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Kanpur News: बैंक ऑफ इंडिया में ओडीओपी में नाै करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी

Wed, 11 Feb 2026 02:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 02:03 AM IST
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ODOP scam of over Rs 9 crore in Bank of India
कानपुर। बैंक ऑफ इंडिया की दादानगर शाखा समेत अन्य शाखाओं में एक जिला एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) की सब्सिडी में भ्रष्टाचार का खुलासा हो गया है। बैंक कर्मियों और अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर सब्सिडी में गड़बड़ी की। बैंक के महाप्रबंधक की ओर से कराए गए ऑडिट में सब्सिडी की करीब नाै करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। गोलमाल की गई रकम सरकार की है। बैंक ने सालों बाद भी प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कराई है।
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सूत्रों ने बताया कि सब्सिडी का लाभ लेने वाली इकाइयों से दस्तावेजों की प्रक्रिया भी नहीं पूरी कराई गई। बैंक में कोई भी लोन स्वीकृत करने के पहले प्री-स्वीकृत और लोन होने के बाद पोस्ट स्वीकृत रिपोर्ट लगती है जिसमें संबंधित स्थान के साथ जीपीएस कैमरा से फोटो लेने का प्रावधान है। लोन के दस्तावेज तक ऑडिट में नहीं मिले। बैंक की विजिलेंस टीम कई महीनों से जांच कर रही है। फंसे हुए कई अधिकारियों से दो राउंड का जवाब सवाल किया जा चुका है। यह अधिकारी अपने आप को बेवजह फंसा हुआ बता रहे हैं और योजना के पोर्टल पर सब्सिडी से जुड़े कार्य का अपनी आईडी का इस्तेमाल न किए जाने की बात कह रहे हैं। इस पूरे मामले में सबसे चौंकने बात यह है कि जितने का घोटाला उजागर किया जा रहा है यह रकम ऑडिट में इससे कही ज्यादा है। ये रकम आठ-नाै करोड़ के करीब है।
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सूत्रों के मुताबिक, बैंक और उद्योग विभाग के पोर्टल पर जो भी कर्मचारी लॉगिन करता है उसका लॉगिन डाटा और सिस्टम आईपी एड्रेस सर्वर पर सेव रहता है। इससे साइबर सेल और विजिलेंस इस मामले को आसानी से खोल सकते हैं। किस आईपी और सिस्टम से ऐसे फ्रॉड को अंजाम देकर सब्सिडी में खेल किया गया यह सब उजागर हो सकता है।
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बैंक आफ इंडिया की दादानगर, कौशलपुरी, मंधना, सीसामऊ, गुरु तेग बहादुर शाखा में यह मामले सामने आ चुके हैं। इसके बाद अन्य शाखाओं में हड़कंप मचा हुआ है। जिस जोनल मैनेजर के कार्यकाल में यह घटना घटी थी उसके बाद एक जोनल मैनेजर अपना लगभग दो वर्ष का कार्यकाल पूरा करके जा चुके हैं। वर्तमान के जोनल मैनेजर ने अभी हाल में ही कार्यभार ग्रहण किया है। इतने अधिकारियों के बदलने के बाद भी मामले पर कोई कार्रवाई न होना संशय पैदा करता है।
सूत्रों ने बताया कि इतनी बड़ी सब्सिडी की रकम का खेल होने से वास्तव में बैंक का वित्तीय नुकसान नहीं हो रहा है क्योंकि रकम प्रदेश सरकार की है। इसलिए बैंक प्रबंधन भी इतने साल बीत जाने के बाद भी एफआईआर नहीं करा रहा है। हालांकि उद्योग विभाग ने जांच शुरू की है।

बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं में अलग-अलग खातों के जरिये करीब 8-9 करोड़ रुपये की सब्सिडी ली गई। इन रुपयों का इस्तेमाल उद्योग लगाने में नहीं किया गया। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में बैंक ऑफ इंडिया के कुछ अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से फ्रॉड किया और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में सेंधमारी का रास्ता निकाल लिया। बैंक के सालाना ऑडिट में यह मामला वर्ष 2023 में ही पकड़ में आ गया था। यह दूसरी ऑडिट रिपोर्ट थी जिसकी शिकायत तत्कालीन ऑडिटर व बैंक के सीनियर मैनेजर ने की थी जिसके बाद से इस रिपोर्ट पर तत्कालीन कानपुर के जोनल मैनेजर और उच्च अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए सिर्फ कुछ अधिकारियों का ट्रांसफर कर मामले को दबा दिया। इसमें अधिकतर मामले कानपुर देहात के हैं।
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