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Kanpur: नौ साल पहले जेल भिजवाने की रंजिश में हुई थी हत्या, दो को उम्रकैद…सबूतों के अभाव में दो बरी, पढ़ें मामला

Thu, 20 Jun 2024 08:13 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 20 Jun 2024 08:13 AM IST
सार

Kanpur News:  रंगदारी में जेल भिजवाने की रंजिश में युवक की हत्या कर दी गई थी। मामले में कोर्ट ने दो को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि सबूतों के अभाव में दो दोषमुक्त साबित हुए हैं।

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murder took place due to enmity over being sent to jail, two sentenced to life imprisonment and two acquitted
कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में रंगदारी के मुकदमे में जेल भिजवाने की रंजिश में नौ साल पहले दिनदहाड़े हुई युवक की हत्या के दो दोषियों को अपर जिला जज प्रथम राजेश चौधरी ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 22-22 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की आधी धनराशि मृतक के भाई को मिलेगी।

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सबूतों के अभाव में दो आरोपियों को बरी कर दिया गया है। फरार एक आरोपी की फाइल अलग कर दी गई है। कर्नलगंज स्थित कतरन के कारखाने में 18 अप्रैल 2015 को फैयाज हुसैन भाई सरफराज उर्फ मुन्ने व एक महिला कारीगर लाजो के साथ काम कर रहे थे।
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तभी कोहना थाना क्षेत्र के एलनगंज कालोनी निवासी तफसीर और बजरिया निवासी नसीर उर्फ लाल बादशाह पहुंचे और तमंचे से सरफराज को गोली मारकर भाग निकले। सरफराज को हैलट ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। फैयाज ने कर्नलगंज थाने में तफसीर व नसीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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दो लाख रुपये में दी थी हत्या की सुपारी
अगले दिन दूसरी तहरीर देकर हीरामन का पुरवा निवासी मो. समी उर्फ पापे के भी हत्या में शामिल होने की बात कही थी। पुलिस ने तफसीर और नसीर को गिरफ्तार किया तो उन्होंने बताया कि सरफराज के रिश्तेदार हीरामन का पुरवा निवासी नूर आलम उर्फ मुंडन उर्फ मुन्ना ने दो लाख रुपये में सरफराज की हत्या की सुपारी दी थी।

12 गवाह कोर्ट में पेश किए गए
हत्या में इस्तेमाल तमंचों को उन्होंने फूलवाली गली निवासी नईम के कारखाने में छिपाया था और वहीं खुद भी छिप गए थे। इस पर पुलिस ने तफसीर, नसीर, मो. समी, नूर आलम व मो. नईम के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। एडीजीसी प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि अभियोजन की ओर से मृतक के भाई फैयाज समेत 12 गवाह कोर्ट में पेश किए गए।

रंजिश में सरफराज की हत्या की गई थी
फैयाज ने बताया था कि नसीर सरफराज से रुपये मांगता था।  इस पर सरफराज ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करार्ई थी। नसीर व उसके भाई को जेल जाना पड़ा था। इसी रंजिश में नसीर ने साथियों के साथ मिलकर सरफराज की हत्या कर दी।

मो. समी व नूर आलम को सबूतों के अभाव में किया बरी
मुकदमे में आरोपी मो. नईम के हाजिर न होने पर अगस्त 2023 में उसकी फाइल अलग कर दी गई थी। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने तफसीर और नसीर को हत्या व आर्म्स एक्ट का दोषी मानकर सजा सुनाई। मो. समी व नूर आलम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

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