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Kanpur News: ओपीडी से लेकर जांच कराने तक में परेशान हो रहे मरीज
Fri, 10 Jan 2025 12:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 10 Jan 2025 12:28 AM IST
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कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज के नए भवन में ओपीडी संचालित होने के बाद कुछ दुश्वारियां देखने को मिल रही हैं। जांच और एक्सरे के लिए मरीजों को अभी भी जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है। कॉलेज से जिला अस्पताल तक आने व जाने में 500 मीटर तक पैदल चलने से मरीज परेशान हैं। इसके अलावा अलग-अलग मंजिलों में ओपीडी शिफ्ट होने से मरीज भटक रहे हैं।
एक जनवरी से कॉलेज के नए भवन में ओपीडी संचालित हो रही है। भूतल में पर्चा काउंटर बना है। पहली मंजिल में ईनएटी, आई, मेडिसिन, ऑर्थो, डेंटल, जनरल सर्जरी, एनसीडी क्लीनिक की ओपीडी और दूसरी मंजिल में मनोचिकित्सक और बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी चल रही है। काउंटर पर पर्चा बनवाने के बाद मरीज रैंप के रास्ते पहली मंजिल पहुंचने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाने के लिए से भटकना पड़ता है। कहने को मरीजों को बताने के लिए सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगी है, लेकिन वह भी इधर-उधर घूमते दिखते हैं।
इस वजह से मरीज एक बार ठीक स्थान पर नहीं पहुंच पाता है। किसी तरह मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है तो उसे जांच और एक्सरे के लिए परेशान होना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी मरीज को रैंप के सहारे चढ़ने उतरने में हो रही है। उन्हें डॉक्टर को दिखाने के बाद जांच के लिए जिला अस्पताल की पहली मंजिल में चल रही लैब तक जाना पड़ता है। रिपोर्ट मिलने के बाद दोबारा मरीज मेडिकल कॉलेज दिखाने जाता है।
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डॉक्टर के पास जाने से लेकर जांच कराने तक में मरीज को कम से कम 500 मीटर का चक्कर काटना पड़ जाता है। ऐसे में श्वास रोगियों, घुटने और कमर में दर्द, दिव्यांगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। अफसरिया गांव की कदिनम (64) को चलने में दिक्कत हो रही थी। गुरुवार को बेटे व दो अन्य रिश्तेदारों के साथ कॉलेज पहुंची। वहां बेटे ने पर्चा बनवाया। इसके बाद कंधे के सहारे उन्हें रैंप से ओपीडी तक ले गए। डॉक्टर ने उन्हें जांच कराने की सलाह दी तो फिर दोबारा वह रैंप से ही नीचे उतर कर जिला अस्पताल की पहली मंजिल में जांच कराने पहुंचे थे। इसी तरह अकबरपुर निवासी रामकुमार (55) की श्वांस फुल रही थी। डॉक्टर ने जांच कराने की सलाह तो वह जिला अस्पताल पहुंचे थे। इसी तरह कई मरीजों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़।
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लिफ्ट चल रही, लेकिन मरीजों को नहीं दी जा रही जानकारी
मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को लिफ्ट चलती मिली, लेकिन ओपीडी में पर्चा बनवाने वाले मरीजों को लिफ्ट से जाने की जानकारी कोई नहीं दे रहा था। ऐसे में मरीजों को लिफ्ट की जानकारी नहीं और वह रैंप से ही ओपीडी तक पहुंच रहे हैं।
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वर्जन.....
कॉलेज में लिफ्ट चल रही है। भूतल में हेल्प डेस्क, इसलिए बनाई है कि मरीजों को भी दिक्कत हो तो वह वहां बात कर सकते हैं। मानव बल आने के बाद सारी जांच कॉलेज भवन में ही होंगी। इसमें 20 दिन से ज्यादा का समय लग सकता है। - डॉ. सज्जनलाल वर्मा, प्राचार्य
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एक जनवरी से कॉलेज के नए भवन में ओपीडी संचालित हो रही है। भूतल में पर्चा काउंटर बना है। पहली मंजिल में ईनएटी, आई, मेडिसिन, ऑर्थो, डेंटल, जनरल सर्जरी, एनसीडी क्लीनिक की ओपीडी और दूसरी मंजिल में मनोचिकित्सक और बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी चल रही है। काउंटर पर पर्चा बनवाने के बाद मरीज रैंप के रास्ते पहली मंजिल पहुंचने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाने के लिए से भटकना पड़ता है। कहने को मरीजों को बताने के लिए सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगी है, लेकिन वह भी इधर-उधर घूमते दिखते हैं।
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इस वजह से मरीज एक बार ठीक स्थान पर नहीं पहुंच पाता है। किसी तरह मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है तो उसे जांच और एक्सरे के लिए परेशान होना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी मरीज को रैंप के सहारे चढ़ने उतरने में हो रही है। उन्हें डॉक्टर को दिखाने के बाद जांच के लिए जिला अस्पताल की पहली मंजिल में चल रही लैब तक जाना पड़ता है। रिपोर्ट मिलने के बाद दोबारा मरीज मेडिकल कॉलेज दिखाने जाता है।
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डॉक्टर के पास जाने से लेकर जांच कराने तक में मरीज को कम से कम 500 मीटर का चक्कर काटना पड़ जाता है। ऐसे में श्वास रोगियों, घुटने और कमर में दर्द, दिव्यांगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। अफसरिया गांव की कदिनम (64) को चलने में दिक्कत हो रही थी। गुरुवार को बेटे व दो अन्य रिश्तेदारों के साथ कॉलेज पहुंची। वहां बेटे ने पर्चा बनवाया। इसके बाद कंधे के सहारे उन्हें रैंप से ओपीडी तक ले गए। डॉक्टर ने उन्हें जांच कराने की सलाह दी तो फिर दोबारा वह रैंप से ही नीचे उतर कर जिला अस्पताल की पहली मंजिल में जांच कराने पहुंचे थे। इसी तरह अकबरपुर निवासी रामकुमार (55) की श्वांस फुल रही थी। डॉक्टर ने जांच कराने की सलाह तो वह जिला अस्पताल पहुंचे थे। इसी तरह कई मरीजों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़।
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लिफ्ट चल रही, लेकिन मरीजों को नहीं दी जा रही जानकारी
मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को लिफ्ट चलती मिली, लेकिन ओपीडी में पर्चा बनवाने वाले मरीजों को लिफ्ट से जाने की जानकारी कोई नहीं दे रहा था। ऐसे में मरीजों को लिफ्ट की जानकारी नहीं और वह रैंप से ही ओपीडी तक पहुंच रहे हैं।
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कॉलेज में लिफ्ट चल रही है। भूतल में हेल्प डेस्क, इसलिए बनाई है कि मरीजों को भी दिक्कत हो तो वह वहां बात कर सकते हैं। मानव बल आने के बाद सारी जांच कॉलेज भवन में ही होंगी। इसमें 20 दिन से ज्यादा का समय लग सकता है। - डॉ. सज्जनलाल वर्मा, प्राचार्य