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हमीरपुर: सुनवाई में विवेचक की मिली लापरवाही, मुकदमे में अपहरण व पाक्सो एक्ट के साथ नहीं बढ़ाई दुष्कर्म की धारा

Thu, 19 Aug 2021 10:36 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 19 Aug 2021 10:36 PM IST
सार

वर्ष 2016 में किशोरी का अपहरण कर जानमाल की धमकी देने और पाक्सो एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें जालौन जिले के थाना कदौरा के इकौना गांव के श्यामबाई डेरा निवासी जसवंत निषाद आरोपी बनाया गया था।

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negligence of the investigator found in the hearing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

किशोरी से वर्ष 2016 में हुए दुष्कर्म के मामले में तत्कालीन विवेचक ने दर्ज अपहरण व आठ पाक्सो एक्ट के मुकदमे में दुष्कर्म की धारा नहीं बढ़ाई। विवेचक ने मामले की अंतिम रिपोर्ट लगाकर न्यायालय में प्रस्तुत कर दी। अब विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट न्यायालय में मामले की सुनवाई विचाराधीन है।
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इस गंभीर लापरवाही का न्यायाधीश ने संज्ञान लिया। उन्होंने तत्कालीन सीओ सदर गुरुदयाल कटियार के खिलाफ नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा है कि एक माह के अंदर नोटिस का जवाब दें। नोटिस को तामीला कराने के लिए एसपी को एक सप्ताह के भीतर न्यायालय को अवगत कराने को कहा है।
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शहर कोतवाली में वर्ष 2016 में किशोरी का अपहरण कर जानमाल की धमकी देने और पाक्सो एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें जालौन जिले के थाना कदौरा के इकौना गांव के श्यामबाई डेरा निवासी जसवंत निषाद आरोपी बनाया गया था।
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इस मामले का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। मुकदमे के परिशीलन में स्पष्ट हुआ कि शहर के एक मोहल्ला निवासी वादी 16 मई 2016 को दोपहर करीब तीन बजे अपनी पान की दुकान से खाना खाने घर आए। तब घर में उनकी पुत्री नहीं मिली।

इस पर वादी ने 19 मई 2016 को एसपी को तहरीर दी। जिस पर 27 मई को कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। तब तत्कालीन विवेचक दरोगा चंचल कुमार यादव ने विवेचना में आरोपी बनाए गए नसीम व अनिल की नामजदगी गलत पाई और 14 फरवरी 2017 को न्यायालय में जसवंत के खिलाफ अपहरण और पाक्सो एक्ट से संबंधित आरोप पत्र प्रेषित किया।

मुकदमे में न्यायाधीश को विदित हुआ कि दौरान विवेचना पीड़िता ने अपने बयान में खुद तथ्य स्वीकार किए कि घटना की तिथि को वह घर पर अकेली थी। तब जसवंत उसे रसूलपुर से सूरत ले गया। बाद में कानपुर लाकर कोर्ट मैरिज की। वह करीब नौ माह तक जसवंत के साथ रही।

न्यायालय ने कहा आरोपी जसवंत ने विवाह का प्रलोभन देकर शारीरिक संबंध बनाए। मगर विवेचक ने दर्ज मुकदमे में दुष्कर्म की धारा नहीं बढ़ाई जो आपत्तिजनक है। न्यायालय ने कहा इससे प्रतीत होता है कि विवेचक, तत्कालीन कोतवाल अनिल कुमार सिंह व तत्कालीन सीओ सदर रहे गुरुदयाल कटियार ने जानबूझ कर प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने व आरोपी को कठोर दंड से बचाने का प्रयास किया है। न्यायालय ने जारी नोटिस में तत्कालीन सीओ से एक माह के अंदर जवाब मांगा है।
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