{"_id":"5d3a2ded8ebc3e6ca8682c4b","slug":"ncr-contractors-and-city-s-mining-have-coccus","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनसीआर के ठेकेदारों और शहर के खनन माफिया का है गठजोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनसीआर के ठेकेदारों और शहर के खनन माफिया का है गठजोड़
Fri, 26 Jul 2019 04:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सूरज शुक्ला, कानपुर
सूरज शुक्ला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 26 Jul 2019 04:02 AM IST
विज्ञापन
खनन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के खनन माफिया एनसीआर (पश्चिम यूपी) के ठेकेदारों के इशारों पर खनन करवा रहे हैं। इसके बदले में खनन माफिया को लाखों रुपये पहुंच रहे हैं। चौबेपुर, बिठूर, बिधनू, महाराजपुर और नर्वल में हो रहे अवैध खनन में पश्चिम यूपी के दो बड़े ठेकेदारों के नाम सामने आए हैं। यह गठजोड़ करीब छह-सात वर्षों से सक्रिय है।
विज्ञापन
खनन माफिया राजन सिंह और ध्यानेंद्र सिंह समेत कई अन्य स्थानीय खनन माफिया किसानों को पैसों का लालच देकर जाल में फांसकर सौदा करते हैं। इस बीच अवैध खनन के खेल में दो बड़े ठेकेदार गाजियाबाद निवासी अभिषेक और मेरठ निवासी मनोज का नाम भी सामने आ गया। दोनों ठेकेदार सीधे खनन माफिया से मिट्टी का सौदा करते हैं। बड़े प्रशासनिक अधिकारियों ने अब ठेकेदारों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
विज्ञापन
किसानों को फर्जी चेक थमाते थे
किसानों को अभिषेक और मनोज के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। किसानों के मुताबिक दोनों फर्जी चेक और पैसा देने आते थे। वहीं लेखपाल, पुलिस के अलावा खनन माफिया से मिलते थे। जांच में एक एग्रीमेंट पेपर मिला है। इसमें बंगलुरु का पता दर्ज है। प्रशासन व पुलिस इसका सत्यापन करवाएगी। आशंका है कि यह भी फर्जी है।
विज्ञापन
सुरक्षा की गारंटी देते हैं माफिया
शहर के खनन माफिया ठेकेदारों को संरक्षण देने के साथ ही सुरक्षा की भी गारंटी देते हैं। सौदेबाजी करते हैं ठेकेदार की मांग रहती है कि पुलिस व प्रशासन से किसी तरह की उन्हें दिक्कत न हो। यही वजह है कि माफिया और सत्ताधारी नेता खनन के लिए पुलिस व प्रशासन से साठगांठ करते हैं।
एनसीआर पहुंच रही मिट्टी
खनन की मिट्टी का करीब 70 फीसदी हिस्सा एनसीआर भेजा जा रहा है। खनन माफिया ट्रकों को शहर से बाहर पहुंचाने की भी गारंटी लेते हैं। वहीं आगे की जिम्मेदारी ठेकेदारों की होती है। दरअसल, खनन में पश्चिम यूपी के ठेकेदार सामने नहीं आना चाहते।
लेखपाल को है पूरी जानकारी
किसानों ने कहा कि ठेकेदारों के बारे में पूरी जानकारी खनन माफिया के साथ-साथ लेखपालों और स्थानीय पुलिस को भी है। यही वजह है कि एडीएम ने जब दोनों का पता पूछताछ तो लेखपाल ने बताया कि अभिषेक गाजियाबाद का है और मनोज मेरठ का रहने वाला है।