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हेरफेर नहीं कर पाएंगी आयुध निर्माणियां

Wed, 20 May 2015 02:53 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Wed, 20 May 2015 02:53 AM IST
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ordnance factory
वित्तीय वर्ष के आखिरी माह में भुगतान रोककर अधिक मुनाफा दिखाने का खेल अब आयुध निर्माणियों में नहीं चल सकेगा। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के निर्देश पर आयुध निर्माणी बोर्ड में कॉमर्शियल एकाउंटिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है। चालू वित्त वर्ष में आयुध निर्माणियां भी इस एकाउंटिंग सिस्टम पर अपने खाते, बैलेंस शीट और प्रॉफिट एंड लॉस के खाते बनाएंगी।
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फैक्ट्री के अधिकारी इसे कॉरपोरेशन में तब्दीली की ओर बढ़ा कदम बता रहे हैं। मौजूदा वक्त में जितनी भी आयुध निर्माणियां हैं वे बुक्स ऑफ एकाउंट को गवर्नमेंट एकाउंट सिस्टम के तहत मेंटेन करती हैं। इसके तहत लेनदेन की राशि व अन्य ब्यौरे को तब दर्ज किया जाता है, जब यह पूरा हो जाए।
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यानी किसी उत्पाद को बनाने के लिए कच्चा माल किसी सप्लायर से लेकर भुगतान होने तक की प्रक्रिया संपन्न होना आवश्यक है। पर कई बार कच्चे माल व अन्य के भुगतान 31 मार्च गुजर जाने के बाद किया जाता है। इसका लाभ यह मिलता है कि बजट के मुकाबले खर्च कम हो जाता है, जिससे मुनाफा अधिक दिखने लगता है। पर कॉमर्शियल एकाउंटिंग सिस्टम में डबल एंट्री होती है।
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इसके तहत संबंधित संस्था उन खर्चों और आमदनी को भी बुक्स में दर्ज करती हैं, जो लंबित हैं और उसका भुगतान नहीं हुआ। इससे साल भर में होने वाले घाटे-मुनाफे का सटीक आकलन हो जाता है और खातों में उलटफेर की संभावना नहीं रहती है।

सूत्रों की मानें तो रक्षा उत्पादन में लगे कारखानों की सही वित्तीय स्थिति जानने के लिए यह कवायद आरंभ की गई है। इस एकाउंटिंग सिस्टम से गंभीर वित्तीय अनियमितता या हानि को पकड़ा जा सकता है। फिलहाल कोई समस्या न उत्पन्न हो, इसके लिए पुराने तंत्र के साथ नए एकाउंटिंग सिस्टम को लागू करने के लिए कहा गया है।


 नए सिस्टम को लागू करने के लिए ट्रेनिंग जल्द शुरू होगी। एक आयुध फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कानपुर में जो मिलें बंद हुईं, उसके पीछे यहां कॉमर्शियल एकाउंटिंग सिस्टम लागू न करना अहम वजह थी।

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