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Kanpur News: कभी चौराहे पर मांगते थे काम, आज हैं शहर के प्रतिष्ठित प्लास्टिक सर्जन

Wed, 07 May 2025 01:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 May 2025 01:36 AM IST
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Once he used to ask for work at the crossroads, today he is the city's reputed plastic surgeon
डाॅ प्रेमशंकर - फोटो : स्वयं
कानपुर। कभी चौराहे पर खड़े होकर काम मांगते थे। अगर किसी दिन काम नहीं मिला तो जैसे-तैसे खाने का बंदोबस्त कर घर चले जाते थे। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और काबिलियत से आज वह शहर के प्रतिष्ठित प्लास्टिक सर्जन हैं। यह कहना है जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रेम शंकर का।
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लखनऊ निवासी डॉ. प्रेम के अनुसार वह शुरूआत में पढ़ाई में कमजोर थे। उनके हाईस्कूल (1991) में 49 प्रतिशत अंक आए थे। इंटर (1993) में तो वह फेल ही हो गए थे, इसकी वजह से उन्हें स्कूल में दोबारा प्रवेश तक नहीं मिला। उन्होंने प्राइवेट इंटर का फॉर्म भरा और पढ़ाई शुरू करने के साथ ही मजदूरी करने लगे। तब एक दिन की मजदूरी 30 रुपये मिलती थी। घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। उनकी पढ़ाई में मामा ने सहयोग किया। डॉ. प्रेम ने बताया कि 1994 में इंटर की परीक्षा पास की और उसके बाद सीपीएमटी की तैयारी की। तीसरी बार में उन्हें जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज मिला। उनकी मेहनत के चलते एमबीबीएस में बहुत अच्छे अंक आए। इसके बाद एमएस केजीएमसी लखनऊ से किया। इसके बाद 2006 में प्रोफेसर के तौर पर पहली नौकरी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पाई। यहां भी वह रुके नहीं और 2011 में एमसीएच के लिए आवेदन कर दिया। इसमें भी ऑल इंडिया रैंक तीन पाई और सफदरगंज में सीट मिली। नौकरी के साथ प्रवेश के लिए यूपी सरकार से एनओसी चाहिए थी, जो उन्हें नहीं मिली। उन्होंने उसी साल 2011 दिसंबर को फिर से परीक्षा दी। इस बार भी उन्हें किसी कारण प्रवेश नहीं मिल सका। इसके बाद 2012 में फिर परीक्षा दी और केजीएमसी में प्रवेश लिया। उसके बाद 2016 में डीएनबी भी किया।
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डॉ. प्रेम शंकर कहते हैं कि अगर एक हारे हुए व्यक्ति ने अपने पेशे की सबसे महत्वपूर्ण डिग्रियां हासिल की तो सिर्फ अपने हौसले और मेहनत से। अगर मैं उस वक्त रुक जाता तो आज यहां नहीं होता। मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचाए। सफलता के मायने अंक तो बिल्कुल नहीं होते हैं। आपके सामने कई परीक्षाएं हैं तो आपको ढीठ बनना होगा। तभी आप अपने लक्ष्य को पाकर फर्श से अर्श तक का रास्ता तय कर सकते हैं।
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