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बड़ा कदम: अब स्टेम सेल के ग्रोथ हारमोंस से होगा त्वरित, सटीक व प्रभावी इलाज, एथिक्स कमेटी ने भी दे दी है अनुमति

Wed, 18 Dec 2024 11:32 AM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 18 Dec 2024 11:32 AM IST
सार

Kanpur News: स्टेम सेल का सबसे महत्वपूर्ण भाग ग्रोथ हारमोंस होते हैं। इन्हें एक्सोसोम कहा जाता है। ये स्टेम सेल के संदेशवाहक का काम करते हैं। एक्सोसोम संबंधित अंग को विकसित करने का काम करते हैं, जिससे वहां कोशिकाएं काम शुरू कर देती हैं। अंग की मरम्मत शुरू हो जाती है।

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Now rapid accurate and effective treatment will be done with the growth hormones of stem cells
सांकेतिक - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर के अपने मेडिकल कॉलेज ने स्टेम सेल थैरेपी के क्षेत्र में एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। अब यहां रोगियों का इलाज स्टेम सेल के ग्रोथ हारमोंस से किया जाएगा। अभी तक रोगी को पूरी स्टेम सेल दी जाती रही है। ग्रोथ हारमोंस से रोगी को त्वरित, प्रभावी और सटीक इलाज हो सकेगा। कॉलेज की एथिक्स कमेटी ने भी इसकी अनुमति दे दी है। ग्रोथ हारमोंस से थैरेपी शुरू करने वाला जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला चिकित्सा संस्थान होगा। कॉलेज ने इस क्षेत्र में अन्य शोधों को परखने के लिए एक पैनल भी गठित कर दिया है।

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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इलाज के लिए अभी पूरी स्टेम सेल दी जाती है, लेकिन स्टेम सेल के कई अवयव इलाज के लिए जरूरी नहीं होते हैं। स्टेम सेल का सबसे महत्वपूर्ण भाग ग्रोथ हारमोंस होते हैं। इन्हें एक्सोसोम कहा जाता है। ये स्टेम सेल के संदेशवाहक का काम करते हैं। एक्सोसोम संबंधित अंग को विकसित करने का काम करते हैं, जिससे वहां कोशिकाएं काम शुरू कर देती हैं। अंग की मरम्मत शुरू हो जाती है।

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स्टेम सेल कमेटी का बना दिया गया है पैनल
डॉ. काला ने बताया कि इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने अपनी सेंट्रल कमेटी भंग कर दी है। उसने हर मेडिकल कॉलेज को अपनी कमेटी बनाने के लिए कहा है। इसी को ध्यान में रखकर कॉलेज में स्टेम सेल कमेटी का पैनल बना दिया गया है। पैनल की एक दौर की बैठक भी हो चुकी है। इसमें एसजीपीजीआई, आईआईटी कानपुर समेत चोटी के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। ग्रोथ हारमोंस से इलाज के इस प्रोजेक्ट को इसी पैनल की अनुमति के बाद शुरू कर दिया जाएगा।

कहां-कहां कारगर है थैरेपी

  • रतौंधी के अलावा कई नेत्र रोगों में स्टेम सेल से हुआ इलाज।
  • स्पाइनल कॉर्ड की चोट में दी जा रही सफल रही है थैरेपी।
  • डायबिटीज में भी थैरेपी का हो चुका सफलता से इस्तेमाल।
  • मस्कुलर डिस्ट्रॉफी समेत पैदाइशी रोगों में भी थैरेपी दी गई।
  • मेडिकल कॉलेज में अब तक 250 रोगियों को थैरेपी दी गई।
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