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श्री लक्ष्मी कॉटसिन के मालिक डॉ. एमपी अग्रवाल 5200 करोड़ के कर्जदार 2700 करोड़ के खाते एनपीए
Sat, 29 Aug 2020 10:29 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 29 Aug 2020 10:29 AM IST
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एमपी अग्रवाल
- फोटो : amar ujala
टेक्सटाइल और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाने वाली कानपुर की कंपनी श्री लक्ष्मी कॉटसिन अब नीलामी के कगार पर पहुंच गई है। कंपनी के मालिक डॉ. एमपी अग्रवाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के बाद अब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में भी केस हार गए हैं। दोनों ट्रिब्यूनल ने उद्यमी के रिवाइवल प्लान को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए इनके पास अभी 20 दिन का समय शेष है। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय कृष्णा नगर में है। कंपनी मुख्य रूप से टेक्सटाइल, गृह सज्जा और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाती रही है। कंपनी मालिक डॉ. एमपी अग्रवाल ने शहर के दो अन्य बड़े उद्योगपति विक्रम कोठारी और उदय देसाई की तरह 16 बैंकों के 2700 करोड़ रुपये डुबो दिए हैं।
अग्रवाल की अलग-अलग कंपनियां करीब 5200 करोड़ रुपये की कर्जदार हैं, जिनमें से 2700 करोड़ के खाते एनपीए हो गए हैं। बैंकों ने कर्ज वसूली के लिए इनकी चार संपत्तियों की नीलामी कर दी हैं। बाकी की वसूली के लिए प्रकरण अभी तक नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में चल रहा था।
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सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए इनके पास अभी 20 दिन का समय शेष है। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय कृष्णा नगर में है। कंपनी मुख्य रूप से टेक्सटाइल, गृह सज्जा और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाती रही है। कंपनी मालिक डॉ. एमपी अग्रवाल ने शहर के दो अन्य बड़े उद्योगपति विक्रम कोठारी और उदय देसाई की तरह 16 बैंकों के 2700 करोड़ रुपये डुबो दिए हैं।
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अग्रवाल की अलग-अलग कंपनियां करीब 5200 करोड़ रुपये की कर्जदार हैं, जिनमें से 2700 करोड़ के खाते एनपीए हो गए हैं। बैंकों ने कर्ज वसूली के लिए इनकी चार संपत्तियों की नीलामी कर दी हैं। बाकी की वसूली के लिए प्रकरण अभी तक नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में चल रहा था।
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अपीलेट ट्रिब्यूनल ने साफ तौर पर कहा है कि उद्यमी की मंशा कंपनी के रिवाइवल की नहीं है, बल्कि मामले को बिना वजह लंबा खींचने की है। कंपनी ने रिवाइवल प्लान तो पेश किया लेकिन निवेशकों का नाम नहीं बताए। विदेशी निवेशक की बात कही गई, लेकिन इनकी तरफ से कोई जमानत राशि जमा नहीं की गई।
कंपनी की कुल वैल्यू 500 करोड़
अपीलेट ट्रिब्यूनल ने इस पर भी जोर दिया कि कंपनी की कुल वैल्यू 500 करोड़ से ज्यादा नहीं है। रिवाइवल प्लान के बाद भी कंपनी बैंकों का कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में बैंक कंपनी की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।
डा. अग्रवाल सबसे बड़े कर्जदार
शहर में 3500 करोड़ रुपये से अधिक की कर्जदारी का यह तीसरा मामला है। पहला मामला रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी का सामने आया था। कोठारी को 3690 करोड़ रुपये की बकायेदारी पर सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। दूसरा मामला हीरा कारोबारी उदय देसाई का है। इन पर 3592 करोड़ की बकायेदारी है। एमपी अग्रवाल पर कुल 5200 करोड़ की बकायेदारी है, जिनमें से 2700 करोड़ के खाते एनपीए हो गए हैं।
कंपनी की कुल वैल्यू 500 करोड़
अपीलेट ट्रिब्यूनल ने इस पर भी जोर दिया कि कंपनी की कुल वैल्यू 500 करोड़ से ज्यादा नहीं है। रिवाइवल प्लान के बाद भी कंपनी बैंकों का कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में बैंक कंपनी की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।
डा. अग्रवाल सबसे बड़े कर्जदार
शहर में 3500 करोड़ रुपये से अधिक की कर्जदारी का यह तीसरा मामला है। पहला मामला रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी का सामने आया था। कोठारी को 3690 करोड़ रुपये की बकायेदारी पर सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। दूसरा मामला हीरा कारोबारी उदय देसाई का है। इन पर 3592 करोड़ की बकायेदारी है। एमपी अग्रवाल पर कुल 5200 करोड़ की बकायेदारी है, जिनमें से 2700 करोड़ के खाते एनपीए हो गए हैं।