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बजट से उद्यमियों को हर बार मिली निराशा, 5 साल में कानपुर औद्योगिक विकास की नहीं हुई कोई बड़ी घोषणा
Fri, 05 Jul 2019 10:54 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 05 Jul 2019 10:54 AM IST
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : ANI
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केंद्र सरकार के बीते पांच साल के बजट से कानपुर के उद्यमियों को निराशा हाथ लगी है। उद्यमी छोटे और मझोले उद्योगों के उत्थान के लिए हर बार घोषणाओं की बाट जोहते रहे, लेकिन ऐसी कोई महत्वपूर्ण घोषणा केंद्र सरकार की ओर से नहीं हुई।
कानपुर के आईआईए और पीआईए जैसे संगठनों की ओर से सौंपी गईं सिफारिशों को भी बजट में शामिल नहीं किया गया। बीमार एमएसएमई इकाइयों के पुनर्वास के लिए जारी आरबीआई के दिशा निर्देश जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो सके।
इसके सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों से 25 फीसदी अनिवार्य खरीद की व्यवस्था भी पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतरी। 2017-18 में 50 से 250 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को 30 के बजाय 25 फीसदी कारपोरेट टैक्स के दायरे में लाने से भी शहर के उद्यमियों को बहुत राहत नहीं मिली।
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कानपुर के आईआईए और पीआईए जैसे संगठनों की ओर से सौंपी गईं सिफारिशों को भी बजट में शामिल नहीं किया गया। बीमार एमएसएमई इकाइयों के पुनर्वास के लिए जारी आरबीआई के दिशा निर्देश जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो सके।
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इसके सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों से 25 फीसदी अनिवार्य खरीद की व्यवस्था भी पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतरी। 2017-18 में 50 से 250 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को 30 के बजाय 25 फीसदी कारपोरेट टैक्स के दायरे में लाने से भी शहर के उद्यमियों को बहुत राहत नहीं मिली।
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इससे राहत मिली
59 मिनट में एक करोड़ रुपये तक के ऋण स्वीकृति वाली घोषणा से उद्यमियों को मामूली राहत मिली है।
आम जनता को मिली थी राहत
चुनाव से पूर्व ढाई से पांच लाख रुपये तक की आय पर पांच फीसदी टैक्स को शून्य किए जाने से शहर की करीब 10 लाख आबादी को लाभ मिला। इसमें आम नौकरी पेशा लोग, छोटे व्यापारी व सेवा प्रदाता शामिल रहे।
59 मिनट में एक करोड़ रुपये तक के ऋण स्वीकृति वाली घोषणा से उद्यमियों को मामूली राहत मिली है।
आम जनता को मिली थी राहत
चुनाव से पूर्व ढाई से पांच लाख रुपये तक की आय पर पांच फीसदी टैक्स को शून्य किए जाने से शहर की करीब 10 लाख आबादी को लाभ मिला। इसमें आम नौकरी पेशा लोग, छोटे व्यापारी व सेवा प्रदाता शामिल रहे।