Pitru Paksha: श्राद्ध पक्ष में पितृ धरती पर आकर परिवार को देते हैं आशीर्वाद, उन्हें ऐसे करें प्रसन्न
श्राद्ध पक्ष में पितृ धरती पर आकर अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में उन्हें प्रसन्न करने के लिए 15 दिन तक तर्पण, पिंडदान करना चाहिए। मगर इस बार श्राद्ध 16 दिन के हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
श्राद्ध की शुरुआत शनिवार से हो गई। पहले दिन पूर्णिमा व प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया गया। लोगों ने सुबह उठकर गंगा स्नान कर जल तर्पण किया। पितरों के लिए बनाया गया भोजन अग्नि को समर्पित कर पंचबली भोग लगाया। इसके बाद गाय, कुत्ता, कौआ, चीटी, देवता को भोग लगाने के बाद ब्राह्मणों व मानदान को भोजन कराया।
मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पितृ धरती पर आकर अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में उन्हें प्रसन्न करने के लिए 15 दिन तक तर्पण, पिंडदान करना चाहिए। मगर इस बार श्राद्ध 16 दिन के हैं। तर्पण और श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त उत्तम माना जाता है। कुतुप काल दिन का आठवां मुहूर्त होता है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में पूजा करने से पितृ जल्दी प्रसन्न होते हैं।
इस तरह करें श्राद्ध
- पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंस के अध्यक्ष केए दुबे पद्मेश के अनुसार 10 से 25 सितंबर के बीच तर्पण का विधान है। इस बीच श्राद्ध कर माता-पिता के ऋण से मुक्त हो सकते हैं। इस दौरान एक बर्तन में जल, तिल, जौ, कुश व फूल लेकर तर्पण करना चाहिए।
- धूनी ध्यान केंद्र के प्रमुख आचार्य अमरेश मिश्र ने बताया कि तर्पण चार तरीके से किया जाता है। ब्रह्मा, विष्णु व महेश के लिए, देवताओं के लिए, ऋषियों और पितरों के लिए। पिंड दान आटे से या फिर पके हुए चावल से किया जाता है।
- पंडित मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि पितरों की जिस तिथि में मृत्यु हुई हो, उसी तिथि को श्राद्ध करना चाहिए। तिथि ज्ञात न होने पर अश्विन अमावस्या का दिन श्राद्ध कर्म के लिए श्रेष्ठ होता है क्योंकि इस दिन सर्व पितृ श्राद्ध योग माना जाता है।
- पंडित गौरव तिवारी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में कोई नया कार्य, नई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए। यह पितरों को याद करके शोक मनाने का समय होता है। ऐसा करने से आपका ध्यान पितरों से हट जाता है।