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हड़ताल के बीच अब ‘गोलमाल’, ट्रकों में जीपीएस लगवाने पर जारी है तनातनी

Tue, 19 Sep 2017 12:54 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 19 Sep 2017 12:54 PM IST
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Opposed to installing GPS in trucks
हड़ताल पर खड़े ट्रक
रेलवे के सीपीसी माल गोदाम में आने वाली मालगाड़ियों से माल उतारने वाले ट्रक तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। ट्रक संचालक जीपीएस न लगाने पर अड़े हुए हैं। इस मौके को भुनाने के लिए मालगोदाम में ‘गोलमाल’ शुरू हो गया है। माना जा रहा है यह सब कमीशन और डैमेज वसूलने के लिए किया जा रहा है।
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सोमवार दोपहर हुई तेज बारिश के चलते सीपीसी मालगोदाम में उतरीं सीमेंट की बोरियां, मटर और सोडा गीला होने का दावा सीएंडएफ (कास्ट एंड फ्रेट) वाले कर रहे हैं। इसको लेकर उन लोगों में रेलवे के प्रति नाराजगी है। दूसरी ओर रेलवे के डिप्टी सीटीएम ने माल गीला होने से इनकार किया है। बोले, बारिश के दो घंटे बाद वे सीपीसी मालगोदाम गए थे। कोई माल गीला नहीं हुआ है। सीमेंट बोरी और मटर पूरी तहर से सुरक्षित हैं। इसकी वीडियोग्राफी हमारे पास है।
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सीएंडएफ वालों का दावा है कि बारिश में करीब 20 हजार सीमेंट की बोरी गीली हो गईं। इसका नुकसान एसीसी और सतना सीमेंट के सीएंडएफ को हुआ है। कारण है कि एसीसी सीमेंट की बोरियां अनलोडिंग के बाद जमीन पर खुले में रखी गई थीं। एसीसी सीमेंट के सीएंडएफ एजेंट विवेक तिवारी का कहना है कि सीमेंट उतार कर जमीन पर रखी थी। इसके ऊपर तिरपाल लगा था। बावजूद इसके सीमेंट गीली हो गई है। ट्रक ऑपरेटरों और रेलवे की लड़ाई में हमलोग पिस रहे हैं।
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माल गीला होने और खराब होने की जिम्मेदारी सीएंडएफ की

Opposed to installing GPS in trucks
ट्रकों में जीपीएस स्थापित करने का विरोध
कानपुर के डिप्टी सीटीएम डॉ.जितेंद्र कुमार का कहना है कि माल गीला होने और खराब होने की जिम्मेदारी सीएंडएफ (कास्ट एंड फ्रेट) की है। इसका क्लेम इन लोगों को कंपनी से मिलता है। रही बात रेलवे की तो रेलवे सिर्फ माल लाने और ले जाने का किराया लेता है। वैसे भी मालगोदाम में सीएंडएफ (कास्ट एंड फ्रेट) वालों के ही ट्रक और लेबर होती हैं। ऐसे में वे लोग क्यों अपने ट्रकों में जीपीएस नहीं लगा रहे हैं वे जानें। रेलवे से इसका कोई वास्ता नहीं है।  
 

किसका क्या है कहना

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ट्रकों की हड़ताल के बाद पल्लेदारों ने दिए अपने बयान
मैं पहले अपनी यूनियन केपदाधिकारियों और ट्रक मालिकों से बात करूंगा। इसके बाद ही कोई निर्णय लूंगा। ट्रकों की हड़ताल ऐसे खत्म नहीं होगी। जीपीएस न लगाने का कारण है कि हमारे ट्रक 10 से 15 किमी की दूरी तक  ही चलते हैं। ऐसे में जीपीएस लगाने में 5-6 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। ऐसे में हम लोगों के लिए यह एक फिजूल खर्च है। 
अब्दुल वहीद, महामंत्री, लोकल ट्रक सर्विस यूनियन

लोकल ट्रक सर्विस यूनियन के महामंत्री, एसपी ट्रैफिक के साथ देर शाम को बैठक हुई थी। तय हुआ था कि जिन ट्रकों में जीपीएस होगा उन्हें ही परमिट मिलेगा। साथ ही, ट्रक भी मालगोदाम से माल उतारेंगे। इसके अलावा बाहरी ट्रकों को एंट्री नहीं मिलेगी। महामंत्री ने कहा है कि हड़ताल मंगलवार को खत्म कर काम शुरू करेंगे। 
डॉ.जितेंद्र कुमार, डिप्टी सीटीएम, रेलवे

एक-दो दिन का समय ट्रक सर्विस यूनियन के महामंत्री और अध्यक्ष ने मांगा है। यदि जीपीएस नहीं लगाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई करने के कई तरीके हैं पहले उनका निर्णय देख लें। यदि एक दो दिन में नतीजा नहीं निकलता है तो हमलोग अपना कदम उठाएंगे। 
सुशील कुमार, एसपी ट्रैफिक

एक नजर मालगोदाम पर

प्रतिदिन-3 से 4 रैक लगती हैं
ट्रकों की आवश्यकता- 800-900
वर्तमान में ट्रक हैं -400
लेबर की संख्या- 3000

 
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