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ब्रह्मावर्त बैंक के खाताधारकों का अब 'ब्रह्मा ही मालिक', जरूर पढ़ें ये खबर
Tue, 12 Feb 2019 01:04 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 12 Feb 2019 01:04 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कानपुर के ब्रह्मावर्त बैंक का लाइसेंस निरस्त होने के बाद आठ महीने में तीन लिक्विडेटर बदले जा चुके हैं। इस वजह से क्षतिपूर्ति या जमा धन पाने के लिए खाताधारकों की सूची तैयार नहीं हो सकी है। सहकारिता विभाग के काम के तरीके से 20,000 खाताधारकों को करीब 20 करोड़ रुपये उन्हें हाल फिलहाल मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
ब्रह्मावर्त बैंक में अनियमितताओं और खातों के एनपीए होने की वजह से रिजर्व बैंक ने तीन जुलाई 2018 को इसका लाइसेंस निरस्त कर दिया था। रिजर्व बैंक ने सहकारिता विभाग को निर्देशित किया था कि लिक्विडेटर की तैनाती कर खाताधारकों को जमा धन वापस कराने अथवा जमा धन की क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया शुरू कराएं।
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ब्रह्मावर्त बैंक में अनियमितताओं और खातों के एनपीए होने की वजह से रिजर्व बैंक ने तीन जुलाई 2018 को इसका लाइसेंस निरस्त कर दिया था। रिजर्व बैंक ने सहकारिता विभाग को निर्देशित किया था कि लिक्विडेटर की तैनाती कर खाताधारकों को जमा धन वापस कराने अथवा जमा धन की क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया शुरू कराएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
आठ जुलाई को सहकारिता विभाग की ओर से अपर जिला सहकारी अधिकारी (एडीसीओ) राकेश कुमार को लिक्विडेटर नियुक्त किया गया था। इन्होंने दो महीने तक ही अपना काम किया। फिर इनका ट्रांसफर बांदा कर दिया गया।
राकेश कुमार के जाने के बाद किसी अन्य अधिकारी को लिक्विडेटर नियुक्त किया गया। ये पांच महीने में भी खाताधारकों की सूची तैयार नहीं कर पाए। फरवरी में इनका भी ट्रांसफर कर दिया गया। अब अपर निदेशक सहकारिता अंसल कुमार को इसी सप्ताह लिक्विडेटर बनाया गया है। यानी आठ महीने में तीन बार लिक्विडेटर बदल चुके हैं। इस वजह से सूची बनाने का काम जहां का तहां ठहरा है।
राकेश कुमार के जाने के बाद किसी अन्य अधिकारी को लिक्विडेटर नियुक्त किया गया। ये पांच महीने में भी खाताधारकों की सूची तैयार नहीं कर पाए। फरवरी में इनका भी ट्रांसफर कर दिया गया। अब अपर निदेशक सहकारिता अंसल कुमार को इसी सप्ताह लिक्विडेटर बनाया गया है। यानी आठ महीने में तीन बार लिक्विडेटर बदल चुके हैं। इस वजह से सूची बनाने का काम जहां का तहां ठहरा है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
एजेंट नहीं दे रहे भाव
सहकारिता विभाग से कोई स्पष्ट जवाब न मिलने पर खाताधारक अपने एजेंटों को फोन कर रहे हैं। बताते हैं कि बैंक बंद होने के बाद से एजेंटों ने भी अपने फोन नंबर बदल लिए हैं।
एजेंटों को इस बात का भय है कि खाताधारक धन वापसी के लिए उन पर दबाव बनाएंगे। एक एजेंट ने तो यहां तक कहा कि जमा धन डूबने के पीछे खाताधारक उन्हीं को दोषी मान रहे हैं।
सहकारिता विभाग से कोई स्पष्ट जवाब न मिलने पर खाताधारक अपने एजेंटों को फोन कर रहे हैं। बताते हैं कि बैंक बंद होने के बाद से एजेंटों ने भी अपने फोन नंबर बदल लिए हैं।
एजेंटों को इस बात का भय है कि खाताधारक धन वापसी के लिए उन पर दबाव बनाएंगे। एक एजेंट ने तो यहां तक कहा कि जमा धन डूबने के पीछे खाताधारक उन्हीं को दोषी मान रहे हैं।
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अभी लगेगा लंबा वक्त
सहकारिता विभाग के सूत्र बताते हैं कि अभी सूची बनने में ही दो से तीन महीने लगेंगे। फिर उस सूची का ऑडिट होगा। ऑडिट रिपोर्ट के साथ ही सहकारिता विभाग डिपाजिट इंश्योरेंस क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन (डीआइसीजीसी) मुंबई में क्षतिपूर्ति का दावा करेगा।
दावे के बाद डीआइसीजीसी अपनी जांच करेगा। इसके बाद ही क्षतिपूर्ति रकम स्वीकार होगी। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कोऑपोरेशन एक्ट के तहत बैंक के खाताधारकों की जमा पूंजी को उसके जमा के अनुपात में अधिकतम एक लाख रुपये तक का भुगतान किए जाने का प्रावधान है।
सहकारिता विभाग के सूत्र बताते हैं कि अभी सूची बनने में ही दो से तीन महीने लगेंगे। फिर उस सूची का ऑडिट होगा। ऑडिट रिपोर्ट के साथ ही सहकारिता विभाग डिपाजिट इंश्योरेंस क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन (डीआइसीजीसी) मुंबई में क्षतिपूर्ति का दावा करेगा।
दावे के बाद डीआइसीजीसी अपनी जांच करेगा। इसके बाद ही क्षतिपूर्ति रकम स्वीकार होगी। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कोऑपोरेशन एक्ट के तहत बैंक के खाताधारकों की जमा पूंजी को उसके जमा के अनुपात में अधिकतम एक लाख रुपये तक का भुगतान किए जाने का प्रावधान है।