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देश में 180 वीं रैंक और कानपुर टॉपर पुष्पेश मिश्रा ने बताया डॉक्टर बनकर गांव-गरीबों की सेवा करेंगे
Wed, 05 Jun 2019 10:17 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 05 Jun 2019 10:17 PM IST
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देश में 180 वीं रैंक और सिटी के टॉपर पुष्पेश मिश्रा ने बताई सफलता की कहानी
- फोटो : अमर उजाला
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नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) 2019 के सिटी टॉपर पुष्पेश मिश्रा ने ऑल इंडिया स्तर पर 180वीं रैंक हासिल की है। 17 साल के पुष्पेश का जितना मन बायोलॉजी में लगता है, उतनी ही तेजी से वह मैथ्स के सवाल भी हल कर लेते हैं।
जाजमऊ निवासी पुष्पेश बताते हैं कि इसी के चलते 10वीं तक कंफ्यूज थे कि इंजीनियरिंग करें या मेडिकल। पुष्पेश गांववालों और गरीबों की मदद करना चाहते थे। यही कारण है कि स्कूल टीचर और चचेरे भाई प्रसून ने उन्हें बायोलॉजी से पढ़ाई करने को समझाया और मेडिकल की तैयारी करने के लिए कहा।
पुष्पेश ने सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंड्री स्कूल से इसी साल 12वीं की पढ़ाई पूरी की। बोर्ड परीक्षा में उनके 96.6 प्रतिशत अंक थे जबकि हाईस्कूल में 10 सीजीपीए। पुष्पेश सालभर से केवल नीट की तैयारी में जुटे थे। स्कूल के बाद कोचिंग में सारा समय बीत जाता था।
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बताते हैं कि इस बीच वह फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पर ही पूरा फोकस किए हुए थे। बोर्ड परीक्षा के ठीक 15 दिन पहले अन्य विषयों पर फोकस शुरू किया। सबसे पसंदीदा विषय फिजिक्स है। उन्होंने एम्स एसबीबीएस का एग्जाम भी दिया है। रिजल्ट आने के बाद तय करेंगे कहां एडमिशन लें।
पापा इंजीनियर, शतरंज खेलने में माहिर
पुष्पेश के पिता सुदर्शन कुमार मिश्र लेदर टेक्नोलॉजी के इंजीनियर हैं। मां मृदुला मिश्रा गृहिणी हैं और छोटा भाई करुणेश 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। पुष्पेश बताते हैं कि उन्हें शतरंज खेलना पसंद है। क्रिकेट खेलना भी अच्छा लगता है लेकिन 12वीं में आने के बाद यह छूट गया।
एंबुलेंस की टाइमिंग में सुधार हो, गांवों में सुविधा बढ़े
पुष्पेश कहते हैं कि एंबुलेंस सर्विस की टाइमिंग में सुधार होना चाहिए। कई बार मरीज को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता है जिसके चलते वह मर जाते हैं। गांव के अस्पतालों में भी सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए तभी डॉक्टर भी वहां रहकर लोगों की सेवा कर सकेगा।
सफलता के टिप्स
- पढ़ाई रेगुलर करनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि पांच दिन पढ़े और फिर ब्रेक करने के चक्कर में चार दिन पढ़ाई ही छोड़ दी।
- जो पढ़ाई करें पूरी ईमानदारी से करें।
- एनसीईआरटी पर फोकस करें।
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जाजमऊ निवासी पुष्पेश बताते हैं कि इसी के चलते 10वीं तक कंफ्यूज थे कि इंजीनियरिंग करें या मेडिकल। पुष्पेश गांववालों और गरीबों की मदद करना चाहते थे। यही कारण है कि स्कूल टीचर और चचेरे भाई प्रसून ने उन्हें बायोलॉजी से पढ़ाई करने को समझाया और मेडिकल की तैयारी करने के लिए कहा।
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पुष्पेश ने सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंड्री स्कूल से इसी साल 12वीं की पढ़ाई पूरी की। बोर्ड परीक्षा में उनके 96.6 प्रतिशत अंक थे जबकि हाईस्कूल में 10 सीजीपीए। पुष्पेश सालभर से केवल नीट की तैयारी में जुटे थे। स्कूल के बाद कोचिंग में सारा समय बीत जाता था।
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बताते हैं कि इस बीच वह फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पर ही पूरा फोकस किए हुए थे। बोर्ड परीक्षा के ठीक 15 दिन पहले अन्य विषयों पर फोकस शुरू किया। सबसे पसंदीदा विषय फिजिक्स है। उन्होंने एम्स एसबीबीएस का एग्जाम भी दिया है। रिजल्ट आने के बाद तय करेंगे कहां एडमिशन लें।
पापा इंजीनियर, शतरंज खेलने में माहिर
पुष्पेश के पिता सुदर्शन कुमार मिश्र लेदर टेक्नोलॉजी के इंजीनियर हैं। मां मृदुला मिश्रा गृहिणी हैं और छोटा भाई करुणेश 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। पुष्पेश बताते हैं कि उन्हें शतरंज खेलना पसंद है। क्रिकेट खेलना भी अच्छा लगता है लेकिन 12वीं में आने के बाद यह छूट गया।
एंबुलेंस की टाइमिंग में सुधार हो, गांवों में सुविधा बढ़े
पुष्पेश कहते हैं कि एंबुलेंस सर्विस की टाइमिंग में सुधार होना चाहिए। कई बार मरीज को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता है जिसके चलते वह मर जाते हैं। गांव के अस्पतालों में भी सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए तभी डॉक्टर भी वहां रहकर लोगों की सेवा कर सकेगा।
सफलता के टिप्स
- पढ़ाई रेगुलर करनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि पांच दिन पढ़े और फिर ब्रेक करने के चक्कर में चार दिन पढ़ाई ही छोड़ दी।
- जो पढ़ाई करें पूरी ईमानदारी से करें।
- एनसीईआरटी पर फोकस करें।