कागजी पौधरोपण: हर साल लाखों पौधे लगाए, जमीन से हो गए गायब, विभागों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
आज पर्यावरण दिवस है और फिर से संरक्षण का संकल्प लिया जाएगा। इस बार भी जिले में एक ही दिन में लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद जमीनीं स्तर पर एक भी पौधा नजर नहीं आएगा।
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आज विश्व पर्यावरण दिवस है। वन विभाग समेत अन्य विभाग के अधिकारी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेंगे और पौधों की देखभाल करना फिर से भूल जाएंगे। वन समेत अन्य विभागों द्वारा बीते दो सालों में लाखों पौधे लगाए गए, लेकिन इनकी देखरेख सिर्फ कागजों में रही। कई जगह पौध और ट्री गार्ड अस्तित्व में नहीं हैं। यह जमीनीं हकीकत औरैया जिले की है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल वन विभाग, नगर पालिका, नगर पंचायत समेत अन्य विभाग लाखों पौधे लगाते हैं। शासन से मिला लक्ष्य एक या दो दिन में कागजों में पूरा करने के बाद अधिकारी उनकी रखरखाव की जिम्मेदारी भूल जाते हैं।
इसी लापरवाही की वजह से सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, डिवाइडर और ग्रीन बेल्ट में लगे पौधे नजर नहीं आते हैं। जबकि कुछ पौधे या तो सूख गए हैं या हल्की सी आंधी आने पर उखड़ जाएंगे, ऐसा लगता है। हालांकि वन विभाग लगातार हरियाली बढ़ने का दावा कर रहा है।
विभाग के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2020 में वन विभाग को 12,77,500 पौधे व अन्य विभागों को 13,33,991 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। पिछले साल 2021 में वन विभाग को 14,58,001 व अन्य विभागों को 17,57,241 पौधे लगाने को मिला।
नगर पंचायत में वन विभाग ने 2200 पौधे पिछले वर्ष लगाने को दिए थे। इसके बाद नगर पंचायत बिधूना के बाबूराम महाविद्यालय के पास, एसडीएम आवास के सामने, चदंरपुर, सुरजपुर शौचालय के पास, नवीन बस्ती, श्मशान घाट, भूमि संख्या 2014 व किशनी रोड़ पर डिवाइडर नगर ,आंबेडकर पार्क समेत 10 जगहों पर अभियान चलाकर पौधरोपण किया गया था।
वर्तमान में बाबूराम महाविद्यालय के पास, सीओ आवास, नवीन बस्ती गोशाला के पास और डिवाइडर पर पौधे नहीं है। ईओ निषाद मधुरमय ने बताया कि पौधरोपण करने के बाद कुछ जगहों के पौधे सूख गए और कुछ आवारा जानवर आदि खा गए है। कुछ जगहों पर पौधे लगे हैं।