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शारदीय नवरात्र: मइया हाथी पर आएंगी और भैंसे पर जाएंगी, ये है देवी आह्वान का शुभ मुहूर्त
Thu, 26 Sep 2019 05:44 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 26 Sep 2019 05:44 PM IST
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शारदीय नवरात्र
- फोटो : गूगल
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इस बार शारदीय नवरात्र 29 सितंबर से शुरू होकर 7 अक्तूबर तक चलेंगे। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत भी रखा जाता है। खास बात यह है कि इस बार नौ दिनों के नवरात्र होंगे, जो आम जनमानस में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करेंगे।
पंडित केए दुबे पद्मेश और पंडित मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार मइया हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। जो माता रानी की पूजा-अर्चना करेंगे उन्हें सुख, शांति और समृद्धि मिलेगी।
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पंडित केए दुबे पद्मेश और पंडित मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार मइया हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। जो माता रानी की पूजा-अर्चना करेंगे उन्हें सुख, शांति और समृद्धि मिलेगी।
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जबकि मइया भैंसें पर जाएंगी। इसके कारण पारिवारिक तनाव दे सकती हैं। विसर्जन पर विशेष ध्यान रखें। देवी का आह्वान और स्थापना 29 सितंबर रविवार को सूर्योदय तक कर लें, वैसे मुहूर्त दिन भर रहेगा।
कलश स्थापना का मुहूर्त
पंडित सूर्य नारायण शुक्ला ने बताया कि मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 29 सितंबर को सुबह 6:16 से 7:40 बजे तक है। दूसरा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:48 से 12:35 बजे तक है।
कलश स्थापना का मुहूर्त
पंडित सूर्य नारायण शुक्ला ने बताया कि मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 29 सितंबर को सुबह 6:16 से 7:40 बजे तक है। दूसरा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:48 से 12:35 बजे तक है।
29 सितंबर - प्रतिपदा को शैलपुत्री
30 सितंबर - द्वितीया को ब्रह्मचारिणी
1 अक्तूबर - तृतीया को चंद्रघंटा
2 अक्तूबर - चतुर्थी को कूष्मांडा
3 अक्तूबर - पंचमी को स्कंदमाता
4 अक्तूबर को-षष्ठी को कात्यायानी
5 अक्तूबर - सप्तमी को कालरात्रि
6 अक्तूबर - अष्टमी को महागौरी
7 अक्तूबर - नवमी को सिद्धिदात्री
30 सितंबर - द्वितीया को ब्रह्मचारिणी
1 अक्तूबर - तृतीया को चंद्रघंटा
2 अक्तूबर - चतुर्थी को कूष्मांडा
3 अक्तूबर - पंचमी को स्कंदमाता
4 अक्तूबर को-षष्ठी को कात्यायानी
5 अक्तूबर - सप्तमी को कालरात्रि
6 अक्तूबर - अष्टमी को महागौरी
7 अक्तूबर - नवमी को सिद्धिदात्री