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जब ‘बिलबिला’ उठे मरीज

Tue, 20 Sep 2016 11:35 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 20 Sep 2016 11:35 PM IST
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Pharmacists' strike upset the patient
अस्पताल में लगी मरीजों की कतारें - फोटो : अमर उजाला
कानपुर शहर में फैले डेंगू और बुखार के प्रकोप के बीच फार्मासिस्टों की हड़ताल से मंगलवार को हजारों की संख्या में मरीज और तीमारदार परेशान रहे। हैलट, उर्सला समेत अन्य सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आए मरीजों को एक-एक गोली के लिए तरसना पड़ा। उधर केपीएम में पर्चा काउंटर और एक्सरे तक बंद रहा। हालांकि हड़ताल से अस्पतालों की इमरजेंसी और वार्डों में भर्ती मरीजों की सेवाओं में कोई अड़चन नहीं आई। उन्हें समय-समय पर दवाएं मिलती रहीं।
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डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को हैलट, उर्सला,  केपीएम, कांशीराम हास्पिटल से लेकर सीएचसी, पीएचसी के फार्मासिस्ट हड़ताल पर रहे। इसके चलते सरकारी अस्पतालों के मेडिसिन कक्षों में ताले लटके रहे। ओपीडी के मरीजों को दवाएं नहीं मिलीं। मेडिकल स्टोरों से लोगों को दवाएं खरीदने पड़ी। उधर एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीप सिंह सचान के नेतृत्व में सीएमओ दफ्तर में बैठक के बाद फार्मासिस्टों ने प्रदर्शन किया। संचालन मंत्री राजेंद्र कुमार ने किया।
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फार्मेसिस्ट चाभियां लेकर चले गए
सीएमओ डॉ. आरपी यादव ने कहा कि फार्मासिस्टों  की प्रदेशव्यापी हड़ताल के मद्देनजर  इमरजेंसी, इंडोर वार्डों में दवाओं की पहले से ही व्यवस्था करा दी गई थी। ओपीडी में भी नर्सों से दवाएं बटवाने की तैयारी थी, पर फार्मेसिस्ट चाभियां लेकर चले गए थे। इस वजह से वहां दवाएं नहीं मिल पाईं। पोस्टमार्टम पूर्ववत होते रहे। 21 सितंबर को यदि हड़ताल जारी रही तो ओपीडी में दवा वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी। एंटी रैबिज इंजेक्शन भी लगेंगे।
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दवायें नहीं मिलीं
मंधना निवासी प्रियंका ने कहा कि मैं तीन किलोमीटर पैदल चलकर अपनी जेठानी सरोज के साथ दांतों के डॉक्टर को दिखाने उर्सला आई थी। यहां दवा नहीं मिली तो केपीएम गई। वहां भी दवा स्टोर में ताला लटका था।
पीरोड की सुलेखा ने कहा कि मैं अपनी और पति की घुटने के दर्द की दवाएं लेने उर्सला आई थी। डॉक्टरों ने देखा, पर दवाएं नहीं मिलीं। बाजार से दवाएं लेने में सक्षम नहीं हूं। हड़ताल खत्म होने का इंतजार करूंगी।

नयागंज की शकुंतला कश्यप ने बताया कि बदन दर्द, बुखार से परेशान होकर उर्सला में इलाज कराने आई। डॉक्टर ने देखकर दवाएं लिखीं पर दवाएं नहीं मिलीं।
बर्रा दो के राम आसरे ने कहा कि हैलट में आंखों के डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने दवाएं लिखीं, पर दवा स्टोर में आए तो वहां ताला लगा था
कुत्ते काटने के इंजेक्शन भी नहीं लगे
उर्सला सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन (कुत्तों आदि के काटने पर लगने वाले इंजेक्शन) नहीं लगे। लगभग 500 मरीज निराश लौटे। इंजेक्शन लगने की चैन भी टूटी। उधर, सीएमओ ने 21 सितंबर से व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया। केपीएम में एक्सरे टेक्नीशियनों के भी आंदोलन में शामिल होने से मरीजो के एक्सरे नहीं हुए।
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