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बैंक अफसरों को हनीट्रैप में फंसा नटवरलाल ने करोड़ों की लगाई चपत, हर खेल में कोई न कोई महिला शामिल
Wed, 19 Jun 2019 03:22 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 19 Jun 2019 03:22 AM IST
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नटवरलाल ओम जायसवाल उर्फ राजन अहलूवालिया उर्फ ओपी जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला
एक अरब की ठगी करने वाला नटवरलाल ओम जायसवाल उर्फ राजन अहलूवालिया उर्फ ओपी जायसवाल ने ठगी का शातिर नेटवर्क खड़ा किया था। वह हनीट्रैप से बैंक अधिकारियों को जाल में फंसाता था, फिर फर्जीवाड़ा कर बैंकों से लोन लेकर रफूचक्कर हो जाता था।
लगभग हर एक मामले में उसके साथ एक महिला शामिल रहती थी। बैंक जाने से लेकर पैसे निकालने और जमा करने की उसकी जिम्मेदारी रहती थी। यही वजह है कि राजस्थान में भी उसकी महिला साथी गिरफ्तार हुई है।
निजी और सरकारी दोनों बैंकों को लगाया चूना
शहर में जालसाज ने निजी से लेकर सरकारी बैंकों को भी भारी चपत लगाई। ओम ने बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंकों से 34 कंपनियों व फर्मों के खातों पर लोन लिया था।
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लगभग हर एक मामले में उसके साथ एक महिला शामिल रहती थी। बैंक जाने से लेकर पैसे निकालने और जमा करने की उसकी जिम्मेदारी रहती थी। यही वजह है कि राजस्थान में भी उसकी महिला साथी गिरफ्तार हुई है।
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निजी और सरकारी दोनों बैंकों को लगाया चूना
शहर में जालसाज ने निजी से लेकर सरकारी बैंकों को भी भारी चपत लगाई। ओम ने बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंकों से 34 कंपनियों व फर्मों के खातों पर लोन लिया था।
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अभी तक आठ मामले सामने आए
शहर में अभी तक ओम जायसवाल के आठ कारनामे सामने आए हैं। इसमें कोतवाली, फीलखाना, घाटमपुर, गंगाघाट उन्नाव समेत दो-दो मामले नौबस्ता और किदवई नगर में दर्ज हैं। वहीं तीन मामले राजस्थान के सीकर में दर्ज हुए। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का इतिहास खंगाला जा रहा है. जिससे स्पष्ट होगा कि शहर से लेकर देशभर में उसके खिलाफ कितने मामले दर्ज है।
इन तरीकों से करता था ठगी
जालसाज ओम जायसवाल बंद पड़े होटलों और अन्य संपत्तियों का एग्रीमेंट टू सेल करके इन संपत्तियों का वास्तविक से कई गुना अधिक वैल्यूएशन करवाता था। इसमें वह अलग-अलग नामों से तैयार किए गए आयकर विवरण, टैक्स जमा की रसीद, वोटर कार्ड आदि फर्जी दस्तावेजों पर बैंकों से लोन लेता था। इसमें बैंक अफसरों की भी मिलीभगत रहती थी, जिससे आसानी से लोन पास हो जाता था।
शहर में अभी तक ओम जायसवाल के आठ कारनामे सामने आए हैं। इसमें कोतवाली, फीलखाना, घाटमपुर, गंगाघाट उन्नाव समेत दो-दो मामले नौबस्ता और किदवई नगर में दर्ज हैं। वहीं तीन मामले राजस्थान के सीकर में दर्ज हुए। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का इतिहास खंगाला जा रहा है. जिससे स्पष्ट होगा कि शहर से लेकर देशभर में उसके खिलाफ कितने मामले दर्ज है।
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नटवरलाल ने अधिकतर लोन में जो बैंक गारंटी लगाई थी, वह फर्जी निकली, जिससे बैंक का पैसा डूब गया। कई मामलों में उसने जो गारंटी की रकम लगाई थी, उसे बैंक अधिकारियों से मिलकर कैश करा लिया। कुल मिलाकर बैंकों को ही चूना लगता रहा।
ओम जायसवाल एक बार हरिद्वार में गंगा किनारे कपड़े छोड़कर भाग गया। एक बार मुरादाबाद के गढ़मुक्तेश्वर में गंगा किनारे कार खड़ी कर गायब हो गया। ये करतूत उसने खुद को मरा साबित करने के लिए की थी। जिससे बैंकों से लिया हुआ कर्जा मरने के साथ-साथ खत्म हो जाए।
ओम जायसवाल ने लोन कराने के लिए खुद व अपने साथियों के नाम से दर्जनों फर्जी फर्में बनाईं। ये फर्में अस्तित्व में ही नहीं थीं। इसका वाणिज्यकर समेत अन्य संबंधित विभागों में पंजीकरण भी नहीं था, फिर फर्मों का करोड़ों रुपये का व्यापार दिखाकर बैंकों से लोन लिया।
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