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Kanpur News: पॉप मशीन पर अब दो श्रमिकों का लगेगा अंगूठा, ऑनलाइन पंजीयन में भी सहूलियत
Wed, 04 Nov 2026 01:54 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 04 Nov 2026 01:54 AM IST
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कानपुर देहात। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान क्रय नीति के नियमों में आंशिक बदलाव किया गया है। नियम में छूट मिलने से अब ऑनलाइन पंजीयन बढ़ेगा। वहीं, अब प्रति केंद्र पॉप (पॉइंट ऑफ परचेज) मशीन पर न्यूनतम दो श्रमिकों का अंगूठा लेकर खरीद की जा सकेगी। इससे पहले कम से कम चार श्रमिकों के अंगूठा लगाने की बाध्यता थी।
जिले में करीब तीन लाख से अधिक पंजीकृत किसान हैं। सामान्य धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल तय है। वहीं ग्रेड ए धान के लिए 2461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। क्रय नीति के नियमों की अड़चन से केवल 940 किसानों के पंजीयन ही हो सके हैं। आ रही परेशानी को लेकर शासन की ओर से पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब नियमों में छूट दी गई है। मिली छूट से किसानों, खरीद से जुड़े अधिकारियों को आसानी होगी। पहले खरीद शुरू होने के बाद नए क्रय केंद्र बनाने पर रोक थी। बदलाव के बाद खरीद सत्र के दौरान अतिरिक्त धान क्रय केंद्र खोलने की आवश्यकता होने पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति निर्णय लेगी। फार्मर आईडी एवं फसल/पंजीकरण विकल्प में भी बदलाव किया गया है।
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क्रॉप सर्वे का डेटा पूरा न होने या कोई फसल दर्ज न मिलने पर अब किसानों को फसल (धान/मक्का/ज्वार/बाजरा आदि) स्वयं चुनने का विकल्प दे दिया गया है। इसके अलावा नाम मिलान में आंशिक बदलाव पर भी पंजीयन हो सकेगा। बता दें कि कुल पांच एजेंसियों के कुल 63 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। खाद्य विभाग के 32, पीसीएफ के 10, पीसीयू के 11 यूपीएसएस के सात और भारतीय खाद्य निगम के तीन क्रय केंद्र बने हैं। 68 हजार मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य तय है।
...............
मोटे अनाज की खरीद में भी तेजी आएगी
सरकारी खरीद में नियमों में मिली छूट से मोटे अनाज की खरीद भी तेज होगी। मोटे अनाज की खरीद के लिए जनपद में कुल 43 क्रय केंद्र बने हैं। मंगलवार को नियमों में छूट का असर दिखा। 18 क्रय केंद्रों में से 13 में कुल 82 किसानों से 343.80 मीट्रिक टन बाजरा की खरीद कर ली गई। जबकि 37 किसानों से 114.90 मीट्रिक टन ज्वार की खरीद हुई है। अभी मक्का की सरकारी खरीद की बोहनी नहीं हो सकी है। जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन पंजीयन को एग्रीस्टैक से जोड़ दिया गया था। एग्रीस्टैक में सभी गाटे और फसल दर्ज नहीं होने की दिक्कत थी। अब किसान खुद फसल का ब्योरा भर सकेगा। इससे पंजीयन में सहूलियत होगी।
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बयान.......
अनाज की सरकारी खरीद के नियम में संशोधन कर दिया गया है। पॉप पर अब कम से कम दो श्रमिकों का अंगूठा लगाकर खरीद की जा सकेगी। जबकि पंजीयन में फसल का ब्योरा दर्ज करने और नाम मिलान में काफी हद तक छूट मिल गई है। छूट मिलने का असर है कि मोटे अनाज की खरीद तेज हो गई है। धान के पंजीयन अब बढ़ेंगे और दिवाली बाद खरीद शुरू होने की उम्मीद है। - देवेंद्र सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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जिले में करीब तीन लाख से अधिक पंजीकृत किसान हैं। सामान्य धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल तय है। वहीं ग्रेड ए धान के लिए 2461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। क्रय नीति के नियमों की अड़चन से केवल 940 किसानों के पंजीयन ही हो सके हैं। आ रही परेशानी को लेकर शासन की ओर से पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी।
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समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब नियमों में छूट दी गई है। मिली छूट से किसानों, खरीद से जुड़े अधिकारियों को आसानी होगी। पहले खरीद शुरू होने के बाद नए क्रय केंद्र बनाने पर रोक थी। बदलाव के बाद खरीद सत्र के दौरान अतिरिक्त धान क्रय केंद्र खोलने की आवश्यकता होने पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति निर्णय लेगी। फार्मर आईडी एवं फसल/पंजीकरण विकल्प में भी बदलाव किया गया है।
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क्रॉप सर्वे का डेटा पूरा न होने या कोई फसल दर्ज न मिलने पर अब किसानों को फसल (धान/मक्का/ज्वार/बाजरा आदि) स्वयं चुनने का विकल्प दे दिया गया है। इसके अलावा नाम मिलान में आंशिक बदलाव पर भी पंजीयन हो सकेगा। बता दें कि कुल पांच एजेंसियों के कुल 63 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। खाद्य विभाग के 32, पीसीएफ के 10, पीसीयू के 11 यूपीएसएस के सात और भारतीय खाद्य निगम के तीन क्रय केंद्र बने हैं। 68 हजार मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य तय है।
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मोटे अनाज की खरीद में भी तेजी आएगी
सरकारी खरीद में नियमों में मिली छूट से मोटे अनाज की खरीद भी तेज होगी। मोटे अनाज की खरीद के लिए जनपद में कुल 43 क्रय केंद्र बने हैं। मंगलवार को नियमों में छूट का असर दिखा। 18 क्रय केंद्रों में से 13 में कुल 82 किसानों से 343.80 मीट्रिक टन बाजरा की खरीद कर ली गई। जबकि 37 किसानों से 114.90 मीट्रिक टन ज्वार की खरीद हुई है। अभी मक्का की सरकारी खरीद की बोहनी नहीं हो सकी है। जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन पंजीयन को एग्रीस्टैक से जोड़ दिया गया था। एग्रीस्टैक में सभी गाटे और फसल दर्ज नहीं होने की दिक्कत थी। अब किसान खुद फसल का ब्योरा भर सकेगा। इससे पंजीयन में सहूलियत होगी।
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बयान.......
अनाज की सरकारी खरीद के नियम में संशोधन कर दिया गया है। पॉप पर अब कम से कम दो श्रमिकों का अंगूठा लगाकर खरीद की जा सकेगी। जबकि पंजीयन में फसल का ब्योरा दर्ज करने और नाम मिलान में काफी हद तक छूट मिल गई है। छूट मिलने का असर है कि मोटे अनाज की खरीद तेज हो गई है। धान के पंजीयन अब बढ़ेंगे और दिवाली बाद खरीद शुरू होने की उम्मीद है। - देवेंद्र सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी