रेल मेल डाक सेवा की लापरवाही: छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं गायब होने का मामला, संयुक्त कमेटी ने शुरू की जांच
कानपुर में प्रधान डाकघर के रेल मेल डाक सेवा की बड़ी लापरवाही की सामने आ रही है। दरअसल, यहां आई 200 छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं ही गायब हो गई है। इस मामले में हर कदम पर कर्मचारियों-अफसरों ने लापरवाही बरती है, जिससे छात्रों के भविष्य पर संकट आ गया है। अब कानपुर-प्रयागराज की संयुक्त कमेटी ने जांच शुरू की है।
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कानपुर में दिबियापुर के सैकड़ों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं गायब होने के मामले में संयुक्त कमेटी बनाई गई है। इसमें कानपुर व प्रयागराज मंडल के अफसर शामिल किए गए हैं। उत्तर पुस्तिकाओं को पश्चिम बंगाल के हावड़ा तक ढुंढवाया गया है लेकिन अभी तक इन उत्तर पुस्तिकाओं का पता नहीं चल पाया है। मामला दबा रहे इस लिए विभाग के उच्च अफसरों ने पुलिस या रेलवे पुलिस तक में एफआईआर नहीं दर्ज कराई है।
बता दें कि मामले में हर कदम पर कर्मचारियों-अफसरों ने लापरवाही बरती है। सैकड़ों छात्रों के भविष्य पर संकट हो गया है। पूरा मामला प्रधान डाकघर के रेल मेल डाक सेवा से जुड़ा है। इस मामले में दो बाबूओं को निलंबित किया गया है। सूत्रों ने बताया कि तीन अप्रैल 2022 को दिबियापुर डिग्री कॉलेज के दो सौ से ज्यादा छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय में जांचने के लिए भेजी गई थीं।
यह उत्तर पुस्तिकाएं पूर्वा एक्सप्रेस के जरिए डाक विभाग के कोच के माध्यम से विश्वविद्यालय आनी थी। सूत्रों ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं के साथ दो और बैग थे, जिसमें उत्तर पुस्तिकाएं थीं। वो बैग गायब है, जबकि अन्य दो बैग मिल चुके हैं। इस बैग का भार करीब चार से पांच किलो था। सूत्रों ने बताया कि विभाग के रेल मेल डाक के अधीक्षक एसके गुप्ता और उच्च अफसर पूरा मामला दबाए रहे।
अब मामला खुलने पर संयुक्त कमेटी बनाई गई है। इसमें कानपुर व प्रयागराज मंडल के अफसर शामिल हैं। बताया गया कि एक पूर्वा एक्सप्रेस के चलने के स्थान से लेकर उसके अंतिम स्थान हावड़ा तक उत्तर पुस्तिकाओं को ढूंढा गया है, लेकिन उत्तर पुस्तिकाएं नहीं मिल पाई हैं।
मेल लिस्ट का सत्यापन ही नहीं किया गया
सूत्रों ने बताया कि डाक विभाग के कोच के जरिए जो भी सामान आता है। उसकी एक मेल लिस्ट दी जाती है, जो सामान चढ़ने और उतरने पर मिलाया जाता है। इस पूरे मामले में मेल लिस्ट का भैतिक सत्यापन तक नहीं किया गया। यदि सत्यापन किया गया होता, तो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न होता है।