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निर्जला एकादशी व्रत: इन चीजों का दान बेहद फलदायी, ये परंपरा भी जान लें
Thu, 13 Jun 2019 01:19 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 13 Jun 2019 01:19 PM IST
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निर्जला एकादशी
- फोटो : सोशल मीडिया
सनातन परंपरा में रखे जाने वाले व्रतों में निर्जला एकादशी का व्रत सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है। आज निर्जला एकादशी व्रत पड़ रहा है, जबकि प्रदोष व्रत शुक्रवार यानी 14 जून को है। निर्जला एकादशी में पानी भरकर सुराही, हाथ का पंखा, पेठा आदि देने की परंपरा है।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत व अनुष्ठान फलदायी होता है। इस दिन किए गए पूजन व दान पुण्य से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सभी एकादशी व्रत में निर्जला एकादशी सबसे कठिन माना गया है।
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ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत व अनुष्ठान फलदायी होता है। इस दिन किए गए पूजन व दान पुण्य से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सभी एकादशी व्रत में निर्जला एकादशी सबसे कठिन माना गया है।
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यदि आप वर्षभर की 24 एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं तो इस व्रत को करने मात्र से सारा पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य मनोज कुमार द्विवेदी और आचार्य दीपक पांडेय का कहना है कि इस व्रत के बारे में महर्षि वेदव्यास ने भीम को बताया था। एकादशी का यह उपवास निर्जला रहकर करना होता है।
इसलिए इसे रखना कठिन है क्योंकि एक तो इसमें पानी तक पीने की मनाही होती है। दूसरा एकादशी के उपवास को द्वादशी के दिन सूर्योदय के पश्चात खोला जाता है। अत: इसकी समयावधि काफी लंबी होती है।
इसलिए इसे रखना कठिन है क्योंकि एक तो इसमें पानी तक पीने की मनाही होती है। दूसरा एकादशी के उपवास को द्वादशी के दिन सूर्योदय के पश्चात खोला जाता है। अत: इसकी समयावधि काफी लंबी होती है।
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निर्जला एकादशी व्रत में करें
- भगवान विष्णु की पूजा
- माता-पिता और गुरु का चरण स्पर्श
- श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
- श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ
- धार्मिक पुस्तक का दान
- श्रीकृष्ण की उपासना
- घर की छत पर पानी से भरा पात्र अवश्य रखें
- किसी भी स्थिति में पाप न करें।
- भगवान विष्णु की पूजा
- माता-पिता और गुरु का चरण स्पर्श
- श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
- श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ
- धार्मिक पुस्तक का दान
- श्रीकृष्ण की उपासना
- घर की छत पर पानी से भरा पात्र अवश्य रखें
- किसी भी स्थिति में पाप न करें।