फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Negligence in investigation to benefit Gyanendra

Kanpur News: ज्ञानेंद्र को लाभ पहुंचाने के लिए विवेचना में बरती लापरवाही

Fri, 26 Sep 2025 05:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Sep 2025 05:03 AM IST
सार

कानपुर में ईशा हत्याकांड में कोर्ट ने पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि अन्य पांच अभियुक्तों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने विवेचना में लापरवाही की भी बात मानी।

विज्ञापन
Negligence in investigation to benefit Gyanendra

विस्तार

कानपुर। ईशा हत्याकांड में अपर जिला जज चतुर्थ शुचि श्रीवास्तव ने बुधवार को पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि बाकी पांच को बरी कर दिया। मुकदमे में ज्ञानेंद्र ने विवेचक द्वारा विभागीय दुर्भावना के चलते गलत तरीके से चार्जशीट दाखिल करने का तर्क रखा था। दूसरी तरफ कोर्ट ने माना कि विवेचक ने विवेचना में घोर लापरवाही बरती। ज्ञानेंद्र को लाभ पहुंचाने की पूरी कोशिश की गई।
विज्ञापन



ज्ञानेंद्र और ईशा के बीच वैवाहिक संबंध थे। ईशा 18 मई से 22 मई तक लापता थी लेकिन ज्ञानेंद्र ने कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि वह खुद भी कोर्ट में समर्पण करने यानि आठ जून तक गायब रहा। ज्ञानेंद्र द्वारा ईशा को मंदिर दर्शन के बहाने घर से ले जाना, परिवार वालों से फोन पर बात करना, महेवा घाट पुल पर ईशा की सिरकटी लाश का मिलना, ज्ञानेंद्र की निशानदेही पर आलाकत्ल की बरामदगी, ईशा को ले जाने में इस्तेमाल की गई कार में मानव रक्त का पाया जाना आदि कड़ियों को जोड़कर कोर्ट ने ज्ञानेंद्र को ईशा की हत्या का दोषी करार दिया।
विज्ञापन


ईशा ज्ञानेंद्र के साथ गई थी इसलिए ज्ञानेंद्र को यह साबित करना था कि ईशा की कब, कहां और कैसे हत्या हुई लेकिन वह साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर कोर्ट ने ज्ञानेंद्र को उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं ईशा की हत्या की साजिश किस स्थान व किस समय बनी, साजिश रचते वक्त वहां कौन-कौन मौजूद था इसका कोई सबूत अभियोजन पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने माना कि सिर्फ ईशा के पर्स या कंगन की बरामदगी से मनीष को हत्या का दोषी नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

विकास के पास से न तो ईशा का कोई सामान बरामद हुआ, न आलाकत्ल जिससे उसके हत्या या सबूत मिटाने में शामिल होने के सबूत मिले। अवंतिका के पास से ईशा के मोबाइल की बरामदगी दिखाई गई। इसके बाद ही एक-एक कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी और घटना के खुलासे की बात कही गई लेकिन सीडीआर नहीं निकलवाई गई। न ही अवंतिका की आवाज की फाॅरेंसिक जांच कराई गई। इससे साबित हो सकता था कि अवंतिका ने ही प्रियंका बनकर ऐश्वर्य को फोन करके ईशा द्वारा दूसरी शादी करने की बात कही थी।


अर्जुन और अवंतिका को कहीं ईशा के साथ देखा भी नहीं गया। न ही दोनों के पास से हत्या में इस्तेमाल किसी हथियार की बरामदगी हुई। अवंतिका और अर्जुन के पास से मोबाइल व कंगन की बरामदगी से उनके हत्या में शामिल होना साबित नहीं होता। आदर्श सविता पर ज्ञानेंद्र को शरण देने का आरोप था लेकिन इसके संबंध में भी अभियोजन कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। इस आधार पर कोर्ट ने मनीष, विकास, अर्जुन, अवंतिका और आदर्श को बरी कर दिया।









विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed