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Kanpur News: अब 12वीं के बाद छात्र बन सकेंगे शिक्षक
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कानपुर। अब 12वीं की परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों के लिए शिक्षक बनने का रास्ता और आसान हो गया है। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) के तहत बीए-बीएड और बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। आवेदन की अंतिम तिथि 10 मार्च निर्धारित की गई है।
खास बात यह है कि अब छात्र-छात्राओं को अलग से स्नातक और बीएड करने की जरूरत नहीं होगी बल्कि चार वर्षों में ही दोनों डिग्रियां एक साथ प्राप्त की जा सकेंगी। प्रवेश प्रक्रिया वर्ष 2026 में 12वीं उत्तीर्ण या परीक्षा में सम्मिलित हो रहे विद्यार्थियों के लिए होगी। आवेदन एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। विवि के शिक्षा विभाग को नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) से औपचारिक मान्यता मिल चुकी है। एनसीटीई अधिनियम के तहत आवश्यक संसाधनों, आधारभूत संरचना, वित्तीय प्रबंधन और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता की जांच के बाद यह स्वीकृति दी गई।
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर बीए-बीएड और बीएससी-बीएड में 50-50 सीटों की एक-एक इकाई स्वीकृत की गई है। इसमें विषय ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षण कौशल, डिजिटल शिक्षण तकनीक, विद्यालयी इंटर्नशिप और शोध-आधारित प्रशिक्षण पर विशेष जोर रहेगा। पाठ्यक्रम पूरा करने पर विद्यार्थियों को स्नातक के साथ बीएड की उपाधि मिलेगी जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
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कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक का कहना है कि इससे कानपुर और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को अपने शहर में ही गुणवत्तापूर्ण और एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। इससे न केवल छात्रों का शैक्षणिक मार्ग सरल होगा बल्कि प्रदेश में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा मिलेगी।
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खास बात यह है कि अब छात्र-छात्राओं को अलग से स्नातक और बीएड करने की जरूरत नहीं होगी बल्कि चार वर्षों में ही दोनों डिग्रियां एक साथ प्राप्त की जा सकेंगी। प्रवेश प्रक्रिया वर्ष 2026 में 12वीं उत्तीर्ण या परीक्षा में सम्मिलित हो रहे विद्यार्थियों के लिए होगी। आवेदन एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। विवि के शिक्षा विभाग को नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) से औपचारिक मान्यता मिल चुकी है। एनसीटीई अधिनियम के तहत आवश्यक संसाधनों, आधारभूत संरचना, वित्तीय प्रबंधन और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता की जांच के बाद यह स्वीकृति दी गई।
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निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर बीए-बीएड और बीएससी-बीएड में 50-50 सीटों की एक-एक इकाई स्वीकृत की गई है। इसमें विषय ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षण कौशल, डिजिटल शिक्षण तकनीक, विद्यालयी इंटर्नशिप और शोध-आधारित प्रशिक्षण पर विशेष जोर रहेगा। पाठ्यक्रम पूरा करने पर विद्यार्थियों को स्नातक के साथ बीएड की उपाधि मिलेगी जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
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कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक का कहना है कि इससे कानपुर और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को अपने शहर में ही गुणवत्तापूर्ण और एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। इससे न केवल छात्रों का शैक्षणिक मार्ग सरल होगा बल्कि प्रदेश में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा मिलेगी।