त्रों के अनुसार साल में कुल 96 दिन ऐसे अवसर प्राप्त होते हैं जिनमें श्राद्ध किए जाते हैं। उन सब अवसरों में पितृपक्ष सर्वोत्तम तिथि मानी गई है।
पितृ पक्ष में अवश्य करें ये कार्य: रूरा निवासी ज्योतिषाचार्य महेश तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष में पशु पक्षियों को भोजन कराना और पितरों के निमित्त नित्य दोनियां रखना चाहिए।
विज्ञापन
पितृ दोष निवारण यंत्र की गंध पुष्प अक्षत से नित्य पूजा करें। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत, एक प्रहर तक मधु, डेढ़ प्रहर तक दुग्ध, साढ़े तीन प्रहर तक जल रूप में पितरों को प्राप्त होता है। अंजलि में कुश के साथ तिल मिश्रित जल को अंगूठे की ओर से पृथ्वी पर छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है।
विज्ञापन
आचार्य प्रियंक दीक्षित ने बताया कि वैदिक दर्शन में आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक की तिथियों को पितृ शांति और श्राद्ध दानादि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। पितृपक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितृदोष का निवारण होता है। श्राद्ध के माध्यम से जो भी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं वह मूल रूप में नारायण को ही प्राप्त होता है। कहा कि श्राद्ध के लिए श्रद्धा का होना अति आवश्यक है, अर्थात बिना श्रद्धा के किया गया श्राद्ध निष्फल होता है। शास्त्रों के अनुसार साल में कुल 96 दिन ऐसे अवसर प्राप्त होते हैं जिनमें श्राद्ध किए जाते हैं। उन सब अवसरों में पितृपक्ष सर्वोत्तम तिथि मानी गई है।
विज्ञापन
पितृ पक्ष में अवश्य करें ये कार्य: रूरा निवासी ज्योतिषाचार्य महेश तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष में पशु पक्षियों को भोजन कराना और पितरों के निमित्त नित्य दोनियां रखना चाहिए।
विज्ञापन
पितृ दोष निवारण यंत्र की गंध पुष्प अक्षत से नित्य पूजा करें। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत, एक प्रहर तक मधु, डेढ़ प्रहर तक दुग्ध, साढ़े तीन प्रहर तक जल रूप में पितरों को प्राप्त होता है। अंजलि में कुश के साथ तिल मिश्रित जल को अंगूठे की ओर से पृथ्वी पर छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है।