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Kanpur News: नई सरसों बचाएगी दिल, बनेगी घी का विकल्प
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कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्यौगिकी विवि की सरसों की नई प्रजाति आजाद चेतना दिल को सुरक्षा देगी। साथ ही घी का विकल्प बनेगी। आजाद चेतना सरसों के तेल का शुद्ध रूप में इस्तेमाल करने से हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्राल का जमाव कम होगा जिससे ब्लॉकेज का खतरा नहीं रहेगा। इसके साथ ही शरीर की नसों का संकरेपन से बचाव होगा। साथ ही इसकी खली और चारा घरेलू पशुओं का पौष्टिक भोजन बनेगा।
आजाद चेतना प्रजाति 10 सालों की मशक्कत से 12 प्रजातियों को मिलाकर तैयार की गई है। मास सेलेक्शन चेन विधि से इसे तैयार किया गया। इसी वजह से इसमें ओमेगा-3 और छह, फैटी एसिड समेत दूसरे पौष्टिक तत्व हैं। इसे तैयार करने वाले अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन के प्रोफेसर और तिलहन विभागाध्यक्ष डॉ. महक सिंह कहते हैं कि इसके शुद्ध तेल के इस्तेमाल से धमनियों का जमाव से बचाव होगा। यह घी का बेहतरीन विकल्प है। मनुष्य और पशुओं दोनों के लिए पौष्टिक आहार के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
इस समय घी-तेल के बने जंक फूड और दूसरे खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल से शरीर में वसा का जमाव अधिक हो रहा है। इससे नसों और धमनियों में कोलेस्ट्राल के जमाव की समस्या बढ़ रही है। स्नायु तंत्र के विभिन्न रोग होने लगते हैं। आजाद चेतना के शुद्ध रूप में इस्तेमाल करने से इन रोगों से बचाव होगा। वसा का जमाव कम होने से मोटापा से भी बचाव होगा। डॉ. सिंह का कहना है कि इस समय 10 फीसदी तेल का इस्तेमाल करने का अभियान भी चल रहा है। ऐसे में आजाद चेतना घी का एक सशक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध है।
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उन्होंने बताया कि पहले इसे यूपी के लिए तैयार किया गया था लेकिन इसके हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली में उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। अब वहां के किसान भी इसका उत्पादन कर सकते हैं। डॉ. सिंह का कहना है कि देश में खाद्य तेल मिशन को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। इसे आलू, मक्का, गन्ना, अलसी, चना आदि के साथ बोया जा सकता है। बुंदेलखंड जैसे इलाकों के लिए भी यह फसल मुफीद है। खेत में अगर हल्की नमी है तो इसकी पैदावार हो सकती है। इसके पौधे जल्दी नहीं मरते।
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आजाद चेतना प्रजाति 10 सालों की मशक्कत से 12 प्रजातियों को मिलाकर तैयार की गई है। मास सेलेक्शन चेन विधि से इसे तैयार किया गया। इसी वजह से इसमें ओमेगा-3 और छह, फैटी एसिड समेत दूसरे पौष्टिक तत्व हैं। इसे तैयार करने वाले अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन के प्रोफेसर और तिलहन विभागाध्यक्ष डॉ. महक सिंह कहते हैं कि इसके शुद्ध तेल के इस्तेमाल से धमनियों का जमाव से बचाव होगा। यह घी का बेहतरीन विकल्प है। मनुष्य और पशुओं दोनों के लिए पौष्टिक आहार के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
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इस समय घी-तेल के बने जंक फूड और दूसरे खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल से शरीर में वसा का जमाव अधिक हो रहा है। इससे नसों और धमनियों में कोलेस्ट्राल के जमाव की समस्या बढ़ रही है। स्नायु तंत्र के विभिन्न रोग होने लगते हैं। आजाद चेतना के शुद्ध रूप में इस्तेमाल करने से इन रोगों से बचाव होगा। वसा का जमाव कम होने से मोटापा से भी बचाव होगा। डॉ. सिंह का कहना है कि इस समय 10 फीसदी तेल का इस्तेमाल करने का अभियान भी चल रहा है। ऐसे में आजाद चेतना घी का एक सशक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध है।
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उन्होंने बताया कि पहले इसे यूपी के लिए तैयार किया गया था लेकिन इसके हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली में उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। अब वहां के किसान भी इसका उत्पादन कर सकते हैं। डॉ. सिंह का कहना है कि देश में खाद्य तेल मिशन को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। इसे आलू, मक्का, गन्ना, अलसी, चना आदि के साथ बोया जा सकता है। बुंदेलखंड जैसे इलाकों के लिए भी यह फसल मुफीद है। खेत में अगर हल्की नमी है तो इसकी पैदावार हो सकती है। इसके पौधे जल्दी नहीं मरते।