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अवैध खनन का खेल: इतना खोदा कि खेत बने खाई और तालाब
Sat, 13 Jul 2019 11:40 AM IST
शिखा पांडेय
वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर
वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 13 Jul 2019 11:40 AM IST
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अवैध खनन का खेल
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर समेत आसपास के जिलों में अवैध रूप से मिट्टी का खनन किसानों की कमर तोड़ रहा है। अवैध खनन के खिलाफ शासन की सख्ती यहां बेमानी ही लगती है। माफिया ने चार फीट के समझौते पर चालीस फीट तक मिट्टी का खनन कर खेतों को तालाब बना दिया है।
बारिश का पानी भरने से ये गड्ढे जानलेवा हो गए हैं। किसान इसकी शिकायत करते हैं तो माफिया उन्हें जान से मारने की धमकी देते हैं। उनकी बेबसी तब और बढ़ जाती है, जब जिम्मेदार अफसर भी कार्रवाई के बजाय हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाते हैं।
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बारिश का पानी भरने से ये गड्ढे जानलेवा हो गए हैं। किसान इसकी शिकायत करते हैं तो माफिया उन्हें जान से मारने की धमकी देते हैं। उनकी बेबसी तब और बढ़ जाती है, जब जिम्मेदार अफसर भी कार्रवाई के बजाय हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाते हैं।
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पिछले कई सालों से बिल्हौर और बिठूर क्षेत्र में आने वाले गांवों टिक्कनपुरवा, चौधरीपुर, बरहट बांगर में मिट्टी का अवैध खनन चल रहा है। सबसे ज्यादा खनन बरहट बांगर में हुआ है। यहां एक ही स्थान पर 20 से 40 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। खनन माफिया ने साठगांठ कर किसानों के सैकड़ों बीघे खेत खोद डाले हैं।
नियम यह है कि जिन किसानों के खेतों में मिट्टी ज्यादा जमा होती है, वे खेती के लिए उसे हटवाते हैं। इसके लिए बाकायदा एक सहमति पत्र बनता है। इसमें यह उल्लेख किया जाता है कि मिट्टी कितनी खोदी जानी है। यह खेत के आकार और मिट्टी पर भी निर्भर करता है, लेकिन खनन माफिया की दबंगई के आगे कई बार किसान भी बेबस हो जाते हैं। खनन माफिया खुलेआम चार की जगह, चालीस फीट तक मिट्टी खोदते हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता। खनन माफियाओं की सबसे साठगांठ है।
नियम यह है कि जिन किसानों के खेतों में मिट्टी ज्यादा जमा होती है, वे खेती के लिए उसे हटवाते हैं। इसके लिए बाकायदा एक सहमति पत्र बनता है। इसमें यह उल्लेख किया जाता है कि मिट्टी कितनी खोदी जानी है। यह खेत के आकार और मिट्टी पर भी निर्भर करता है, लेकिन खनन माफिया की दबंगई के आगे कई बार किसान भी बेबस हो जाते हैं। खनन माफिया खुलेआम चार की जगह, चालीस फीट तक मिट्टी खोदते हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता। खनन माफियाओं की सबसे साठगांठ है।
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विरोध पर मिली धमकी, खेती भी गई
रिक्खीपुरवा निवासी किसान राम खिलावन यादव और सियाराम ने बताया कि उन्होंने वर्ष-2017 में दो बीघा जमीन से मिट्टी हटाने के लिए सिंहपुर में रहने वाले खनन माफिया से करार किया था। माफिया ने उनसे छह फीट मिट्टी निकालने का करार किया था, लेकिन 10 फीट मिट्टी खोद डाली। उन्होंने इसका विरोध किया, तो खनन माफिया के गुर्गों ने जान से मारने की धमकी दी।
इस बात की शिकायत थाने से लेकर तहसील दिवस तक में की, लेेकिन कोई कार्रवाई नही हुई। दोनों किसानों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा मिट्टी निकालने से उनके खेत की उर्वरा शक्ति खत्म हो गई है। दो वर्षों से वह खेती नही कर पा रहे हैं। जबकि उनके खेत में गेहूं, जौ और मक्के की अच्छी खेती होती थी। अब दोबारा खेतिहर जमीन बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
रिक्खीपुरवा निवासी किसान राम खिलावन यादव और सियाराम ने बताया कि उन्होंने वर्ष-2017 में दो बीघा जमीन से मिट्टी हटाने के लिए सिंहपुर में रहने वाले खनन माफिया से करार किया था। माफिया ने उनसे छह फीट मिट्टी निकालने का करार किया था, लेकिन 10 फीट मिट्टी खोद डाली। उन्होंने इसका विरोध किया, तो खनन माफिया के गुर्गों ने जान से मारने की धमकी दी।
इस बात की शिकायत थाने से लेकर तहसील दिवस तक में की, लेेकिन कोई कार्रवाई नही हुई। दोनों किसानों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा मिट्टी निकालने से उनके खेत की उर्वरा शक्ति खत्म हो गई है। दो वर्षों से वह खेती नही कर पा रहे हैं। जबकि उनके खेत में गेहूं, जौ और मक्के की अच्छी खेती होती थी। अब दोबारा खेतिहर जमीन बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे।