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Kanpur News: जीवित को मृत दिखाने वाले सहायक विकास अधिकारी को नोटिस
Thu, 27 Nov 2025 01:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 27 Nov 2025 01:24 AM IST
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कानपुर देहात। सिकंदरा के देवनपुर सिलहरा निवासी बुजुर्ग को सत्यापन में मृतक दर्शाने वाले समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। वहीं, कार्रवाई के लिए प्रकरण निदेशालय अग्रसारित कर दिया गया है।
राजपुर ब्लॉक के देवनपुर सिलहरा निवासी बुजुर्ग रामअवतार ने 15 नवंबर को एडीएम वित्त एवं राजस्व से शिकायत की थी कि वह जीवित हैं। दो साल पहले उन्हें मृतक दर्शाकर मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। अब वृद्धावस्था पेंशन रुकी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने मामले की जांच बीडीओ को सौंपी थी। जीवित को मृतक दिखाने का मुद्दा अमर उजाला ने 17 नवंबर को प्रमुखता से उठाया।
इधर बीडीओ राजपुर की जांच में सामने आया कि रामअवतार का भाई दो वर्ष पूर्व पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्राम सचिव से मिला था। तब ग्राम सचिव ने गलती से पिता के बजाय बड़े भाई रामअवतार का मृतक प्रमाण पत्र जारी कर दिया। कुछ दिन बाद ही गलती पकड़ ली गई तो ग्राम सचिव ने जारी मृतक का प्रमाण पत्र रद्द कर दिया। पोर्टल पर प्रमाण पत्र रद्द प्रदर्शित हो रहा है। इधर वृद्धावस्था पेंशन के लिए अप्रैल में कराए गए सत्यापन में राजपुर ब्लॉक में तैनात समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी ने लापरवाही बरती और उन्होंने जीवित होते हुए भी रामअवतार को मृतक दर्शा दिया। इसके बाद से पेंशन रुक गई।
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बीडीओ हरगोविंद गुप्ता ने जांच रिपोर्ट में समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी आलोक चौबे को गलत सत्यापन का दोषी पाया। उन्होंने आख्या डीपीआरओ को भेजी। इधर डीपीआरओ ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए आख्या भेज दी। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने दोषी समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी आलोक चौबे को कारण बताओ नोटिस दी है। इसके साथ ही दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्रकरण निदेशालय अग्रसारित कर दिया।
............................
वर्जन........
बीडीओ राजपुर की जांच में वृद्धावस्था पेंशन के लिए जीवित सत्यापन में समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी आलोक चौबे को दोषी पाया गया है। उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया है। दंडात्मक कार्रवाई निदेशालय स्तर से की जानी है। इसके लिए प्रकरण निदेशालय भेजा गया है। - गीता सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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राजपुर ब्लॉक के देवनपुर सिलहरा निवासी बुजुर्ग रामअवतार ने 15 नवंबर को एडीएम वित्त एवं राजस्व से शिकायत की थी कि वह जीवित हैं। दो साल पहले उन्हें मृतक दर्शाकर मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। अब वृद्धावस्था पेंशन रुकी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने मामले की जांच बीडीओ को सौंपी थी। जीवित को मृतक दिखाने का मुद्दा अमर उजाला ने 17 नवंबर को प्रमुखता से उठाया।
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इधर बीडीओ राजपुर की जांच में सामने आया कि रामअवतार का भाई दो वर्ष पूर्व पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्राम सचिव से मिला था। तब ग्राम सचिव ने गलती से पिता के बजाय बड़े भाई रामअवतार का मृतक प्रमाण पत्र जारी कर दिया। कुछ दिन बाद ही गलती पकड़ ली गई तो ग्राम सचिव ने जारी मृतक का प्रमाण पत्र रद्द कर दिया। पोर्टल पर प्रमाण पत्र रद्द प्रदर्शित हो रहा है। इधर वृद्धावस्था पेंशन के लिए अप्रैल में कराए गए सत्यापन में राजपुर ब्लॉक में तैनात समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी ने लापरवाही बरती और उन्होंने जीवित होते हुए भी रामअवतार को मृतक दर्शा दिया। इसके बाद से पेंशन रुक गई।
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बीडीओ हरगोविंद गुप्ता ने जांच रिपोर्ट में समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी आलोक चौबे को गलत सत्यापन का दोषी पाया। उन्होंने आख्या डीपीआरओ को भेजी। इधर डीपीआरओ ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए आख्या भेज दी। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने दोषी समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी आलोक चौबे को कारण बताओ नोटिस दी है। इसके साथ ही दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्रकरण निदेशालय अग्रसारित कर दिया।
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बीडीओ राजपुर की जांच में वृद्धावस्था पेंशन के लिए जीवित सत्यापन में समाज कल्याण विभाग के ग्राम विकास अधिकारी आलोक चौबे को दोषी पाया गया है। उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया है। दंडात्मक कार्रवाई निदेशालय स्तर से की जानी है। इसके लिए प्रकरण निदेशालय भेजा गया है। - गीता सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी