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Kanpur News: 15 दिन से बंद पड़ा है महिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट
Tue, 13 Aug 2024 12:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Tue, 13 Aug 2024 12:07 AM IST
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कानपुर देहात। कोरोना काल में लाखों की लागत से बने ऑक्सीजन प्लांट बेमकसद साबित हो रहे हैं। अक्सर तकनीकी खामी के चलते बंद रहते हैं। जिला महिला अस्पताल परिसर में लगा ऑक्सीजन प्लांट पिछले 15 दिन से बंद पड़ा है। इस वजह से जिला अस्पताल की इमेरजेंसी और महिला अस्पताल में प्रतिदिन 24 ऑक्सीजन सिलिंडर की खपत हो रही है। इस पर प्रतिदिन 4320 रुपये खर्च किया जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल में एक हजार एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) का ऑक्सीजन प्लांट चार साल पहले बनकर तैयार हुआ था। इस प्लांट से जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और महिला अस्पताल के एसएनसीयू , लेबर रूम में ऑक्सीजन की पूर्ति होती है। एक निजी कंपनी द्वारा लगाए गए इस प्लांट में अक्सर खराबी आ जाने से प्लांट बंद रहता है। जानकारी के अनुसार 28 जुलाई को ऑक्सीजन प्लांट का उपकरण खराब होने से वह बंद हो गया। इसके बाद से अधिकारी जैनपुर स्थित एक ऑक्सीजन प्लांट से सिलिंडर मंगवाने लगे।
ऑक्सीजन सिलिंडर में मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन फ्लो उन तक नहीं पहुंच पा रही है। इस वजह से बीच-बीच में ऑक्सीजन बंद हो जाती है। पड़ताल में सामने आया है कि अधिकारी बी टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर (10 लीटर क्षमता का) 180 रुपये में रिफिल कराकर खरीदते हैं। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 24 घंटे नवजात भर्ती रहते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा खपत एसएनसीयू में ही हो रही है। इसी तरह अन्य जगह मिलाकर कुल 12 सिलिंडर हर दिन खत्म हो रहे हैं।
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वहीं जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भी प्लांट बंद होने से ऑक्सीजन नहीं पहुंच रही है। इससे यहां पर भी प्रतिदिनि 12 सिलिंडर की खपत हो रही है। इस तरह दोनों जगह पर हर दिन 4320 रुपये की ऑक्सीजन खर्च हो रही है। विभागीय जानकारों के मुताबिक पिछले 15 दिन के आंकड़ों की बात करें तो अब तक 64800 रुपये के सिलिंडर रिफिल कराए जा चुके हैं। वहीं ऑक्सीजन प्लांट बनाने के लिए कार्यदायी संस्था ने सीएमएस महिला अस्पताल को रिपोर्ट दी है। इसमें बताया कि प्लांट के उपकरण की उनके स्तर से खरीद होकर लगनी है। इसके बाद ही प्लांट चल सकेगा।
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कोविड में मिले आठ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हो गए खराब
कोविड-19 की पहली लहर के समय शासन की ओर से जिला महिला अस्पताल को 56 कंसंट्रेटर मिले थे। इसमें से 26 एसएनसीयू और 30 जनरल वार्ड को दिए गए थे। मौजूदा समय में एसएनसीयू में 18 कंसंट्रेटर ही चल रहे हैं, जबकि आठ खराब हो गए हैं। वहीं अन्य को चलाने में भी परेशानी होती है। देखरेख ठीक से न होने पर किसी में आवाज आती तो किसी में ऑक्सीजन फ्लो कम है।
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11 कर्मचारियों की सेवाएं हो गई समाप्त
कोविड के समय शासन की ओर से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर संचालित करने के लिए 11 कर्मचारियों को रखा गया था। कोरोना काल में इनकी सेवाएं ली। इसके बाद सब की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। इसके बाद दोनों प्लांट का संचालन ठप हो गया था। वहीं कुछ दिनों बाद से एक निजी संस्था द्वारा कुछ कर्मचारियों को लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आपूर्ति दी जा रही थी।
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दूसरे प्लांट से सिर्फ ट्रॉमा सेंटर को ऑक्सीजन
जिला अस्पताल पुरुष के परिसर में दूसरा ऑक्सीजन प्लांट लगा है। इससे सिर्फ ट्रामा सेंटर में कनेक्शन है। अस्पताल के अन्य वार्ड व इमरजेंसी में कनेक्शन न होने से सिर्फ ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होने वाले मरीजों को ही ऑक्सीजन दी जाती है। विभागीय जानकार बताते हैं कि इसमें अक्सर खामियां रहती हैं।
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वर्जन ...
ट्रॉमा सेंटर परिसर में बना ऑक्सीजन प्लांट संचालित है। कोविड के दौरान ऑपरेटर तैनात किया गया था। शासन से उनकी सेवा समाप्ति के बाद अब किसी और से चलवाया जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड में महिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई होती है। वह खराब होने की वजह से सिलिंडर रिफिल करवा कर काम चलाया जा रहा।
डॉ. खालिद रिजवान, सीएमएस
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28 जुलाई से ऑक्सीजन प्लांट बंद है। मरीजों की सुविधा के लिए रिफिल सिलिंडर भरवाया जा रहा है। प्लांट बनाने वाली संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि एक उपकरण को खरीदा जाना है। इसके बाद प्लांट शुरू हो पाएगा। खरीद के लिए कागजी कार्रवाई चल रही।
- डॉ. वंदना सिंह, सीएमएस
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जिला महिला अस्पताल में एक हजार एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) का ऑक्सीजन प्लांट चार साल पहले बनकर तैयार हुआ था। इस प्लांट से जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और महिला अस्पताल के एसएनसीयू , लेबर रूम में ऑक्सीजन की पूर्ति होती है। एक निजी कंपनी द्वारा लगाए गए इस प्लांट में अक्सर खराबी आ जाने से प्लांट बंद रहता है। जानकारी के अनुसार 28 जुलाई को ऑक्सीजन प्लांट का उपकरण खराब होने से वह बंद हो गया। इसके बाद से अधिकारी जैनपुर स्थित एक ऑक्सीजन प्लांट से सिलिंडर मंगवाने लगे।
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ऑक्सीजन सिलिंडर में मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन फ्लो उन तक नहीं पहुंच पा रही है। इस वजह से बीच-बीच में ऑक्सीजन बंद हो जाती है। पड़ताल में सामने आया है कि अधिकारी बी टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर (10 लीटर क्षमता का) 180 रुपये में रिफिल कराकर खरीदते हैं। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 24 घंटे नवजात भर्ती रहते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा खपत एसएनसीयू में ही हो रही है। इसी तरह अन्य जगह मिलाकर कुल 12 सिलिंडर हर दिन खत्म हो रहे हैं।
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वहीं जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भी प्लांट बंद होने से ऑक्सीजन नहीं पहुंच रही है। इससे यहां पर भी प्रतिदिनि 12 सिलिंडर की खपत हो रही है। इस तरह दोनों जगह पर हर दिन 4320 रुपये की ऑक्सीजन खर्च हो रही है। विभागीय जानकारों के मुताबिक पिछले 15 दिन के आंकड़ों की बात करें तो अब तक 64800 रुपये के सिलिंडर रिफिल कराए जा चुके हैं। वहीं ऑक्सीजन प्लांट बनाने के लिए कार्यदायी संस्था ने सीएमएस महिला अस्पताल को रिपोर्ट दी है। इसमें बताया कि प्लांट के उपकरण की उनके स्तर से खरीद होकर लगनी है। इसके बाद ही प्लांट चल सकेगा।
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कोविड में मिले आठ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हो गए खराब
कोविड-19 की पहली लहर के समय शासन की ओर से जिला महिला अस्पताल को 56 कंसंट्रेटर मिले थे। इसमें से 26 एसएनसीयू और 30 जनरल वार्ड को दिए गए थे। मौजूदा समय में एसएनसीयू में 18 कंसंट्रेटर ही चल रहे हैं, जबकि आठ खराब हो गए हैं। वहीं अन्य को चलाने में भी परेशानी होती है। देखरेख ठीक से न होने पर किसी में आवाज आती तो किसी में ऑक्सीजन फ्लो कम है।
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11 कर्मचारियों की सेवाएं हो गई समाप्त
कोविड के समय शासन की ओर से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर संचालित करने के लिए 11 कर्मचारियों को रखा गया था। कोरोना काल में इनकी सेवाएं ली। इसके बाद सब की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। इसके बाद दोनों प्लांट का संचालन ठप हो गया था। वहीं कुछ दिनों बाद से एक निजी संस्था द्वारा कुछ कर्मचारियों को लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आपूर्ति दी जा रही थी।
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दूसरे प्लांट से सिर्फ ट्रॉमा सेंटर को ऑक्सीजन
जिला अस्पताल पुरुष के परिसर में दूसरा ऑक्सीजन प्लांट लगा है। इससे सिर्फ ट्रामा सेंटर में कनेक्शन है। अस्पताल के अन्य वार्ड व इमरजेंसी में कनेक्शन न होने से सिर्फ ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होने वाले मरीजों को ही ऑक्सीजन दी जाती है। विभागीय जानकार बताते हैं कि इसमें अक्सर खामियां रहती हैं।
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ट्रॉमा सेंटर परिसर में बना ऑक्सीजन प्लांट संचालित है। कोविड के दौरान ऑपरेटर तैनात किया गया था। शासन से उनकी सेवा समाप्ति के बाद अब किसी और से चलवाया जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड में महिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई होती है। वह खराब होने की वजह से सिलिंडर रिफिल करवा कर काम चलाया जा रहा।
डॉ. खालिद रिजवान, सीएमएस
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28 जुलाई से ऑक्सीजन प्लांट बंद है। मरीजों की सुविधा के लिए रिफिल सिलिंडर भरवाया जा रहा है। प्लांट बनाने वाली संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि एक उपकरण को खरीदा जाना है। इसके बाद प्लांट शुरू हो पाएगा। खरीद के लिए कागजी कार्रवाई चल रही।
- डॉ. वंदना सिंह, सीएमएस