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जुलाई में पेश होने वाले बजट से पहले कपड़ा कमेटी ने रखी कई मांगें, वित्त मंत्री को भेजा पत्र
Tue, 18 Jun 2019 03:33 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 18 Jun 2019 03:33 PM IST
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : सोशल मीडिया
कानपुर कपड़ा कमेटी ने जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट से पूर्व वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को संगठन की कुछ मांगें भेजी हैं। कमेटी ने व्यापारी वर्ग और आम आदमी से जुड़ी इन मांगों को पूरा करने का आग्रह किया है।
संगठन के अध्यक्ष काशी प्रसाद शर्मा, प्रधान सचिव लक्ष्मण सहगल, आयकर उप समिति के संयोजक सत्यनारायण सिंहानिया ने पत्र भेजकर मांग उठाई है कि आयकर देने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पांच लाख रुपये का बीमा सरकार की ओर से कराया जाए। इसके अलावा व्यक्तिगत आयकर की छूट सीमा पांच लाख रुपये की जाए।
कर की दरें तीन के बजाय दो श्रेणियों में निर्धारित की जाएं। पांच से 10 लाख आय पर 10 फीसदी, 10 लाख से अधिक आय पर 20 फीसदी टैक्स की दर निर्धारित हो। संगठन ने लिखा है कि धारा 194ए में बैंक ब्याज में टीडीएस काटने के लिए 40 हजार सीमा है। अन्य ब्याज पर पांच हजार से अधिक पर 10 फीसदी टैक्स काटा जाता है।
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इसी तरह धारा 194एच में 15 हजार से अधिक कमीशन पर पांच फीसदी टीडीएस काटा जाता है। इस असमानता को दूर करने पर विचार किया जाए। इसी तरह धारा 80सी के अंतर्गत मिलने वाली डेढ़ लाख रुपये की छूट सीमा बढ़ाकर ढाई लाख की जाए। इसके अलावा कमेटी को केंद्रीय प्रत्यक्षकर सलाहकार बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने की भी मांग रखी है।
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संगठन के अध्यक्ष काशी प्रसाद शर्मा, प्रधान सचिव लक्ष्मण सहगल, आयकर उप समिति के संयोजक सत्यनारायण सिंहानिया ने पत्र भेजकर मांग उठाई है कि आयकर देने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पांच लाख रुपये का बीमा सरकार की ओर से कराया जाए। इसके अलावा व्यक्तिगत आयकर की छूट सीमा पांच लाख रुपये की जाए।
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कर की दरें तीन के बजाय दो श्रेणियों में निर्धारित की जाएं। पांच से 10 लाख आय पर 10 फीसदी, 10 लाख से अधिक आय पर 20 फीसदी टैक्स की दर निर्धारित हो। संगठन ने लिखा है कि धारा 194ए में बैंक ब्याज में टीडीएस काटने के लिए 40 हजार सीमा है। अन्य ब्याज पर पांच हजार से अधिक पर 10 फीसदी टैक्स काटा जाता है।
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इसी तरह धारा 194एच में 15 हजार से अधिक कमीशन पर पांच फीसदी टीडीएस काटा जाता है। इस असमानता को दूर करने पर विचार किया जाए। इसी तरह धारा 80सी के अंतर्गत मिलने वाली डेढ़ लाख रुपये की छूट सीमा बढ़ाकर ढाई लाख की जाए। इसके अलावा कमेटी को केंद्रीय प्रत्यक्षकर सलाहकार बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने की भी मांग रखी है।