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पनकी मंदिर के बाहर ब्राह्मण भिक्षुक की मौत, लाश पर रेंग रहे थे कीड़े
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 13 Oct 2016 03:52 PM IST
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भिक्षुक की लाश से आ रही थी दुर्गंध
- फोटो : अमर उजाला
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पनकी स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के बाहर आखिरी सांसें गिन रहे एक ब्राह्मण भिक्षुक ने आखिरकार मंदिर की चौखट पर ही दम तोड़ दिया। मंदिर प्रबंधक और पुलिस चौकी को स्थानीय दुकानदारों ने भिक्षुक की हालत खराब होने की सूचना दी थी लेकिन अफसोस किसी ने भी मौके पर आकर उसे देखने की आवश्यकता नहीं समझी। लाश पर कीड़े पड़ चुके थे दुर्गंध भी आ रही थी।
पनकी निवासी विजय मिश्रा की उम्र करीब 58 वर्ष थी। वह भिक्षुक बनकर पनकी मंदिर के बाहर कई सालों से बैठ रहे थे। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाली दक्षिणा और भोजन से ही उनका गुजारा होता था। बुधवार की रात ही विजय की हालत खराब हो गई थी। वह गेट नंबर दो बाहर अपनी जिंदगी की अंतिम सांसें गिन रहे थे। इसकी सूचना क्षेत्रीय दुकानदारों ने मंदिर के पास बनी पुलिस चौकी और मंदिर प्रशासन को दी लेकिन पूरी रात कोई भी उसे देखने नहीं आया। आज सुबह दुकानदारों ने विजय को देखा गया तो वह मर चुके थे। विजय के शव से दुर्गंध आ रही थी और अंगों पर कीड़े रेंग रहे थे। ब्राह्मण भिक्षुक की इस कदर अवहेलना से मंदिर प्रशासन और क्षेत्रीय पुलिस की संवेदनहीनता खुलकर सामने आ गयी है।
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पनकी निवासी विजय मिश्रा की उम्र करीब 58 वर्ष थी। वह भिक्षुक बनकर पनकी मंदिर के बाहर कई सालों से बैठ रहे थे। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाली दक्षिणा और भोजन से ही उनका गुजारा होता था। बुधवार की रात ही विजय की हालत खराब हो गई थी। वह गेट नंबर दो बाहर अपनी जिंदगी की अंतिम सांसें गिन रहे थे। इसकी सूचना क्षेत्रीय दुकानदारों ने मंदिर के पास बनी पुलिस चौकी और मंदिर प्रशासन को दी लेकिन पूरी रात कोई भी उसे देखने नहीं आया। आज सुबह दुकानदारों ने विजय को देखा गया तो वह मर चुके थे। विजय के शव से दुर्गंध आ रही थी और अंगों पर कीड़े रेंग रहे थे। ब्राह्मण भिक्षुक की इस कदर अवहेलना से मंदिर प्रशासन और क्षेत्रीय पुलिस की संवेदनहीनता खुलकर सामने आ गयी है।
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