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सेंगुर नदी में नहीं पानी, गड्ढों में डाल रहे शव
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पुखरायां। सेंगुर नदी में अब शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी पानी नहीं बचा है। नदी के बीच स्थित पानी के गड्ढों में लोग अंतिम संस्कार की क्रिया कर रहे हैं। वर्तमान में नदी के तट पर करीब 25 से 30 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं।
कई शवों को इन गड्ढों में लोग प्रवाहित करने के साथ ही अधजले शवों के अवशेष भी डाल जा रहे हैं। जो नजदीकी गांवों के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ हैं। जिनसे उठने वाली दुर्गंध लोगों को परेशान कर रही है। इससे बीमारी फैलने का भी खतरा बना हुआ है।
कोरोना संक्रमण और बीमारियों के चलते लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। भोगनीपुर क्षेत्र के दुर्वासा आश्रम के सेंगुर नदी घाट पर आम दिनों में जहां पांच से छह शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था। वहीं अब हर रोज करीब 25 से 30 शवों का क्रियाकर्म किया जा रहा है। वहीं सेंगुर नदी में पानी नहीं होने से समस्या और भी विकराल हो गई है।
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लोग नदी में बने गड्ढों में भरे पानी में ही शव प्रवाहित करने के साथ अधजले शव के अवशेष डालकर चले जाते हैं। नदी के इस पार भोगनीपुर क्षेत्र के महोलिया गांव के चंद्रिका प्रसाद, नवाब सिंह, रामू, अजय, वहीं उस पार अकबरपुर क्षेत्र के तोड़ा मोहम्मदपुर गांव के मजरा गदाईखेड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि नदी में बने गड्ढों में शवों के पड़े होने से दुर्गंध आती है।
बच्चों को नदी की तरफ जाने से रोकना पड़ता है। रात में जंगली जानवर और कुत्ते शवों को घसीट कर गांव के किनारे तक ले आते हैं। मवेशी उन्हीं गड्ढों में जाकर पानी पीते हैं। इससे और भी बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में यदि पानी का प्रवाह होता रहे तो राहत मिल सकती है। या फिर शवों के निस्तारण के लिए दूसरे कोई इंतजाम किए जाएं।
गांव के लोगों ने बताया कि जिला अस्पताल के अलावा अन्य चिकित्सालय से आने वाले शवों का अंतिम संस्कार इसी घाट पर किया जा रहा है। इसके अलावा आसपास स्थित गांवों व दूसरे क्षेत्र के लोग भी यहीं पर शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंच रहे हैं। इससे इस घाट पर हर रोज करीब 25 से 30 शव अंतिम संस्कार के लिए आ रहे हैं।
इनमें से कई शवों को इन्हीं पानी के गड्ढों में प्रवाहित कर दिया जाता है। इसके साथ ही अधजले शवों के अवशेष को भी लोग इन्हीं गड्ढों में डालकर चले जाते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नदी में पानी छोड़ने की मांग की है।
इसके साथ ही जो शव नदी के गड्ढों मे पड़े हैं उनके निस्तारण का विकल्प निकालने को कहा है। एसडीएम दीपाली भार्गव ने बताया कि नदी में शव नहीं पड़े मिले। वहीं पास में एक फैक्ट्री बनी है। जिसकी दुर्गंध दूर तक जा रही है। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
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कई शवों को इन गड्ढों में लोग प्रवाहित करने के साथ ही अधजले शवों के अवशेष भी डाल जा रहे हैं। जो नजदीकी गांवों के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ हैं। जिनसे उठने वाली दुर्गंध लोगों को परेशान कर रही है। इससे बीमारी फैलने का भी खतरा बना हुआ है।
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कोरोना संक्रमण और बीमारियों के चलते लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। भोगनीपुर क्षेत्र के दुर्वासा आश्रम के सेंगुर नदी घाट पर आम दिनों में जहां पांच से छह शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था। वहीं अब हर रोज करीब 25 से 30 शवों का क्रियाकर्म किया जा रहा है। वहीं सेंगुर नदी में पानी नहीं होने से समस्या और भी विकराल हो गई है।
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लोग नदी में बने गड्ढों में भरे पानी में ही शव प्रवाहित करने के साथ अधजले शव के अवशेष डालकर चले जाते हैं। नदी के इस पार भोगनीपुर क्षेत्र के महोलिया गांव के चंद्रिका प्रसाद, नवाब सिंह, रामू, अजय, वहीं उस पार अकबरपुर क्षेत्र के तोड़ा मोहम्मदपुर गांव के मजरा गदाईखेड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि नदी में बने गड्ढों में शवों के पड़े होने से दुर्गंध आती है।
बच्चों को नदी की तरफ जाने से रोकना पड़ता है। रात में जंगली जानवर और कुत्ते शवों को घसीट कर गांव के किनारे तक ले आते हैं। मवेशी उन्हीं गड्ढों में जाकर पानी पीते हैं। इससे और भी बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में यदि पानी का प्रवाह होता रहे तो राहत मिल सकती है। या फिर शवों के निस्तारण के लिए दूसरे कोई इंतजाम किए जाएं।
गांव के लोगों ने बताया कि जिला अस्पताल के अलावा अन्य चिकित्सालय से आने वाले शवों का अंतिम संस्कार इसी घाट पर किया जा रहा है। इसके अलावा आसपास स्थित गांवों व दूसरे क्षेत्र के लोग भी यहीं पर शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंच रहे हैं। इससे इस घाट पर हर रोज करीब 25 से 30 शव अंतिम संस्कार के लिए आ रहे हैं।
इनमें से कई शवों को इन्हीं पानी के गड्ढों में प्रवाहित कर दिया जाता है। इसके साथ ही अधजले शवों के अवशेष को भी लोग इन्हीं गड्ढों में डालकर चले जाते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नदी में पानी छोड़ने की मांग की है।
इसके साथ ही जो शव नदी के गड्ढों मे पड़े हैं उनके निस्तारण का विकल्प निकालने को कहा है। एसडीएम दीपाली भार्गव ने बताया कि नदी में शव नहीं पड़े मिले। वहीं पास में एक फैक्ट्री बनी है। जिसकी दुर्गंध दूर तक जा रही है। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।