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यूपी: वन विभाग की 16 बीघा जमीन से कब्जा हटाने का आदेश, जमीन पर बने हैं 250 से अधिक मकान
Sat, 11 Dec 2021 09:58 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 11 Dec 2021 09:58 AM IST
सार
तकरीबन 16 बीघा से अधिक भूभाग में बसे इन मुहल्लों में 250 से अधिक मकान बन चुके हैं। यह सारी बसावट वन विभाग की जमीन पर है। कस्बे के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने प्लाटिंग कर जमीन बेचकर करोड़ों रुपये कमाए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
फतेहपुर के खागा कस्बे में वन विभाग की 16 बीघा बेशकीमती जमीन भूमाफिया ने बेच डाली। जिन लोगों ने जमीनें खरीदीं, उन्होंने यहां अपने घर और मकान बना डाले। मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई।
उच्च न्यायालय ने तीन महीने के अंदर पूरी जमीन खाली कराने का आदेश दिया है। इस जमीन पर 250 से अधिक बने मकानों का कब्जा खाली कराना जिम्मेदारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। खागा कस्बे में बाईपास तिराहे, बाईपास चौराहे, नई बाजार और कुटि पर मुहल्ले शामिल हैं।
यहां तकरीबन 16 बीघा से अधिक भूभाग में बसे इन मुहल्लों में 250 से अधिक मकान बन चुके हैं। यह सारी बसावट वन विभाग की जमीन पर है। कस्बे के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने प्लाटिंग कर जमीन बेचकर करोड़ों रुपये कमाए।
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मामले में पवन कुमार नामक के व्यक्ति ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंडल और न्यायाधीश पियूष अग्रवाल की बेंच में जनहित याचिका दाखिल की। प्रकरण संज्ञान में आया तो 23 जुलाई 2020 को तत्कालीन एसडीएम ने जमीन की पैमाइश कराई।
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उच्च न्यायालय ने तीन महीने के अंदर पूरी जमीन खाली कराने का आदेश दिया है। इस जमीन पर 250 से अधिक बने मकानों का कब्जा खाली कराना जिम्मेदारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। खागा कस्बे में बाईपास तिराहे, बाईपास चौराहे, नई बाजार और कुटि पर मुहल्ले शामिल हैं।
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यहां तकरीबन 16 बीघा से अधिक भूभाग में बसे इन मुहल्लों में 250 से अधिक मकान बन चुके हैं। यह सारी बसावट वन विभाग की जमीन पर है। कस्बे के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने प्लाटिंग कर जमीन बेचकर करोड़ों रुपये कमाए।
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मामले में पवन कुमार नामक के व्यक्ति ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंडल और न्यायाधीश पियूष अग्रवाल की बेंच में जनहित याचिका दाखिल की। प्रकरण संज्ञान में आया तो 23 जुलाई 2020 को तत्कालीन एसडीएम ने जमीन की पैमाइश कराई।
इसमें 2.895 हेक्टेयर (16 बीघा से अधिक) जमीन वन विभाग की निकली। इस रिपोर्ट से वन विभाग को भी अवगत कराया गया। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की दो सदस्यीय पीठ ने दो दिसंबर को वन विभाग को तीन महीने के अंदर पूरी जमीन खाली कराने का आदेश दिया है।
प्रकरण मेरे कार्यकाल से पूर्व का है, इसलिए पूरी तरह से संज्ञान में नहीं है। माननीय उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त होने के बाद प्रकरण संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की पत्रावली का गंभीरता से अध्ययन कर रिपोर्ट देने के लिए एडीएम को जिम्मेदारी दी गई है। शीघ्र ही उत्तरदायित्व निर्धारित कर कार्रवाई की जाएगी। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी