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मुस्लिम बुद्धिजीवियों की भाजपा पर प्रतिक्रिया, कहा- ‘हमारा भरोसा जीतना होगा’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 27 Apr 2017 08:24 AM IST
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Muslim response to BJP
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के चांसलर जफर यूनुस सरेशवाला ने मंगलवार को कानपुर में मुस्लिमों को भाजपा से जुड़ने के फायदे बताये थे। बुधवार को शहर के मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि बीजेपी का नाम आते ही उसका विरोध करने वाले मुस्लिमों का नजरिया बदला है। पहले की तुलना में मुस्लिमों में भाजपा के लिए नरम रुख पैदा हुआ है क्योंकि पीएम सबका साथ सबका विकास की बात करते हैं। हालांकि उनकी पार्टी के कुछ लोग मुस्लिमों के व्यक्तिगत और धार्मिक जीवन पर टिप्पणी कर उन्हें नाराज करते हैं। बीजेपी मुस्लिमों का जितना भरोसा जीतेगी, उन्हें उतना करीब पाएगी।
शिया मुस्लिम बुद्धिजीवी डॉ. एमए नकवी का यह कहना कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते, गलत है। बीजेपी के शीर्ष नेता समय-समय पर मुस्लिमों का समर्थन मिलने के बयान दे रहे हैं। चुनाव नतीजों में यह बात सामने आई है। अगर शत प्रतिशत मुसलमानों का समर्थन भाजपा चाहती है तो उनका भरोसा भी जीतना होगा।
तहारत मंच के संयोजक डॉ. मुस्तफा तारिक ने मुताबिक जफर सरेशवाला जैसे लोगों को मुस्लिम समाज को बार-बार बुलाना चाहिए। वह प्रधानमंत्री के करीबी हैं और अगर वह मुसलमानों के बीच उनकी समस्याओं का समाधान कराने की बात लेकर आ रहे हैं तो मुस्लिमों को भी उनके करीब जाना चाहिए। मुसलमान को अपना कारोबार, अपनी धार्मिक आजादी देने वाले लोगों का समर्थन करना चाहिए। कांग्रेस और सपा पर मुसलमानों ने सबसे ज्यादा भरोसा किया लेकिन देश के आजाद होने के बाद गर्त में गया है। अगर बीजेपी से जुड़े कुछ लोग गलत बयानी न करें तो मुस्लिमों का भरोसा बढ़ेगा।
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नार्दर्न टेनरी के मालिक मोईन लारी ने बताया कि मुसलमानों को किसी भी पार्टी का बंधुआ मजदूर बनकर नहीं रहना चाहिए। जिन लोगों ने मुसलमानों को बीजेपी का डर दिखाकर उनके वोट हासिल किए, उन्होंने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया। मोदी पीएम हैं और योगी सीएम। यह दोनों एक जिम्मेदारी वाली भूमिका में हैं। चाहे हिंदू हो या मुसलमान, वह भारत का नागरिक है। यह लोग होशियारी से सत्ता चला रहे हैं। मुसलमानों को सत्ता के करीब होना चाहिए क्योंकि सरकार किसी व्यक्ति या पार्टी की नहीं होती है। देश और प्रदेश की जनता की नुमाइंदगी करती है।
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शिया मुस्लिम बुद्धिजीवी डॉ. एमए नकवी का यह कहना कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते, गलत है। बीजेपी के शीर्ष नेता समय-समय पर मुस्लिमों का समर्थन मिलने के बयान दे रहे हैं। चुनाव नतीजों में यह बात सामने आई है। अगर शत प्रतिशत मुसलमानों का समर्थन भाजपा चाहती है तो उनका भरोसा भी जीतना होगा।
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तहारत मंच के संयोजक डॉ. मुस्तफा तारिक ने मुताबिक जफर सरेशवाला जैसे लोगों को मुस्लिम समाज को बार-बार बुलाना चाहिए। वह प्रधानमंत्री के करीबी हैं और अगर वह मुसलमानों के बीच उनकी समस्याओं का समाधान कराने की बात लेकर आ रहे हैं तो मुस्लिमों को भी उनके करीब जाना चाहिए। मुसलमान को अपना कारोबार, अपनी धार्मिक आजादी देने वाले लोगों का समर्थन करना चाहिए। कांग्रेस और सपा पर मुसलमानों ने सबसे ज्यादा भरोसा किया लेकिन देश के आजाद होने के बाद गर्त में गया है। अगर बीजेपी से जुड़े कुछ लोग गलत बयानी न करें तो मुस्लिमों का भरोसा बढ़ेगा।
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नार्दर्न टेनरी के मालिक मोईन लारी ने बताया कि मुसलमानों को किसी भी पार्टी का बंधुआ मजदूर बनकर नहीं रहना चाहिए। जिन लोगों ने मुसलमानों को बीजेपी का डर दिखाकर उनके वोट हासिल किए, उन्होंने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया। मोदी पीएम हैं और योगी सीएम। यह दोनों एक जिम्मेदारी वाली भूमिका में हैं। चाहे हिंदू हो या मुसलमान, वह भारत का नागरिक है। यह लोग होशियारी से सत्ता चला रहे हैं। मुसलमानों को सत्ता के करीब होना चाहिए क्योंकि सरकार किसी व्यक्ति या पार्टी की नहीं होती है। देश और प्रदेश की जनता की नुमाइंदगी करती है।