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उम्मीदों का उजियारा: आपदा में खोजे अवसर, कोरोना काल में पेश की मिसाल

Mon, 28 Dec 2020 12:24 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 28 Dec 2020 12:24 AM IST
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Opportunities discovered in disaster, example set in Corona era
कोरोना काल में इन्होंने पेश की मिसाल - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में हर किसी के सामने समस्या आई। कई की नौकरी गई तो कई लोगों का व्यापार ठप हो गया। लेकिन संकट के इस समय भी कई लोगों ने नए रास्ते खोजे और खुद अपनी जिंदगी को पटरी पर ले आए। कानपुर के शिवम राजपूत, दीपक गुप्ता, याकूब हमराज जैसे लोगों ने आपदा के समय को अवसर में बदला और दूसरों के लिए मिसाल पेश की। काम बदला और तरक्की की नई इबारत लिख दी।
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बनाते थे बिलिंग सॉफ्टवेयर, अब खुद की कंपनी
स्वरूप नगर में रहने वाले शिवम राजपूत ने 2014 में अपने बड़े भाई पवन राजपूत की तरह बीटेक किया था। दोनों अलग-अलग स्टोरों के लिए बिलिंग के सॉफ्टवेयर बनाते थे। लॉकडाउन में मॉल, स्टोर बंद हुए तो इनके सामने भी समस्या खड़ी हो गई।
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फिर इन्होंने लोहा का कारोबार करने वाले मित्र आयुष द्विवेदी के साथ मिलकर घर-घर खाने-पीने के सामान की डिलीवरी शुरू कर दी। काम बढ़ा तो स्टे होम इंडिया नाम से पोर्टल बनाकर ऑनलाइन सामान डिलीवरी का काम शुरू किया।
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30 हजार की पूंजी से काम शुरू किया था। आज इनके पास 500 ग्राहक हैं। टर्नओवर 45 लाख प्रति महीने तक पहुंच गया है। एनजीओ के साथ मिलकर उनकी कंपनी उन्नाव, आगरा तक ऑनलाइन डिलीवरी का काम करती है।

दो दिन में बना दिया सैनिटाइजर, सस्ते दामों पर बेचा
दवा कंपनी चलाने वाले दीपक गुप्ता और उनकी फैक्ट्री के केमिस्टों ने मिलकर लॉकडाउन से पहले केवल दो दिन में ही हैंड सैनिटाइजर बना दिया था। दीपक बताते हैं कि महामारी की शुरुआत में सैनिटाइजर की बहुत डिमांड थी और यह बहुत महंगा मिलता था।

ऐसे में 18 मार्च को अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर बनाने का लाइसेंस लिया। 20 मार्च को उत्पाद को शहर में उतारा गया। इसे केवल शहर में सस्ते दामों पर बेचा और जरूरतमंदों को दिया। शुरुआत में ही 50 हजार लीटर से ज्यादा सैनिटाइजर का उत्पादन किया।

कम कीमत वाली पीपीई किट बनाई
पीपीई किट बनाने के लिए खास तरह का कपड़ा और टेप की जरूरत होती है। इसके लिए कई मशीनों की जरूरत होती है। पहले यह सभी उत्पाद चीन से ही जरूरत पड़ने पर आते थे लेकिन कोरोना में इसकी मांग बढ़ी। ऐसे में रेडीमेड कपड़ों का काम करने वाले याकूब हमराज ने लोगों की मदद करने और कम कीमत में पीपीई किट उपलब्ध कराने के लिए स्टीचिंग वाली पीपीई किट बनाई।

इनकी कीमत तीन सौ रुपये रखी। इसे अस्पतालों तक भी पहुंचाया। याकूब ने बताया कि लॉकडाउन में कच्चे माल और लेबरों की बहुत समस्या थी लेकिन हार नहीं मानी। अलग-अलग जगहों से किट में इस्तेमाल होने वाले कपड़े की व्यवस्था की। अभी तक करीब 30 हजार पीपीई किट बना चुके हैं।
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