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नवरात्रि विशेषः इन बातों का रखें ध्यान, मां की बरसेगी कृपा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 21 Sep 2017 12:44 PM IST
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मां दुर्गा की मूर्ति खरीदती युवती
- फोटो : अमर उजाला
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इस नवरात्रि में मां दुर्गा को विशेष प्रकार के नैवेद्य से प्रसन्न कर सकते हैं। आरोग्य प्राप्ति के लिए घी, आयुष्य के लिए चीनी, दुख निवारण के लिए खीर, सुख - समृद्धि प्राप्ति के लिए मालपुआ, शारीरिक पुष्टि के लिए केले, आकर्षण के लिए शहद, शोक मुक्ति के लिए गुड़, संतान सुख में वृद्धि के लिए नारियल, भयमुक्ति के लिए गंगाजल अर्पित करें। नवरात्रि में मां की उपासना कर गृहदोष भी दूर किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति में शक्ति पूजन (नवरात्रि) का विशेष महत्व है।
शक्ति के रूप में किसी न किसी देवी के रूप में उपासना शुरू हो गई थी। रामायण, महाभारत आदि में होती हुई शक्ति उपासना लौकिक साहित्य में समाहित हो गई। आगम और निगम दोनों में ही शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। नवरात्रि में शक्ति के विशेष रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) का पूजन किया जाता है। मां दुर्गा को अंबिका के रूप में जाना जाता है। इनकी उत्पत्ति महाकाली, महा सरस्वती, महालक्ष्मी के सम्मिलत रूप में हुई है। दुर्गम नामक महा दैत्य का वध करने के कारण इन्हें दुर्गा कहा जाता है।
नवरात्रि में ये सावधानियां बरतें
- दुर्गा जी की तीन प्रतिमाओं का एक साथ पूजन न करें
- अखंडित कलश न रखें
- देशी घी से आरती करें
- अखंड ज्योति ठंडी न हो पाए
- कलश में मौलि बंधी होनी चाहिए
- पंच पल्लव (आम पत्ते) बंधे हों
- खंडित फल अर्पित न करें, जैसे- आधा केला, आधा सेव आदि
- महिलाएं खुले बाल, गीले कपड़ों में पूजन न करें
- केशर, चंदन को ताम्र पात्र में न रखें
- दूर्वा न चढ़ाएं
- पूजा आसन में बैठकर करें
- उत्तर-पूर्व मुख करते पूजन करें
नवरात्रि में इस समय करें कलश स्थापना
प्रथम कलश स्थापना समय - प्रात: 5:59 बजे से सुबह 8:55 बजे
द्वितीय कलश स्थापना समय - सुबह 11:34 बजे से दोपहर 12:34 बजे
तृतीय कलश स्थापना समय - दोपहर 12:21 बजे से 2:26 बजे तक
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शक्ति के रूप में किसी न किसी देवी के रूप में उपासना शुरू हो गई थी। रामायण, महाभारत आदि में होती हुई शक्ति उपासना लौकिक साहित्य में समाहित हो गई। आगम और निगम दोनों में ही शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। नवरात्रि में शक्ति के विशेष रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) का पूजन किया जाता है। मां दुर्गा को अंबिका के रूप में जाना जाता है। इनकी उत्पत्ति महाकाली, महा सरस्वती, महालक्ष्मी के सम्मिलत रूप में हुई है। दुर्गम नामक महा दैत्य का वध करने के कारण इन्हें दुर्गा कहा जाता है।
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नवरात्रि में ये सावधानियां बरतें
- दुर्गा जी की तीन प्रतिमाओं का एक साथ पूजन न करें
- अखंडित कलश न रखें
- देशी घी से आरती करें
- अखंड ज्योति ठंडी न हो पाए
- कलश में मौलि बंधी होनी चाहिए
- पंच पल्लव (आम पत्ते) बंधे हों
- खंडित फल अर्पित न करें, जैसे- आधा केला, आधा सेव आदि
- महिलाएं खुले बाल, गीले कपड़ों में पूजन न करें
- केशर, चंदन को ताम्र पात्र में न रखें
- दूर्वा न चढ़ाएं
- पूजा आसन में बैठकर करें
- उत्तर-पूर्व मुख करते पूजन करें
नवरात्रि में इस समय करें कलश स्थापना
प्रथम कलश स्थापना समय - प्रात: 5:59 बजे से सुबह 8:55 बजे
द्वितीय कलश स्थापना समय - सुबह 11:34 बजे से दोपहर 12:34 बजे
तृतीय कलश स्थापना समय - दोपहर 12:21 बजे से 2:26 बजे तक