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पिंटू सेंगर हत्याकांड: वीरेंद्र व आमिर की जमानत अर्जी खारिज, जेल से रिहाई की उम्मीद टली

Fri, 04 Dec 2020 01:15 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 04 Dec 2020 01:15 PM IST
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Pintu Sengar murder case: Virender and Aamir's bail application rejected, hope of release from jail postponed
पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : amar ujala
विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट डॉ. कपिला राघव ने वीरेंद्र की दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है। वहीं मुख्य आरोपी मो. आसिम उर्फ पप्पू स्मार्ट के भाई मो. आमिर उर्फ बिच्छू की जमानत अर्जी भी खारिज हो गई है। अभियोजन ने तर्क रखा कि वीरेंद्र ने साथियों संग मिलकर पिंटू व उसके भाई की हत्या का षड्यंत्र रचा।
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पिंटू की हत्या की सुपारी दी। जिस पर सह अभियुक्तों ने पिंटू की हत्या कर दी। घटना के चश्मदीद पिंटू के भाई व रूपेश प्रजापति ने भी बयानों में वीरेंद्र के अपराध में शामिल होने की बात कही। वीरेंद्र ने जमीन खरीद-फरोख्त, रुपये के लेनेदेन व मुकदमे की रंजिश में पिंटू की हत्या करवाई है।
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वहीं वीरेंद्र के अधिवक्ता पीयूष शुक्ला ने रंजिशन फंसाए जाने की बात कहते हुए हाईकोर्ट के स्टे का हवाला दिया लेकिन कोर्ट ने वीरेंद्र का अपराध गंभीर माना। पिंटू की ओर से अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे ने तर्क रखा कि मो. आसिम, मो. आमिर तथा तौफीक तीनों भाई हैं।

सीडीआर से खुलासा हुआ है कि मुख्य साजिशकर्ता साफेज सैफी उर्फ हैदर से आमिर की लगातार बातचीत होती रही। हत्या के बाद तीनों मध्यप्रदेश स्थित छिंदवाड़ा भाग गए। साल 2019 में ही वहां किराये का कमरा ले लिया था। काफी समय से पिंटू की हत्या की साजिश रची जा रही थी। आमिर के भाई आसिम पर हत्या के प्रयास का मुकदमा चल रहा थ, जिसमें पिंटू गवाह था। इसलिए षड्यंत्र रच हत्या की गई। 

सीएमएस ने लिया था अपराध का संज्ञान
मामले में विवेचक ने पहले वीरेंद्र पाल व मनोज गुप्ता के पक्ष में अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी थी लेकिन सीएमएम ने रिपोर्ट को निरस्त कर दोनों के खिलाफ अपराध का संज्ञान लिया था। फैसले के खिलाफ वीरेंद्र ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर सीएमएम के आदेश के साथ ही वीरेंद्र के मुकदमे की सुनवाई पर भी रोक लगा दी गई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अधिवक्ता पीयूष शुक्ला ने वीरेंद्र के पक्ष में आई अंतिम रिपोर्ट को ही प्रभावी बताकर पहली जमानत अर्जी वापस ले ली थी और नए आधार पर दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की थी
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