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Kanpur News: लापरवाही ने ली तीन ढोल शावकों की जान, नहीं लगी थी दूसरी रैबीज डोज

Sun, 14 Jun 2026 01:50 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 01:50 AM IST
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Negligence claims lives of three dhole cubs; second rabies dose not administered.
कानपुर। चिड़ियाघर में पांच माह पहले जन्मे जंगली कुत्तों (ढोल) के तीन शावकों की मौत के पीछे वैक्सीनेशन में हुई बड़ी लापरवाही सामने आई है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की जांच रिपोर्ट में तीनों शावकों में रैबीज संक्रमण की पुष्टि हुई है। जांच में यह भी सामने आया कि शावकों को रैबीज वैक्सीन की केवल पहली डोज लगाई गई थी जबकि दूसरी डोज लगाई ही नहीं गई। विशेषज्ञों के अनुसार इससे उनके शरीर में वायरस से लड़ने की पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो सकी जिससे संक्रमण जानलेवा साबित हुआ। शावकों की मौत के बाद चिड़ियाघर प्रशासन अब बाड़ों के आसपास संक्रमणरोधी स्प्रे और चूने का छिड़काव करा रहा है।
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वर्ष 2025 में विशाखापट्टनम से लगाए गए ढोल के एक जोड़े ने जनवरी 2026 में चार शावकों को जन्म दिया था जिनमें दो नर और दो मादा शामिल थे। इनके जन्म के कुछ समय बाद नर ढोल ने अपने एक शावक को मार दिया था जिसके बाद उसे अलग बाड़े में रखा गया। शेष तीनों शावकों को उनकी मां के साथ रखा गया और देखभाल के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम भी तैनात की गई थी।
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मार्च में तीन माह की आयु पूरी होने पर तीनों शावकों को रैबीज वैक्सीन की पहली डोज दी गई थी। नियमानुसार दूसरी डोज अप्रैल में लगनी थी लेकिन किसी कारणवश यह टीकाकरण नहीं कराया गया। इसी दौरान गर्मी बढ़ने पर शावकों ने भोजन कम करना शुरू कर दिया। शुरुआत में इसे सामान्य स्वास्थ्य समस्या मानकर उपचार किया गया लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। मई और जून के दौरान एक-एक कर तीनों शावकों की मौत हो गई।
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मौत का कारण स्पष्ट न होने पर उनके विसरा नमूने जांच के लिए आईवीआरआई भेजे गए थे। हाल ही में आई रिपोर्ट में रैबीज संक्रमण की पुष्टि होने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद प्रशासन ने संक्रमण रोकने के लिए ढोल के बाड़े और आसपास के क्षेत्रों में संक्रमणरोधी स्प्रे तथा कीटनाशकों का छिड़काव शुरू कराया है। साथ ही पूरे क्षेत्र में चूना भी डलवाया जा रहा है ताकि अन्य वन्यजीवों को संक्रमण से बचाया जा सके।




वर्जन

रैबीज की डोज लगाई गई थी फिर भी वे वायरस की चपेट में आ गए। हालांकि अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जंगली कुत्तों के बाड़े में संक्रमणरोधी स्प्रे कराया जा रहा है और पूरे क्षेत्र में चूना भी डलवाया जा रहा है। — फिरोज खान, रेंजर, कानपुर चिड़ियाघर।
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