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नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले देशभक्त नहीं- यतींद्रानंद गिरि

Thu, 02 Jan 2020 08:26 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 02 Jan 2020 08:26 PM IST
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Not patriots opposing the Citizenship Amendment Act - Yatindranand Giri
महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि - फोटो : अमर उजाला
हरदोई में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि जिसके मन में चोर है या देश में घुसकर रह रहा है और कुछ गलत करने की सोच रखता है, वही नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहा है। बाल विद्या भवन में पहुंचे जूना अखाड़ा के स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने प्रेसवार्ता के दौरान उक्त बात कही। 
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उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले देशभक्त नहीं हो सकते। साथ ही साथ वह देश का नागरिक भी नहीं हो सकता। उन्होंने राजनीतिक दलों से कहा कि वह इस मुद्दे पर राजनैतिक रोटी न सेकें। कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी व प्रियंका वाड्रा की बातों का समाज पर अब कोई प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि उसका मजाक उड़ाया जाता है।
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देश की जनता अब इतनी बुद्धिजीवी है जो अपना भला बुरा खुद समझती है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है, जो इस देश में पैदा हुआ है, वह देश का नागरिक है। राजनीतिक कारणों से अल्प जानकारी वाले नागरिकों को बहलाया फुसलाया जा रहा है। उन्होंने समाज को एकजुट रहकर देश का विकास करने का संदेश दिया। इस मौके पर जीवनदीप सत्संग मंडल अध्यक्ष कीर्ति सिंह मौजूद रहीं।
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क्या है नागरिकता संशोधन कानून

नागरिकता संशोधन कानून पर देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार इस पर कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं है। लोकसभा और राज्यसभा में बिल पास होने के बार राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही नागरिकता संशोधन विधेयक ने कानून की शक्ल ले लीइस कानून से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता खुल गया है। मगर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। इसके बावजूद देशवासियों के मन में इस कानून को लेकर कई सारे सवाल हैं। यहां हम आपको इससे जुड़े हर सवाल का जवाब दे रहे हैं...


31 दिसंबर, 2014 या उससे पहले भारत आने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धर्मों के अल्पसंख्यकों को घुसपैठिया नहीं माना जाएगा। नागरिकता अधिनियम, 1955 अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित करता है।


इसके तहत अवैध प्रवासी वह है:
जिसने वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ों के बिना भारत में प्रवेश किया हो।
जो अपने निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक भारत में रहता है।
इस लाभ को देने के लिए विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट अधिनियम, 1920 के तहत भी छूट देनी होगी ।
वर्ष 1920 का अधिनियम विदेशियों को अपने साथ पासपोर्ट रखने के लिये बाध्य करता है।
1946 का अधिनियम भारत में विदेशियों के आने-जाने को नियंत्रित करता है।

कानून में इन देशों और धर्मों का जिक्र
अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को मिलेगा लाभ।
इन देशों के छह धर्म के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता खुला।  
ये छह धर्म हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी हैं।

इन शर्तों को पूरा करना होगा 
जिस तारीख से आवेदन करना है, उससे पहले 12 महीनों से भारत में रहना होगा।
कम से कम छह साल भारत में बिताना जरूरी।

इन राज्यों में कानून लागू नहीं
संविधान की छठी अनुसूची में शामिल राज्य व आदिवासी क्षेत्रों में नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा। ये प्रावधान बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत अधिसूचित ‘इनर लाइन’ क्षेत्रों पर भी लागू नहीं होंगे।

असम : कारबी आंगलोंग जिला, बोडोलैंड, नार्थ चाछर हिल्स जिला 
मेघालय : खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और गारो हिल्स जिले 
मेघालय में सिर्फ शिलॉन्ग को छोड़कर बाकी क्षेत्रों में कानून लागू नहीं होगा
त्रिपुरा के आदिवासी जिले 
मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड 

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