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पंचायत चुनाव : औरैया में 40 फीसदी सीटों पर बदल सकता है आरक्षण का गणित
Thu, 18 Mar 2021 10:10 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 18 Mar 2021 10:10 AM IST
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पंचायत चुनाव की सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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नए सिरे से आरक्षण तय किए जाने पर औरैया जिले में करीब 40 फीसदी ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्यों के पदों का आरक्षण बदलने की संभावना है। फिलहाल शासन के दिशानिर्देश का इंतजार है। जिले में तीन मार्च को ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए आरक्षण के लिए सूची जारी की गई थी।
आठ मार्च तक आपत्तियां मांगी गईं थीं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद 14 मार्च तक अंतिम सूची जारी की जानी थी लेकिन हाईकोर्ट ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी। अब 25 मार्च तक 2015 को आधार वर्ष मानते हुए आरक्षण तय करने की बात कही गई है।
दावेदारों की नजर अब नए सिरे से आरक्षण पर है। गांव में एक बार फिर सियासी पारा गरमाने लगा है। तीन मार्च को आरक्षण आवंटन की जो अंतिम सूची प्रकाशित की गई थी, उसमें आरक्षण वर्ष 1995 को माना गया था। आधार वर्ष माने जाने से आरक्षण की चक्रानुक्रम की व्यवस्था वहीं से शुरू मानी गई।
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उसी साल से जोड़ा गया कि कौन से गांवों में कभी ओबीसी सीट नहीं रही और कहां एससी सीट नहीं रही। पांच चुनावों में हर ब्लॉक में कम से कम गांव मिले जो कभी वर्ग विशेष के लिए आरक्षित नहीं थे। नए सिरे से आरक्षण में जिले में करीब 40 फीसदी सीटों में आरक्षण बदल जाएगा।
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आठ मार्च तक आपत्तियां मांगी गईं थीं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद 14 मार्च तक अंतिम सूची जारी की जानी थी लेकिन हाईकोर्ट ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी। अब 25 मार्च तक 2015 को आधार वर्ष मानते हुए आरक्षण तय करने की बात कही गई है।
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दावेदारों की नजर अब नए सिरे से आरक्षण पर है। गांव में एक बार फिर सियासी पारा गरमाने लगा है। तीन मार्च को आरक्षण आवंटन की जो अंतिम सूची प्रकाशित की गई थी, उसमें आरक्षण वर्ष 1995 को माना गया था। आधार वर्ष माने जाने से आरक्षण की चक्रानुक्रम की व्यवस्था वहीं से शुरू मानी गई।
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उसी साल से जोड़ा गया कि कौन से गांवों में कभी ओबीसी सीट नहीं रही और कहां एससी सीट नहीं रही। पांच चुनावों में हर ब्लॉक में कम से कम गांव मिले जो कभी वर्ग विशेष के लिए आरक्षित नहीं थे। नए सिरे से आरक्षण में जिले में करीब 40 फीसदी सीटों में आरक्षण बदल जाएगा।
तो ऐसे तय होगा आरक्षण
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी ब्लॉक में ओसीबी कोटा 18 गांव का है और अन्य दस गांव कभी ओसीबी नहीं हुए हैं, तो वहां भी आबादी के अनुसार दस और गांवों को इस वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा। 2015 को आधार वर्ष मानने पर देखा जाएगा कि ब्लॉक में ऐसे कौन से गांव हैं, जो उस वर्ष के चुनाव में (2015) में एससी या ओबीसी के लिए आरक्षित नहीं थे।
अब केवल एक चुनाव को आधार बनाने पर हर ब्लॉक में ऐसे गांवों की संख्या बढ़ जाएगी, जहां पिछली बार एससी या ओबीसी का आरक्षण नहीं था। ऐसे में एससी के लिए 15 गांव के कोटे वाले ब्लॉक में यदि ऐसे 50 गांव निकल गए तो उनमें से आबादी के क्रम में ऊपर से 15 गांव को आरक्षित कर दिया जाएगा। इससे पिछली बार आरक्षित कई गांव इससे मुक्त हो जाएंगे। यही हाल ओबीसी के लिए होगा, उसमें भी कई गांव अनारक्षित या दूूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी ब्लॉक में ओसीबी कोटा 18 गांव का है और अन्य दस गांव कभी ओसीबी नहीं हुए हैं, तो वहां भी आबादी के अनुसार दस और गांवों को इस वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा। 2015 को आधार वर्ष मानने पर देखा जाएगा कि ब्लॉक में ऐसे कौन से गांव हैं, जो उस वर्ष के चुनाव में (2015) में एससी या ओबीसी के लिए आरक्षित नहीं थे।
अब केवल एक चुनाव को आधार बनाने पर हर ब्लॉक में ऐसे गांवों की संख्या बढ़ जाएगी, जहां पिछली बार एससी या ओबीसी का आरक्षण नहीं था। ऐसे में एससी के लिए 15 गांव के कोटे वाले ब्लॉक में यदि ऐसे 50 गांव निकल गए तो उनमें से आबादी के क्रम में ऊपर से 15 गांव को आरक्षित कर दिया जाएगा। इससे पिछली बार आरक्षित कई गांव इससे मुक्त हो जाएंगे। यही हाल ओबीसी के लिए होगा, उसमें भी कई गांव अनारक्षित या दूूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो सकते हैं।
आरक्षण का आवंटन 2015 आधार वर्ष के अनुसार होना है। अभी इस बारे में दिशा-निर्देशों का इंतजार है। जाहिर है कि आधार वर्ष बदलने से आरक्षण में बड़े स्तर पर बदलाव होगा। अभी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। दिशा-निर्देशों का इंतजार है। - संदीप वर्मा, डीपीआरओ