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गेटः शहर की नेहा नार्थ रीजन की टॉपर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2016 01:36 AM IST
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छात्रा नेहा दीक्षित अपने पिता अजय दीक्षित, माँ सविता व दादी विमला दीक्षित के साथ खुशी मनाती हुई।
- फोटो : amar ujala
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ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) में कानपुर की नेहा दीक्षित ने नार्थ रीजन में टॉप किया है। रोडवेज के विकास नगर डिपो में सहायक यातायात निरीक्षक अजय दीक्षित की बेटी नेहा ने पहले ही प्रयास में गेट में इतनी शानदार सफलता हासिल की है। दावा है कि नेहा लड़कियों के आल इंडिया रैंक में पहले स्थान पर हैं। शुक्रवार देर रात गेट के साथ ही सीएसआईआर नेट का भी रिजल्ट घोषित हुआ। दोनों में कानपुर के कई प्रतिभागियों को सफलता मिली है।
इस बार भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलुरू ने गेट का आयोजन किया था। सुभाष स्मारक कन्या इंटर कॉलेज से हिंदी माध्यम से इंटरमीडिएट करने वाली नेहा दीक्षित ने रामा इंजीनियरिंग कॉलेज से 2015 में बीटेक किया। नेहा बायो टेक्नोलॉजी में पीएचडी कर साइंटिस्ट बनने की इच्छा रखती हैं। नेहा ने बताया कि वह रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई करती है। जनवरी 2016 में तकरीबन नौ दिन चले गेट के ऑनलाइन एग्जाम में ही उसे लगने लगा था कि वह अच्छी रैंक हासिल करेगी।
नेहा ने कहा कि त्रयंबक लाइफ साइंसेज के आशीष द्विवेदी के मार्गदर्शन और भाई रामजी दीक्षित के प्रोत्साहन से यह संभव हो सका है। रामजी दीक्षित एचबीटीआई से बीटेक करने के बाद आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग में एमटेक कर रहे हैं। नेहा की सफलता पर पिता, दादी विमला दीक्षित, मां सविता दीक्षित बेहद खुश हैं। नेहा पढ़ाई में हमेशा टॉपर रही है। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के बोर्ड एग्जाम में नेहा ने साउथ सिटी में टॉप किया था।
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पिता अजय दीक्षित ने कहा कि उन्होंने बेटे-बेटी में कभी फर्क नहीं किया। दोनों इंजीनियर बनना चाहते थे। आज बेटी ने उनका नाम रोशन कर दिया। बता दें कि गेट स्कोर कार्ड तीन साल तक वैलिड रहता है। इसके आधार पर प्राइवेट कंपनियां सीधे सेलेक्शन करती हैं। आईआईटी के एमटेक, पीएचडी में तो सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर ही एडमिशन मिल जाता है। नेहा के अलावा गेट में शहर की स्वाति गुप्ता, सुखवीर सिंह, राघवेंद्र सिंह, सना कौशर को भी सफलता मिली।
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इस बार भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलुरू ने गेट का आयोजन किया था। सुभाष स्मारक कन्या इंटर कॉलेज से हिंदी माध्यम से इंटरमीडिएट करने वाली नेहा दीक्षित ने रामा इंजीनियरिंग कॉलेज से 2015 में बीटेक किया। नेहा बायो टेक्नोलॉजी में पीएचडी कर साइंटिस्ट बनने की इच्छा रखती हैं। नेहा ने बताया कि वह रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई करती है। जनवरी 2016 में तकरीबन नौ दिन चले गेट के ऑनलाइन एग्जाम में ही उसे लगने लगा था कि वह अच्छी रैंक हासिल करेगी।
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नेहा ने कहा कि त्रयंबक लाइफ साइंसेज के आशीष द्विवेदी के मार्गदर्शन और भाई रामजी दीक्षित के प्रोत्साहन से यह संभव हो सका है। रामजी दीक्षित एचबीटीआई से बीटेक करने के बाद आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग में एमटेक कर रहे हैं। नेहा की सफलता पर पिता, दादी विमला दीक्षित, मां सविता दीक्षित बेहद खुश हैं। नेहा पढ़ाई में हमेशा टॉपर रही है। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के बोर्ड एग्जाम में नेहा ने साउथ सिटी में टॉप किया था।
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पिता अजय दीक्षित ने कहा कि उन्होंने बेटे-बेटी में कभी फर्क नहीं किया। दोनों इंजीनियर बनना चाहते थे। आज बेटी ने उनका नाम रोशन कर दिया। बता दें कि गेट स्कोर कार्ड तीन साल तक वैलिड रहता है। इसके आधार पर प्राइवेट कंपनियां सीधे सेलेक्शन करती हैं। आईआईटी के एमटेक, पीएचडी में तो सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर ही एडमिशन मिल जाता है। नेहा के अलावा गेट में शहर की स्वाति गुप्ता, सुखवीर सिंह, राघवेंद्र सिंह, सना कौशर को भी सफलता मिली।