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पाकिस्तानी टिड्डियों का खतरा बुंदेलखंड में मंडराया, झांसी से चित्रकूटधाम मंडल तक आक्रमण की आशंका

Sun, 24 May 2020 01:00 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 24 May 2020 01:00 AM IST
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Pakistani locusts face danger in Bundelkhand
Locusts - फोटो : Amar Ujala
पाकिस्तान से भारत में घुसे टिड्डियों के दल के बुंदेलखंड में धावा बोलने के आसार हैं। ऐसे में कोरोना महामारी और लॉकडाउन जैसे संकटों से जूझ रहे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। टिड्डियों का दल फसलों के अलावा हरे पड़ों के पत्ते सफाचट कर देगा। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने किसानों को कुछ सुझाव दिए हैं। 
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राजस्थान के रास्ते टिड्डियों का दल पाकिस्तान से भारत में दाखिल हो चुका है। इनके उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में भी आने के आसार है। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने कहा है कि बुंदेलखंड में टिड्डियों के दल झांसी होते हुए बरुआसागर, टहरौली, राठ, मऊरानीपुर और गरौठा की ओर आने की संभावना है।
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इससे कई हजार हेक्टेयर में खड़ी फसल को नुकसान हो सकता है। खड़ी फसल के अलावा पेड़ों और अन्य हरे पत्तेदार वृक्षों के लिए यह भी हानिकारक है। इनसे बचाव काफी कठिन होता है। कुलपति ने कहा कि इस वर्ष बुंदेलखंड में टिड्डियों के दल का प्रकोप देखने को मिला है। इनके आक्रमण की निरंतर निगरानी रखना जरूरी है।
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थाली बजाकर टिड्डियों को भगाएं
थाली और डिब्बे एक साथ बजाकर टिड्डियों के दल को भगाया जा सकता है। कृषि विश्वविद्यालय में कीट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके सिंह सहित कीट वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि टिड्डियों के आक्रमण की दशा में किसान एक साथ इकट्ठा होकर थाली, टीन के डिब्बे आदि बजाकर शोर मचाएं।

कहा कि टिड्डियों का दल अक्सर दिन डूबने के समय पेड़ पौधों पर पड़ाव डालता है। यह भी बताया कि बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन और अंडों के लिए सर्वाधिक अनुकूल है। ऐसे मिट्टी वाले क्षेत्रों में जुताई करवाकर पानी भरवा दें। एक साथ मिलकर क्लोरपाइरीफॉस- 20 प्रतिशत, ईसी 1200 मिलीमीटर प्रति हेक्टेयर या क्लोरोपाइरीफॉस 50 प्रतिशत, ईसी 480 मिलीमीटर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें।

टिड्डियों का दल एक बार घुसा तो तीन साल असर
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पाकिस्तान से राजस्थान के रास्ते घुसा टिड्डियों का दल अबकी काफी बड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यह कीट एक बार इलाके में घुस गया तो इनका प्रकोप तीन साल तक बना रहेगा। इनके अंडों से करोड़ों टिड्डियां बढ़ेंगी।

टिड्डियों के आक्रमण पर यहां दें सूचना
टिड्डियों के आक्रमण के मद्देनजर कई कृषि संगठनाें ने अपनी वेबसाइट और फोन नंबर जारी किए हैं। किसान इन पर सूचना दें। इनमें बांदा कृषि विश्वविद्यालय भी है। लो कस्ट कंट्रोल आर्गेनाइजेशन फरीदाबाद और क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र, लखनऊ की वेबसाइट या फोन नंबर - 0522-2732063 तथा डाक्टर सुरेंद्र कुमार सिंह विभागाध्यक्ष विज्ञान विभाग, कृ षि महाविद्यालय बांदा और कृषि महाविद्यालय की ई-मेल अथवा मोबाइल नंबर-9935789160 पर सूचित करें।
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