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परमट मंदिर गद्दी विवाद: श्याम गिरी के खुद को महंत घोषित करने के बाद जूना अखाड़ा ने किया विरोध
Tue, 06 Jul 2021 10:18 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 06 Jul 2021 10:18 AM IST
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परमट मंदिर में लगी भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में पनकी मंदिर, बिठूर के शिवधाम आश्रम, काली मठिया मंदिर के बाद अब परमट मंदिर में महंत की गद्दी को लेकर विवाद गहरा गया है। दो दिन पूर्व ही श्याम गिरी महाराज ने खुद को महंत घोषित किया था। सोमवार को जूना अखाड़े के लोगों ने विरोध कर दिया। मामले को देखते हुए मंदिर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
दोपहर में मंदिर परिसर में श्याम गिरी महाराज, जूना अखाड़े के सदस्यों व डीसीपी पश्चिम संजीव त्यागी ने बैठक की। मंदिर में महंत की गद्दी को लेकर रामदास व श्याम गिरी के बीच 2011 से विवाद चला आ रहा था। कोर्ट में मुकदमा भी हुआ था। इस पर जूना अखाड़े ने हस्तक्षेप करते हुए प्रयागराज के रमेश पुरी को महंत बनाया था।
पिछले वर्ष उनकी मौत हो गई, तब से जूना अखाड़ा की ओर से देखरेख की जा रही थी। उधर, दोनों पक्षों ने कुछ दिन पहले कोर्ट के समक्ष समझौता कर लिया। शनिवार को श्याम गिरी महाराज ने खुद को महंत घोषित कर दिया। इसके बाद फिर से विवाद पैदा हो गया। इसी को लेकर सोमवार को बैठक हुई।
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इसमें कहा गया कि जब तक जूना अखाड़े के अध्यक्ष सभापति प्रेम गिरी महाराज द्वारा महंत नहीं घोषित किया जाता है, तब तक कोई भी महंत नहीं कहलाता है। मंदिर परिसर में घंटों चली बैठक के बाद भी कोई हल नहीं निकला। इस पर डीसीपी पश्चिम ने दोनों पक्षों को दो दिन का समय देते हुए यथा स्थिति बनाए रखने के लिए कहा है। बैठक में जूना अखाड़े के पूर्व सभापति उमा शंकर भारती, महामंत्री मोहन भारती, बाल योगी अरुण चैतन्यपुरी महाराज, इच्छा गिरी महाराज, अरुण भारती आदि लोग मौजूद रहे।
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दोपहर में मंदिर परिसर में श्याम गिरी महाराज, जूना अखाड़े के सदस्यों व डीसीपी पश्चिम संजीव त्यागी ने बैठक की। मंदिर में महंत की गद्दी को लेकर रामदास व श्याम गिरी के बीच 2011 से विवाद चला आ रहा था। कोर्ट में मुकदमा भी हुआ था। इस पर जूना अखाड़े ने हस्तक्षेप करते हुए प्रयागराज के रमेश पुरी को महंत बनाया था।
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पिछले वर्ष उनकी मौत हो गई, तब से जूना अखाड़ा की ओर से देखरेख की जा रही थी। उधर, दोनों पक्षों ने कुछ दिन पहले कोर्ट के समक्ष समझौता कर लिया। शनिवार को श्याम गिरी महाराज ने खुद को महंत घोषित कर दिया। इसके बाद फिर से विवाद पैदा हो गया। इसी को लेकर सोमवार को बैठक हुई।
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इसमें कहा गया कि जब तक जूना अखाड़े के अध्यक्ष सभापति प्रेम गिरी महाराज द्वारा महंत नहीं घोषित किया जाता है, तब तक कोई भी महंत नहीं कहलाता है। मंदिर परिसर में घंटों चली बैठक के बाद भी कोई हल नहीं निकला। इस पर डीसीपी पश्चिम ने दोनों पक्षों को दो दिन का समय देते हुए यथा स्थिति बनाए रखने के लिए कहा है। बैठक में जूना अखाड़े के पूर्व सभापति उमा शंकर भारती, महामंत्री मोहन भारती, बाल योगी अरुण चैतन्यपुरी महाराज, इच्छा गिरी महाराज, अरुण भारती आदि लोग मौजूद रहे।