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Pitru Paksha: 26 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत, ऐसे करें पितरों को प्रसन्न, ये भी जानें
Tue, 22 Sep 2026 05:42 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 22 Sep 2026 05:42 PM IST
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पितृ पक्ष
- फोटो : अमर उजाला
पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और तर्पण-पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण पितृ पक्ष इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू होगा। पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होकर यह 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ संपन्न होगा। सनातन धर्म में इस अवधि को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए विशेष माना गया है।
ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के दौरान पितृ पक्ष मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पितरों को जल अर्पित करने, तर्पण, पिंडदान और उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है। पितृपक्ष का ज्योतिष से गहरा और वैज्ञानिक संबंध है। यह खगोलीय घटना है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य और चंद्रमा एक विशेष कोणीय स्थिति में आते हैं, तब पृथ्वी और पितृलोक के बीच की दूरी न्यूनतम हो जाती है।
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ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के दौरान पितृ पक्ष मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पितरों को जल अर्पित करने, तर्पण, पिंडदान और उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है। पितृपक्ष का ज्योतिष से गहरा और वैज्ञानिक संबंध है। यह खगोलीय घटना है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य और चंद्रमा एक विशेष कोणीय स्थिति में आते हैं, तब पृथ्वी और पितृलोक के बीच की दूरी न्यूनतम हो जाती है।
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ज्योतिष के मुताबिक शनि का संबंध हमारे पूर्व जन्म के कर्मों और हमारे पितरों की स्थिति से होता है। राहु का संबंध हमारे दायित्व और ऋणों से होता है। केतु का संबंध पितरों और उनके मुक्ति मोक्ष से होता है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक श्राद्ध के दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं। पितरों से प्रार्थना करने से निश्चित रूप से सौभाग्य और शुभता प्राप्त होती है।
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इस क्रम में होंगी श्राद्ध तिथियां
26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 को प्रतिपदा, 28 को द्वितीया, 29 को तृतीया, 30 को चतुर्थी और एक अक्तूबर को पंचमी/षष्ठी श्राद्ध होगा। इसके बाद दो को सप्तमी, तीन को अष्टमी, चार को नवमी, पांच को दशमी, छह को एकादशी, सात को द्वादशी, आठ को त्रयोदशी और नौ अक्तूबर को चतुर्दशी श्राद्ध होगा। 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।
26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 को प्रतिपदा, 28 को द्वितीया, 29 को तृतीया, 30 को चतुर्थी और एक अक्तूबर को पंचमी/षष्ठी श्राद्ध होगा। इसके बाद दो को सप्तमी, तीन को अष्टमी, चार को नवमी, पांच को दशमी, छह को एकादशी, सात को द्वादशी, आठ को त्रयोदशी और नौ अक्तूबर को चतुर्दशी श्राद्ध होगा। 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।