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परेड में मल्टीस्टोरी पार्किंग का रास्ता साफ
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Tue, 12 Jan 2016 01:40 AM IST
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परेड मुर्गा मार्केट खाली कराने के विरोध में दायर याचिका हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दी। इससे वहां मल्टीस्टोरी पार्किंग और कामर्शियल कांप्लेक्स निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल नवीन मार्केट के सुंदरीकरण और परेड मुर्गा मार्केट स्थल पर मल्टीस्टोरी पार्किंग व कामर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण होना है।
मुर्गा मार्केट खाली न होने की वजह से मल्टीस्टोरी पार्किंग एवं कामर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। दुकानदार हाईकोर्ट चले गए। दुकानदारों की तरफ से अब्दुल माबूद की ओर से दावा किया गया कि उक्त जमीन वक्फ की संपत्ति है।
दुकानदारों को न हटाया जाए, यदि हटाएं तो वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं। केडीए के संयुक्त सचिव प्रदीप सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। दूसरी ओर इस जमीन पर वक्फ बोर्ड की आपत्ति पर भी डीएम की ओर से जवाब भेज दिया गया है।
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छह जनवरी को सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजे गए जवाब में कहा गया है कि मुर्गा मार्केट की जमीन नजूल की संपत्ति है। वक्फ से संबंधित कोई रिकार्ड नहीं है। उक्त प्लाट 25 जुलाई 1911 से सप्लाई एसोसिएशन लिमिटेड कानपुर के नाम से 30-30 वर्ष में नवीनीकरण की शर्त के साथ 90 वर्षों के लिए पट्टे पर था।
संपत्ति रजिस्टर में पट्टे के नवीनीकरण की प्रविष्टि नहीं है। प्लाट की लीज डीड पांच जनवरी को निरस्त कर दी गई। अब इसका स्वामित्व राज्य सरकार का है। नजूल संपत्ति रजिस्टर में यह अनावंटित सरकारी जमीन है।
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मुर्गा मार्केट खाली न होने की वजह से मल्टीस्टोरी पार्किंग एवं कामर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। दुकानदार हाईकोर्ट चले गए। दुकानदारों की तरफ से अब्दुल माबूद की ओर से दावा किया गया कि उक्त जमीन वक्फ की संपत्ति है।
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दुकानदारों को न हटाया जाए, यदि हटाएं तो वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं। केडीए के संयुक्त सचिव प्रदीप सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। दूसरी ओर इस जमीन पर वक्फ बोर्ड की आपत्ति पर भी डीएम की ओर से जवाब भेज दिया गया है।
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छह जनवरी को सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजे गए जवाब में कहा गया है कि मुर्गा मार्केट की जमीन नजूल की संपत्ति है। वक्फ से संबंधित कोई रिकार्ड नहीं है। उक्त प्लाट 25 जुलाई 1911 से सप्लाई एसोसिएशन लिमिटेड कानपुर के नाम से 30-30 वर्ष में नवीनीकरण की शर्त के साथ 90 वर्षों के लिए पट्टे पर था।
संपत्ति रजिस्टर में पट्टे के नवीनीकरण की प्रविष्टि नहीं है। प्लाट की लीज डीड पांच जनवरी को निरस्त कर दी गई। अब इसका स्वामित्व राज्य सरकार का है। नजूल संपत्ति रजिस्टर में यह अनावंटित सरकारी जमीन है।