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अफसरों की लापरवाही, 100 करोड़ गंवाए
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 14 Apr 2015 02:45 AM IST
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जनपद के एक लाख से अधिक समाजवादी पेंशन और छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली 100 करोड़ की स्वीकृत राशि विभागीय लापरवाही के चलते लैप्स हो गई। योजना का पैसा दोबारा खातों में कब पहुंचेगा इस बारे में विभागीय अधिकारी भी अंजान हैं।
बकाया राशि खातों में न आने से लाभार्थियों के बैंक एकाउंट भी बंद होने की नौबत आ गई है। प्रदेश सरकार ने स्कालरशिप योजना के जरिए स्टूडेंट्स को और समाजवादी पेंशन योजना के जरिए अन्य तबकों के लोगों पर टारगेट किया है।
तय हुआ था कि 31 मार्च तक चयनित लाभार्थियों के खाते में ऑनलाइन सिस्टम के जरिए धनराशि पहुंच जाएगी, लेकिन लापरवाही के चलते यह संभव नहीं हो पाया। वित्तीय वर्ष 2014-15 समाप्त हो जाने के बाद बकाया राशि लैप्स हो गई। बताया जा रहा है कि सही तरीके से धन भेजने की व्यवस्था न होने के कारण यह स्थित पैदा हुई।
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यह भी तर्क दिया जा रहा है कि पहली बार ऑनलाइन सिस्टम के जरिए धनराशि भेजे जाने के तरीके को समझने में ही अधिकारियों को ज्यादा समय लग गया। कहा जा रहा है कि ऑनलाइन से पैसों की हेराफेरी पर लगाम लगने की वजह से भी अधिकारी इस नई व्यवस्था में पूरे मन से नहीं जुटे।
नगर निगम, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, निदेशालय और शासन स्तर पर कई चरणों में यह गलतियां की गई। जिसकी वजह से इतनी अधिक संख्या में लाभार्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
खातों में ऑनलाइन धनराशि जमा नहीं होने के पीछे पीएफएमएस सिस्टम (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) में होने वाली गड़बड़ी है। यह सिस्टम सेंट्रल गवर्नमेंट से संचालित होता है। एनआईसी के जरिए लाभार्थियों का पूरा विवरण इस सिस्टम में लोड किया जाता है।
उसके बाद यह राशि ट्रेजरी में जाती है, फिर समाज कल्याण निदेशालय उस पर अंतिम मुहर लगाता है। इसके बाद फिर से इसे उसी सिस्टम के जरिए धनराशि खाते में भेजी जाती है। सिस्टम में काफी लोगों का ब्योरा अपलोड नहीं हो पाया, इसी वजह से दिक्कत हुई है।
क्योंकि यह सब एक सिस्टम के तहत हो रहा था, इसलिए किसी एक की जिम्मेदारी नहीं कही जा सकती है। इतना जरूर है कि यह सब समय कम होने की वजह से जल्दबाजी में किया गया।
-पीके त्रिपाठी उप निदेशक समाज कल्याण विभाग
ऑनलाइन सिस्टम से धनराशि भेजने का पूरा काम शासन से होता है। इसलिए उनके यहां इसके विषय में ज्यादा डिटेल नहीं रहती है। जो भी लाभार्थी विभाग में आ रहे हैं, उन्हें बहुत कुछ बता पाना मुश्किल है। शासन से कहा गया है कि जिन लोगों की राशि नहीं मिली है, उन्हें बाद में भेजा जाएगा। इसकी कोई तारीख अभी तय नहीं है।
-अजीत प्रताप सिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी
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बकाया राशि खातों में न आने से लाभार्थियों के बैंक एकाउंट भी बंद होने की नौबत आ गई है। प्रदेश सरकार ने स्कालरशिप योजना के जरिए स्टूडेंट्स को और समाजवादी पेंशन योजना के जरिए अन्य तबकों के लोगों पर टारगेट किया है।
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तय हुआ था कि 31 मार्च तक चयनित लाभार्थियों के खाते में ऑनलाइन सिस्टम के जरिए धनराशि पहुंच जाएगी, लेकिन लापरवाही के चलते यह संभव नहीं हो पाया। वित्तीय वर्ष 2014-15 समाप्त हो जाने के बाद बकाया राशि लैप्स हो गई। बताया जा रहा है कि सही तरीके से धन भेजने की व्यवस्था न होने के कारण यह स्थित पैदा हुई।
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यह भी तर्क दिया जा रहा है कि पहली बार ऑनलाइन सिस्टम के जरिए धनराशि भेजे जाने के तरीके को समझने में ही अधिकारियों को ज्यादा समय लग गया। कहा जा रहा है कि ऑनलाइन से पैसों की हेराफेरी पर लगाम लगने की वजह से भी अधिकारी इस नई व्यवस्था में पूरे मन से नहीं जुटे।
नगर निगम, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, निदेशालय और शासन स्तर पर कई चरणों में यह गलतियां की गई। जिसकी वजह से इतनी अधिक संख्या में लाभार्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
खातों में ऑनलाइन धनराशि जमा नहीं होने के पीछे पीएफएमएस सिस्टम (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) में होने वाली गड़बड़ी है। यह सिस्टम सेंट्रल गवर्नमेंट से संचालित होता है। एनआईसी के जरिए लाभार्थियों का पूरा विवरण इस सिस्टम में लोड किया जाता है।
उसके बाद यह राशि ट्रेजरी में जाती है, फिर समाज कल्याण निदेशालय उस पर अंतिम मुहर लगाता है। इसके बाद फिर से इसे उसी सिस्टम के जरिए धनराशि खाते में भेजी जाती है। सिस्टम में काफी लोगों का ब्योरा अपलोड नहीं हो पाया, इसी वजह से दिक्कत हुई है।
क्योंकि यह सब एक सिस्टम के तहत हो रहा था, इसलिए किसी एक की जिम्मेदारी नहीं कही जा सकती है। इतना जरूर है कि यह सब समय कम होने की वजह से जल्दबाजी में किया गया।
-पीके त्रिपाठी उप निदेशक समाज कल्याण विभाग
ऑनलाइन सिस्टम से धनराशि भेजने का पूरा काम शासन से होता है। इसलिए उनके यहां इसके विषय में ज्यादा डिटेल नहीं रहती है। जो भी लाभार्थी विभाग में आ रहे हैं, उन्हें बहुत कुछ बता पाना मुश्किल है। शासन से कहा गया है कि जिन लोगों की राशि नहीं मिली है, उन्हें बाद में भेजा जाएगा। इसकी कोई तारीख अभी तय नहीं है।
-अजीत प्रताप सिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी