बार अध्यक्ष हत्याकांड: 'काम हो गया है...पैसे ले लो', इंद्रजीत के मोबाइल पर अजय का मैसेज, पुलिस के भी उड़े होश
Orai News: कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी मोनू यादव के पिता अजय कुमार द्वारा कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव को भेजा गया एक मैसेज पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग साबित हुआ। मैसेज में लिखा था "काम हो गया...पैसे ले लो", जिससे हत्या और वित्तीय लेन-देन की साजिश का पर्दाफाश हुआ।
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उरई जिले में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी मोनू यादव तक पहुंचने में उसके पिता अजय कुमार का एक मैसेज पुलिस के लिए अहम सुराग बन गया। हत्या के बाद मोनू ने पिता को फोन कर कहा था कि पापा, काम हो गया है, पूरे पैसे मंगा लो। इसके बाद अजय कुमार ने कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव के मोबाइल पर मैसेज भेजकर काम पूरा होने और भुगतान करने की बात कही थी।
पुलिस की जांच के दौरान यही मैसेज सामने आया तो पूरे मामले की कड़ियां जुड़ती चली गईं। पुलिस की जांच में सामने आया कि गयादीन अहिरवार की हत्या करने के बाद आरोपियों ने शव को कानपुर के गुजैनी थाना क्षेत्र में फेंक दिया था। इसके बाद आरोपी सीधे कानपुर स्थित मोनू के घर पहुंचे। बताया गया कि हत्या की साजिश के लिए पहले ही दस लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।
इंद्रजीत यादव से चल रहा था विवाद
घर पहुंचने पर मोनू ने अपने पिता अजय कुमार यादव से कहा कि पापा, काम हो गया है। अब पूरे पैसे मंगा लो। इस बातचीत से हत्या के बाद भुगतान की तैयारी किए जाने की बात सामने आई। उधर, घटना के बाद से ही पुलिस अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान उनके पुत्र ने पुलिस को बताया कि उनके पिता का कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव से विवाद चल रहा था।
मोबाइल पर आया था अजय का मैसेज
इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने इंद्रजीत को हिरासत में ले लिया। उस समय वह शराब के नशे में था। करीब दो घंटे तक पूछताछ के बावजूद वह पुलिस को कोई ठोस जानकारी नहीं दे सका। इसी दौरान पुलिस ने उसका मोबाइल फोन चेक किया, तो उस पर मोनू के पिता अजय कुमार यादव का मैसेज आया हुआ था। इसमें काम पूरा होने और जल्द पूरा भुगतान करने की बात कही गई थी।
तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया
मैसेज सामने आते ही पुलिस को हत्या के पीछे आर्थिक लेनदेन और सुनियोजित साजिश का अहम सुराग मिल गया। पुलिस के लिए यह मैसेज इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे हत्या के बाद आरोपियों और उनके मददगारों के बीच संपर्क की पुष्टि हो रही थी। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए कानपुर में दबिश दी और हत्याकांड में शामिल तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
मोनू को पुलिस ने मुठभेड़ में दबोचा
हालांकि, मुख्य आरोपी मोनू यादव पुलिस के पहुंचने से पहले ही भाग गया था। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। मंगलवार देर रात करीब ढाई बजे पुलिस ने उसे मुठभेड़ में घेर लिया। इस दौरान मोनू ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस की गोली उसके दोनों पैरों में लगी। घायल अवस्था में उसे गिरफ्तार कर अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में बोला- बहुत दर्द हो रहा है, इंजेक्शन लगवा दो
मुठभेड़ में घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए मोनू यादव ने दर्द से परेशान होकर पुलिसकर्मियों से कहा कि बहुत दर्द हो रहा है, इंजेक्शन लगवा दो। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे हत्याकांड की साजिश, दस लाख रुपये में तय सौदे और हत्या के बाद भुगतान की बातचीत को लेकर पूछताछ कर रही है।
बेटे से कहा था- काम कर दिया तो जिंदगी बदल देंगे
हत्याकांड की साजिश में इंद्रजीत यादव की भूमिका को लेकर भी एक अहम बात सामने आई है। बताया गया कि इंद्रजीत ने मोनू के पिता से कहा था कि अगर उनका बेटा काम कर देगा तो उसकी जिंदगी बदल देंगे। इसी भरोसे और दस लाख रुपये में तय सौदे के बीच हत्या की साजिश को अंजाम दिए जाने की बात सामने आ रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या के लिए रकम किसने तय की थी, भुगतान कितना हुआ और इस पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही।
मध्यस्थता कराने वाला अजय अब भी फरार
सुपारी के सौदे में मध्यस्थता कराने वाला अजय यादव पुलिस की पकड़ से बाहर है। वह गिरफ्तार आरोपी मोनू यादव का पिता है। पुलिस के अनुसार, अजय ने ठेकेदार इंद्रजीत यादव और सुपारी किलर के बीच सौदा कराने में भूमिका निभाई थी। सीओ राजेश कमल का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी होगी।
बाकी लोगों की भूमिका भी खंगालेगी पुलिस
पुलिस की जांच अभी पांच आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। विवेचक के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के संपर्क में रहने वाले लोगों की भूमिका भी जांची जाएगी। इसके लिए उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। बातचीत और अन्य साक्ष्यों में किसी दूसरे व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अपहरण में इस्तेमाल कार के मालिक का खुलासा नहीं
पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अपहरण में इस्तेमाल कार किसकी थी, इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि कार केशव कटियार चला रहा था। हालांकि वाहन किसके नाम पंजीकृत है और उसके मालिक की क्या भूमिका थी, इस बारे में पुलिस ने अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। ऐसे में वाहन के मालिक और उसकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।