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जानें, लव-कुश का जन्म और सीता के पाताल में जाने का ‘रहस्य’

Sun, 26 Feb 2017 10:01 AM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 26 Feb 2017 10:01 AM IST
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mystery of luv kush born and sita
लवकुश मंदिर बिठूर
लव-कुश का जन्म कहां हुआ, सीता पाताल में कैसे और कहां समाईं इसका रहस्य बरकरार जरूर है। लेकिन यूपी का एक जिला ऐसा है जो इन सारे सवालों का जवाब ही नहीं सबूत भी दे रहा है। अब इन सबूतों में कहां तक सच्चाई है ये बताने वाला तो यहां फिलहाल कोई नहीं है। हम बात कर रहे हैं कानपुर शहर से 17 किलोमीटर दूर बिठूर में बने महर्षि वाल्मीकि आश्रम की।  लव-कुश की जन्म स्थली कही जाने वाले बिठूर में हर दिन हजारों की संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। केवल शहर के ही नहीं, बल्कि कानपुर आने वाले सैलानी भी भगवान राम से जुड़ी इस स्थली के मोह से दूर नहीं हो पाते हैं। सीता रसोई, वाल्मीकि आश्रम आदि के अस्तित्व आज भी यहां विराजमान हैं। यहां माता सीता का एक मंदिर भी है। मंदिर में माता सीता की प्रतिमा अपने पुत्र लव और कुश के साथ है।
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आठ लाख साल पहले यहां आईं थीं सीता

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बिठूर के ऐतिहासिक मंदिर
मंदिर के पुजारी अवधेश तिवारी ने बताया कि आठ लाख साल पहले माता सीता बिठूर आईं थी और यहीं पर लव-कुश का जन्म हुआ था। लव-कुश ने इसी स्थान पर वाल्मीकि से शिक्षा भी प्राप्त की थी। वहीं राम जानकी मन्दिर में लव कुश के बाण आज भी रखे हुए हैं। गंगा नदी के किनारे बसे इस स्थान पर एक ओर सीता रसोई भी बनी हुई है। यहीं पर सीता जी भोजन बनाती थीं। उस समय उपयोग किए गए बर्तन भी सीता रसोई में मौजूद हैं। पुजारी ने बताया कि लव-कुश यहीं पर मां गंगा में स्नान करते थे और यहीं पर बाण चलाना, घुड़सवारी आदि भी सीखी थी।
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यहीं पकड़ा गया था अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा

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बिठूक के ऐतिहासिक मंदिर

भगवान राम ने जब अश्वमेघ यज्ञ कराया था, तो कोई भी राजा उस समय उनके घोड़े को पकड़ने की हिम्मत नहीं कर पाया था। वाल्मीकि रामायण में उल्लेख है कि जब वह घोडा बिठूर पहुंचा तो लव-कुश ने उसे बांध लिया था। इसके बाद राम भक्त हनुमान यहां घोड़ा छुडाने के लिए आये थे। लव-कुश से युद्ध में वह परास्त हो गए और उन्हें यहीं पर बंधक बना लिया गया था। आज भी यहां पर वह स्थल बना हुआ है, जहां पर हनुमान जी को कैद किया गया था। इसके बाद घोड़ा छुड़ाने पहुंचे लक्ष्मण जी को भी यहीं पर बंधक बना लिया गया था।

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पाताल में समाई थीं सीता

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बिठूर के ऐतिहासिक मंदिर

बताया जाता है कि यहीं पर सीता जी पाताल में समाई थीं। हनुमान और लक्ष्मण की कोई खबर न मिलने पर भगवान राम स्वयं युद्ध के लिए यहां पहुंचे थे। युद्ध के बीच में ही उन्हें पता चला था कि जिन लव-कुश से वे युद्ध कर रहे हैं, वे उनके ही पुत्र हैं। इसके बाद माता सीता से राम की मुलाकात भी यहीं पर हुई थी। जब राम ने माता सीता को स्पर्श करने की कोशिश की तो वे धरती में समा गईं। यह स्थान भी यहां मौजूद हैं। सुबह शाम इस स्थल पर पूजा की जाती है।

यहां आज भी है राम युग का पेड़ और कुआं

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बिठूर कानपुर

वह कुंआ जिससे सीता जी पानी का उपयोग करती थी आज भी मौजूद हैं। प्राचीन समय के इस कुएं का पानी आज भी नहीं सूखा है। इसके अलावा लव-कुश जिस पेड़ के नीचे शिक्षा लिया करते थे, वह भी यहां मौजूद है।

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