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नेशनल कबड्डी खिलाड़ी शशिप्रभा चलाएंगी रोडवेज बस, बोली- लड़कियां किसी से कम नहीं
Thu, 25 Feb 2021 04:33 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 25 Feb 2021 04:33 PM IST
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शशिप्रभा
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी में पिंक एसी बसों को चलाने के लिए महिला ड्राइवरों को प्रशिक्षण एक मार्च से दिया जाएगा। अब तक 18 लड़कियों को चयन किया जा चुका है। आठवीं पास योग्यता वाली इस प्रशिक्षण में न सिर्फ स्नातक, परास्नातक पास लड़कियां शामिल हो रही हैं, बल्कि नेशनल कबड्डी खिलाड़ी शशिप्रभा भी इस बैच में हैं। कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में 2012 में कबड्डी की ट्रेनिंग उन्होंने ही शुरू कराई थी। इस समय वे आगरा के एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में कबड्डी कोच की नौकरी कर रही हैं। नौबस्ता संजय गांधी नगर की रहने वाली शशिप्रभा ने बताया कि उनका चयन महिला बस ड्राइवर प्रशिक्षण के लिए हुआ है।
उनका शौक है कि वह बस चलाएं। समाज को बताना भी है कि महिलाएं और लड़कियां हर वह काम कर सकती हैं, जिसे आमतौर पर मुश्किल मानकर सिर्फ पुरुषों का पेशा बताया गया है। शशि ने 2012-2014 तक ग्रीनपार्क स्टेडियम में लड़के-लड़कियों को कबड्डी की ट्रेनिंग दी। इसके बाद आगरा में उनकी पोस्टिंग हो गई। उन्होंने किदवई नगर के बृहस्पति महिला डिग्री कॉलेज से स्नातक और बीपीएड की डिग्री ली।
इसके बाद बंगलूरू में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से डेढ़ वर्ष का कबड्डी में डिप्लोमा भी लिया है। भारत सरकार की तरफ से खेलो इंडिया की नेशनल प्रतियोगिता में 2019 में पुणे और 2020 में गुवाहाटी में यूपी टीम को लेकर गईं। इसमें यूपी को नेशनल कबड्डी में तीसरा स्थान मिला था।
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उनका शौक है कि वह बस चलाएं। समाज को बताना भी है कि महिलाएं और लड़कियां हर वह काम कर सकती हैं, जिसे आमतौर पर मुश्किल मानकर सिर्फ पुरुषों का पेशा बताया गया है। शशि ने 2012-2014 तक ग्रीनपार्क स्टेडियम में लड़के-लड़कियों को कबड्डी की ट्रेनिंग दी। इसके बाद आगरा में उनकी पोस्टिंग हो गई। उन्होंने किदवई नगर के बृहस्पति महिला डिग्री कॉलेज से स्नातक और बीपीएड की डिग्री ली।
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इसके बाद बंगलूरू में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से डेढ़ वर्ष का कबड्डी में डिप्लोमा भी लिया है। भारत सरकार की तरफ से खेलो इंडिया की नेशनल प्रतियोगिता में 2019 में पुणे और 2020 में गुवाहाटी में यूपी टीम को लेकर गईं। इसमें यूपी को नेशनल कबड्डी में तीसरा स्थान मिला था।
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दो बहनें बैंक में, पिता पुलिस इंस्पेक्टर से रिटायर
शशिप्रभा की मां सरिता सिंह गृहिणी हैं। पिता रवींद्र भान सिंह यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर पद से हाल में रिटायर हुए हैं। बड़ी बहन भारतीय स्टेट बैंक में प्रबंधक हैं तो उनसे छोटी बहन आर्यावर्त बैंक में सहायक प्रबंधक हैं। उन्होंने कहा कि वे रुपयों के लिए नहीं, शौक के लिए बस ड्राइवर बनना चाहती हैं। एक संविदा बस ड्राइवर को जितना मानदेय मिलता है, उससे ज्यादा कबड्डी कोच का वेतन है।
नौकरी के लिए कई काबिल लड़कियां चयनित
विकास नगर के मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल एसपी सिंह ने बताया कि यूं तो आठवीं पास योग्यता रखी गई है लेकिन चुनी गईं लड़कियां काफी पढ़ी लिखी हैं। कुछ को नौकरी की सख्त जरूरत है तो कुछ में यह जज्बा है कि वह रोडवेज बस क्यों नहीं चला सकती हैं।
इसलिए वे 27 लड़कियों का बैच बनाने में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। बल्कि उनको परख रहे हैं कि चयनित अभ्यर्थी अपनी ट्रेनिंग पूरी कर सकें। एक मार्च से चुनी गईं 18 लड़कियों को इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग केे लिए बुलाया गया है। इस दौरान अगर लड़कियां बढ़ती हैं तो बैच में संख्या बढ़ जाएगी।
शशिप्रभा की मां सरिता सिंह गृहिणी हैं। पिता रवींद्र भान सिंह यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर पद से हाल में रिटायर हुए हैं। बड़ी बहन भारतीय स्टेट बैंक में प्रबंधक हैं तो उनसे छोटी बहन आर्यावर्त बैंक में सहायक प्रबंधक हैं। उन्होंने कहा कि वे रुपयों के लिए नहीं, शौक के लिए बस ड्राइवर बनना चाहती हैं। एक संविदा बस ड्राइवर को जितना मानदेय मिलता है, उससे ज्यादा कबड्डी कोच का वेतन है।
नौकरी के लिए कई काबिल लड़कियां चयनित
विकास नगर के मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल एसपी सिंह ने बताया कि यूं तो आठवीं पास योग्यता रखी गई है लेकिन चुनी गईं लड़कियां काफी पढ़ी लिखी हैं। कुछ को नौकरी की सख्त जरूरत है तो कुछ में यह जज्बा है कि वह रोडवेज बस क्यों नहीं चला सकती हैं।
इसलिए वे 27 लड़कियों का बैच बनाने में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। बल्कि उनको परख रहे हैं कि चयनित अभ्यर्थी अपनी ट्रेनिंग पूरी कर सकें। एक मार्च से चुनी गईं 18 लड़कियों को इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग केे लिए बुलाया गया है। इस दौरान अगर लड़कियां बढ़ती हैं तो बैच में संख्या बढ़ जाएगी।