जानें, लव-कुश का जन्म और सीता के पाताल में जाने का ‘रहस्य’
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आठ लाख साल पहले यहां आईं थीं सीता
यहीं पकड़ा गया था अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा
भगवान राम ने जब अश्वमेघ यज्ञ कराया था, तो कोई भी राजा उस समय उनके घोड़े को पकड़ने की हिम्मत नहीं कर पाया था। वाल्मीकि रामायण में उल्लेख है कि जब वह घोडा बिठूर पहुंचा तो लव-कुश ने उसे बांध लिया था। इसके बाद राम भक्त हनुमान यहां घोड़ा छुडाने के लिए आये थे। लव-कुश से युद्ध में वह परास्त हो गए और उन्हें यहीं पर बंधक बना लिया गया था। आज भी यहां पर वह स्थल बना हुआ है, जहां पर हनुमान जी को कैद किया गया था। इसके बाद घोड़ा छुड़ाने पहुंचे लक्ष्मण जी को भी यहीं पर बंधक बना लिया गया था।
पाताल में समाई थीं सीता
बताया जाता है कि यहीं पर सीता जी पाताल में समाई थीं। हनुमान और लक्ष्मण की कोई खबर न मिलने पर भगवान राम स्वयं युद्ध के लिए यहां पहुंचे थे। युद्ध के बीच में ही उन्हें पता चला था कि जिन लव-कुश से वे युद्ध कर रहे हैं, वे उनके ही पुत्र हैं। इसके बाद माता सीता से राम की मुलाकात भी यहीं पर हुई थी। जब राम ने माता सीता को स्पर्श करने की कोशिश की तो वे धरती में समा गईं। यह स्थान भी यहां मौजूद हैं। सुबह शाम इस स्थल पर पूजा की जाती है।
यहां आज भी है राम युग का पेड़ और कुआं
वह कुंआ जिससे सीता जी पानी का उपयोग करती थी आज भी मौजूद हैं। प्राचीन समय के इस कुएं का पानी आज भी नहीं सूखा है। इसके अलावा लव-कुश जिस पेड़ के नीचे शिक्षा लिया करते थे, वह भी यहां मौजूद है।